छत्तीसगढ़ वाणिज्यिक कर निरीक्षक भर्ती परीक्षा बड़ी गड़बड़ियां मिलने के बाद रद्द, कॉपियों में मिले एक जैसे जवाब
छत्तीसगढ़ राज्य कर विभाग ने 2022 की वाणिज्यिक कर निरीक्षक परीक्षा रद्द कर दी। जांच में एक जैसे जवाब, रिकॉर्ड की कमी, पुनर्मूल्यांकन और उत्तरपुस्तिकाओं...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 16 Sep 2026 12:22:46 PM (IST)Updated Date: Wed, 16 Sep 2026 12:22:46 PM (IST)
भर्ती परीक्षा बड़ी गड़बड़ियां मिलने के बाद रद्द। (एआई जनरेटेड)HighLights
- 2022 में लिपिकों के लिए सीमित प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित हुई।
- चयनित अभ्यर्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं में एक जैसे जवाब मिले।
- परीक्षा केंद्र पर उपस्थिति रजिस्टर और समेकित अंकसूची नहीं।
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर: छत्तीसगढ़ के राज्य कर विभाग में लिपिक वर्ग से वाणिज्यिक कर निरीक्षक बनाने के लिए वर्ष 2022 में हुई सीमित प्रतियोगिता परीक्षा में एक के बाद एक कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। जांच में चयनित अभ्यर्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं में एक जैसे जवाब मिलने, परीक्षा केंद्र पर उपस्थिति रजिस्टर नहीं होने, परीक्षा का समेकित परिणाम और अंक सूची तैयार नहीं करने, उत्तरपुस्तिकाओं पर पहचान छिपाने के लिए कोड नहीं लगाने और कुछ अभ्यर्थियों के अंक दोबारा जांच में बढ़ाए जाने की बात सामने आई।
इसके अलावा खरीदी गई और इस्तेमाल व बची हुई उत्तरपुस्तिकाओं की संख्या में भी अंतर मिला। इन खामियों के बाद राज्य कर विभाग ने 26 जून 2022 को हुई पूरी परीक्षा को रद्द कर दिया है।
राज्य कर आयुक्त कार्यालय ने 11 सितंबर 2026 को आदेश जारी कर परीक्षा और इसके आधार पर की गई पूरी चयन प्रक्रिया को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही एक जुलाई 2022 को जारी वह आदेश भी रद्द कर दिया गया, जिसके जरिए चयनित कर्मचारियों को वाणिज्यिक कर निरीक्षक बनाया गया था। इस परीक्षा के आधार पर निरीक्षक बने सभी प्रभावित कर्मचारी अब अपने मूल पद पर वापस जाएंगे।
शिकायत के बाद बनाई गई थी जांच समिति
- वर्ष 2022 में लिपिक वर्ग से वाणिज्यिक कर निरीक्षक पद पर नियुक्ति के लिए 26 जून को सीमित प्रतियोगिता परीक्षा हुई थी। इसके आधार पर एक जुलाई 2022 को चयनित कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी। बाद में परीक्षा और चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आईं। इसके बाद विभाग ने मामले की जांच के लिए समिति बनाई।
- समिति ने परीक्षा और चयन से जुड़े उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की और तीन जुलाई 2026 को अपनी विस्तृत रिपोर्ट विभाग को सौंपी। रिपोर्ट में परीक्षा कराने से लेकर उत्तरपुस्तिकाओं की जांच और अंतिम चयन तक कई स्तरों पर खामियां मिलने की बात कही गई।
आरक्षण के हिसाब से पदों का बंटवारा नहीं
जांच में सामने आया कि परीक्षा से पहले आरक्षण रोस्टर के अनुसार अलग-अलग वर्ग के लिए पदों का बंटवारा नहीं किया गया था। विभाग के आदेश में कहा गया है कि इससे आरक्षण के नियमों का पालन प्रभावित हुआ और सभी पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर देने की व्यवस्था पर भी असर पड़ा।
परीक्षा देने वालों का रिकॉर्ड तक नहीं
- परीक्षा केंद्र पर परीक्षार्थियों की उपस्थिति का रजिस्टर नहीं बनाया गया था। यानी परीक्षा में कौन-कौन कर्मचारी शामिल हुआ, इसका मूल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। जांच समिति ने इसे परीक्षा की विश्वसनीयता के लिए गंभीर खामी माना।
- इसके साथ ही परीक्षा का पूरा परिणाम एक जगह तैयार नहीं किया गया था। अंक सूची भी तैयार या सुरक्षित नहीं रखी गई। ऐसे में अभ्यर्थियों के अंकों की आपस में तुलना कर उनकी सही मेरिट तय करना मुश्किल हो गया।
चयनित अभ्यर्थियों की कापियों में एक जैसे जवाब
- जांच में सामने आया कि चयनित अभ्यर्थियों में से अधिकांश की उत्तरपुस्तिकाओं में एक जैसे जवाब लिखे मिले। रिकॉर्ड में इन जवाबों के एक जैसा होने का कोई संतोषजनक कारण भी नहीं मिला।
- विभाग के आदेश में कहा गया है कि उत्तरपुस्तिकाओं में इस तरह की समानता से परीक्षा निष्पक्ष तरीके से हुई या नहीं, इस पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। इससे परीक्षा के घोषित परिणाम की विश्वसनीयता भी प्रभावित हुई।
नाम छिपाने के लिए कोडिंग नहीं
- उत्तरपुस्तिकाओं की जांच के दौरान अभ्यर्थी की पहचान सामने न आए, इसके लिए कोडिंग की व्यवस्था भी नहीं की गई थी। विभाग के अनुसार इससे मूल्यांकन की गोपनीयता और निष्पक्षता प्रभावित हुई।
- परीक्षा की सामान्य व्यवस्था में उत्तरपुस्तिका की पहचान छिपाने का उद्देश्य यह होता है कि जांच करने वाले को अभ्यर्थी के बारे में जानकारी न हो और मूल्यांकन निष्पक्ष रहे। इस परीक्षा में ऐसी व्यवस्था नहीं अपनाई गई।
दोबारा जांच में बढ़े अंक
- जांच में कुछ अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाने के लिए उत्तरपुस्तिकाओं का दोबारा मूल्यांकन किए जाने की बात सामने आई। विभाग के आदेश के मुताबिक प्रथम दृष्टया उपलब्ध रिकॉर्ड से यह पता चला कि कुछ चयनित अभ्यर्थियों का चयन पुनर्मूल्यांकन में अंक बढ़ने के बाद हुआ।
- इससे अभ्यर्थियों की मेरिट प्रभावित हुई। जांच में यह भी पाया गया कि चयन सूची जारी होने से पहले पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया में चयन समिति के अध्यक्ष, सदस्य और परीक्षा नियंत्रक भी शामिल रहे। विभाग ने माना कि इससे मूल्यांकन की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठते हैं।
उत्तरपुस्तिकाओं की संख्या का भी हिसाब नहीं मिला
- जांच समिति ने वर्ष 2021 और 2022 में हुई परीक्षाओं से जुड़ी उत्तरपुस्तिकाओं के रिकॉर्ड की भी जांच की। इसमें खरीदी गई कुल उत्तरपुस्तिकाओं की संख्या और इस्तेमाल व बची हुई उत्तरपुस्तिकाओं की संख्या में अंतर पाया गया।
- परीक्षा में कितनी उत्तरपुस्तिकाएं इस्तेमाल हुईं और कितनी बचीं, इसका रिकॉर्ड खरीद से जुड़े दस्तावेजों से मेल नहीं खा रहा था। इस अंतर के संबंध में भी विभाग को रिकॉर्ड के आधार पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
सिर्फ दोषी अभ्यर्थियों पर कार्रवाई संभव नहीं
- विभाग ने परीक्षा पूरी तरह रद्द करने से पहले यह विकल्प भी देखा कि सिर्फ उन अभ्यर्थियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, जिन्हें गड़बड़ी का फायदा मिला हो। लेकिन परीक्षा के मूल रिकॉर्ड ही अधूरे होने के कारण यह तय करना संभव नहीं था कि कौन प्रभावित हुआ और कौन नहीं।
- इसी तरह सभी उत्तरपुस्तिकाओं का दोबारा मूल्यांकन कर नई मेरिट सूची बनाने पर भी विचार किया गया। लेकिन विभाग ने माना कि इससे परीक्षा की मूल खामियां दूर नहीं होंगी। जब उपस्थिति का रिकॉर्ड, समेकित अंक सूची और परीक्षा से जुड़े अन्य जरूरी दस्तावेज ही उपलब्ध नहीं हैं, तो नई मेरिट तैयार करना भी भरोसेमंद नहीं होगा।
परीक्षा रद्द करने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं
- जांच में मिली खामियों को देखते हुए विभाग ने माना कि मामला केवल किसी एक अभ्यर्थी या परीक्षा के किसी एक चरण तक सीमित नहीं है। परीक्षा से पहले आरक्षण के हिसाब से पद तय करने से लेकर परीक्षा कराने, उत्तरपुस्तिकाओं की जांच, पुनर्मूल्यांकन और अंतिम चयन तक अलग-अलग स्तरों पर गड़बड़ियां मिलीं।
आदेश में कहा गया है कि इन सभी खामियों के कारण यह भरोसे के साथ तय करना संभव नहीं है कि घोषित परिणाम अभ्यर्थियों की वास्तविक और निष्पक्ष मेरिट को दर्शाता है। इसलिए पूरी परीक्षा और उसके आधार पर हुआ चयन निरस्त करना जरूरी माना गया। निरीक्षक बने कर्मचारियों को पुराने पद पर लौटना होगा
- राज्य कर विभाग ने 26 जून 2022 की सीमित प्रतियोगिता परीक्षा को शून्य घोषित करते हुए निरस्त कर दिया है। इसके आधार पर एक जुलाई 2022 को जारी चयन आदेश भी रद्द कर दिया गया है।
- परीक्षा के आधार पर वाणिज्यिक कर निरीक्षक पद पर नियुक्त सभी प्रभावित कर्मचारी अपने मूल पद पर वापस जाएंगे। उन्हें उसी मूल पद और मूल पदस्थापना पर पदस्थ माना जाएगा, जहां वे कर निरीक्षक बनने से पहले कार्यरत थे। विभाग का यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
अनुच्छेद 14 और 16 का भी हवाला
राज्य कर विभाग ने अपने आदेश में संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में दिए गए समानता और सरकारी नौकरी में समान अवसर के सिद्धांतों का भी उल्लेख किया है। विभाग के अनुसार परीक्षा की पूरी प्रक्रिया में मिली खामियों के कारण निष्पक्ष और पारदर्शी चयन की स्थिति कायम नहीं रह सकी। इसी आधार पर परीक्षा और चयन प्रक्रिया को निरस्त करने का निर्णय लिया गया।
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