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जल, जंगल, जमीन के मुद्दे पर आदिवासी क्षेत्रों में पैठ बढ़ाने में जुटी कांग्रेस, सरगुजा और बस्तर में फोकस

छत्तीसगढ़ में माओवादी हिंसा का प्रभाव कम होने के बाद कांग्रेस आदिवासी क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक पैठ मजबूत करने के लिए जल, जंगल और जमीन के मुद्दों को...और पढ़ें

By Abhishek RaiEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Mon, 29 Jun 2026 11:00:28 AM (IST)Updated Date: Mon, 29 Jun 2026 11:15:12 AM (IST)
जल, जंगल, जमीन के मुद्दे पर आदिवासी क्षेत्रों में पैठ बढ़ाने में जुटी कांग्रेस, सरगुजा और बस्तर में फोकस
छत्तीसगढ़ कांग्रेस की प्रतीकात्मक तस्वीर। अर्काइव

HighLights

  1. कांग्रेस आदिवासी इलाकों में जल, जंगल, जमीन के मुद्दे पर बढ़ा रही सक्रियता
  2. राहुल गांधी और प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं ने संगठन विस्तार पर चर्चा की
  3. बस्तर और सरगुजा संभाग में जनआंदोलन खड़ा करने की विस्तृत रूपरेखा तैयार

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया.रायपुर। प्रदेश में माओवादी हिंसा का प्रभाव कमजोर पड़ने के बाद कांग्रेस अब आदिवासी क्षेत्रों में राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए जल, जंगल और जमीन के मुद्दे को केंद्र में रखकर नई रणनीति पर काम कर रही है। अभनपुर में आयोजित कांग्रेस के शहर एवं जिला अध्यक्षों के प्रशिक्षण शिविर में नेताओं को संगठन विस्तार के साथ आदिवासी अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का संदेश दिया जा रहा है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 20 जून को प्रशिक्षण शिविर में वरिष्ठ नेताओं के साथ करीब 40 मिनट तक चर्चा की थी। बैठक में प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट, प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डा. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव सहित अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे।


बूथ स्तर तक मजबूती पर चर्चा

चर्चा का मुख्य विषय आदिवासी क्षेत्रों में जल, जंगल, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को लेकर संगठन की रणनीति था। इससे पहले 12 जून को प्रदेश कांग्रेस कमेटी की बैठक में भी आदिवासी बाहुल्य इलाकों में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और खनिज संसाधनों, भूमि अधिकारों तथा वनाधिकार जैसे मुद्दों पर जनआंदोलन खड़ा करने की रूपरेखा तैयार की गई थी।

बस्तर और सरगुजा में शुरू हुआ कांग्रेस का जनसंपर्क

कांग्रेस नेताओं ने बस्तर और सरगुजा संभाग में विभिन्न मुद्दों को लेकर धरना-प्रदर्शन और जनसंपर्क अभियान भी शुरू कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आदिवासी क्षेत्रों में कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता से सत्तारूढ़ भाजपा के सामने नई राजनीतिक चुनौती बढ़ गई है। हीं, औद्योगिक और विकास परियोजनाओं के साथ स्थानीय हितों के बीच संतुलन बनाए रखना राज्य सरकार के लिए कठिन हो गया है।

छत्तीसगढ़ आदिवासी कांग्रेस सलाहकार परिषद का किया गया है गठन

आदिवासी क्षेत्रों में समाज से जुड़े मुद्दों पर समन्वित रणनीति तैयार कर जमीनी स्तर पर संगठन सक्रिय और स्थानीय मुद्दों को लेकर सीधे लोगों तक पहुंच बनाने के लिए विगत माह अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआइसीसी) ने छत्तीसगढ़ आदिवासी कांग्रेस सलाहकार परिषद का गठन किया था। इसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज सहित 19 वरिष्ठ आदिवासी नेता शामिल हैं। परिषद के साथ तीस नेताओं को विशेष आमंत्रित सदस्य भी बनाया गया था, जिसमें पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, जिला कांग्रेस अध्यक्ष, राष्र्टीय समन्वयक और जिला पंचायत स्तर के नेता शामिल हैं।