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क्या छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों का रिजल्ट सुधारने अंग्रेजी को बाइपास कर रहे जिम्मेदार: प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने लिखा सचिव को पत्र

छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने स्कूल शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर शासकीय स्कूलों में विषय चयन को लेकर चल रही मनमानी पर रोक लगाने की मांग ...और पढ़ें

By Vakesh SahuEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Tue, 22 Sep 2026 11:01:21 PM (IST)Updated Date: Tue, 22 Sep 2026 11:02:51 PM (IST)
क्या छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों का रिजल्ट सुधारने अंग्रेजी को बाइपास कर रहे जिम्मेदार: प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने लिखा सचिव को पत्र
अंग्रेजी को बाइपास किए जाने की शिकायत पर आधारित प्रतीकात्मक एआई तस्वीर।

HighLights

  1. शासकीय स्कूलों में विषय चयन की मनमानी पर रोक की मांग
  2. प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने शिक्षा सचिव को लिखा पत्र
  3. अंग्रेजी विषय न मिलने से भविष्य हो सकता है प्रभावित

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने राज्य के शासकीय स्कूलों में प्राचार्यों और शिक्षकों पर विद्यार्थियों के विषय चयन में मनमानी बरतने का आरोप लगाया है। एसोसिएशन की ओर से स्कूल शिक्षा सचिव को पत्र प्रेषित कर तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है।

एसोसिएशन का कहना है कि राज्य में माध्यमिक शिक्षा मंडल की दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षाओं के खराब परिणामों के बाद प्राचार्यों पर लगातार प्रशासनिक कार्रवाई का दबाव बना हुआ है, जिसके कारण जमीनी स्तर पर विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।


अंग्रेजी विषय से वंचित करने का आरोप

एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने जानकारी दी है कि खराब परीक्षा परिणामों के डर से कई शासकीय स्कूलों में नौवीं और ग्यारहवीं के विद्यार्थियों को उनकी इच्छा के विरुद्ध अंग्रेजी विषय लेने से रोका जा रहा है। अंग्रेजी के परिणाम सुधारने या अपनी जवाबदेही से बचने के लिए छात्रों को अंग्रेजी के स्थान पर बैंकिंग और फाइनेंस जैसे वैकल्पिक विषय चुनने के लिए अप्रत्यक्ष रूप से बाध्य किया जा रहा है।

भविष्य में होगी परेशानी

जानकारों का मानना है कि बारहवीं कक्षा में अंग्रेजी विषय के बिना उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों को आगे चलकर उच्च शिक्षा और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों, जैसे कि नर्सिंग और फार्मेसी आदि में प्रवेश पाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

ऐसी पाबंदियां ठीक नहीं

एक तरफ जहां केंद्र और राज्य सरकारें देश व प्रदेश में स्कूल ड्रॉपआउट (बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों) की दर को कम करने के लिए तमाम तरह के सकारात्मक प्रयास कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर स्कूलों स्तर पर लगाई जाने वाली ऐसी पाबंदियां बच्चों को उच्च शिक्षा से दूर कर सकती हैं।

चयन की स्वतंत्रता दें

एसोसिएशन ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि विद्यार्थियों को उनकी रुचि और आवश्यकता के अनुसार विषयों का चयन करने की पूरी स्वतंत्रता मिले, ताकि उनके उज्ज्वल भविष्य पर किसी प्रकार का संकट न आए।