
टी. सूर्याराव, नईदुनिया, रायपुर। कृषि को परंपरागत स्वरूप से निकालकर तकनीक, अनुसंधान और नवाचार से जोड़ने की जरूरत पर राजधानी रायपुर के मैरियट होटल में आयोजित नईदुनिया फोरम के विशेष सत्र में व्यापक मंथन हुआ। "छत्तीसगढ़ की शान : नवाचारी किसान" विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और नवाचार से जुड़े संस्थानों के प्रतिनिधियों ने प्रदेश की कृषि व्यवस्था के बदलते स्वरूप, किसानों के सामने मौजूद चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विचार साझा किए।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह था कि छत्तीसगढ़ के किसानों को केवल परंपरागत खेती तक सीमित रखने के बजाय उन्हें आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान, मूल्य संवर्धन, पशुपालन, मत्स्य पालन और कृषि आधारित उद्यमों से जोड़ा जाए। चर्चा के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि आने वाले समय में कृषि केवल अन्न उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि रोजगार और उद्यम का बड़ा क्षेत्र बनने जा रही है।
फोरम में इस बात पर सहमति बनी कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा। कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, बेहतर विपणन, नई तकनीकों का उपयोग और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देना भी उतना ही आवश्यक है। छत्तीसगढ़ में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों, पशुधन और जैव विविधता का बेहतर उपयोग कर कृषि को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि विश्वविद्यालय और अनुसंधान संस्थान अब केवल अकादमिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रह सकते। उनकी जिम्मेदारी किसानों तक नई तकनीक, वैज्ञानिक जानकारी और व्यावहारिक समाधान पहुंचाने की भी है। कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने, स्थानीय समस्याओं के समाधान विकसित करने और युवाओं को कृषि आधारित नवाचार से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया।
नईदुनिया फोरम का यह सत्र केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने यह संदेश भी दिया कि यदि शासन, विश्वविद्यालय, अनुसंधान संस्थान और किसान मिलकर काम करें तो छत्तीसगढ़ कृषि नवाचार का अग्रणी राज्य बन सकता है। बदलते दौर में खेती को लाभकारी, टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए तकनीक और नवाचार ही सबसे बड़ा आधार बनेंगे। कार्यक्रम का संचालन नईदुनिया के इनपुट हेड रामकृष्ण डोंगरे ने किया।
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