
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। टेट की अनिवार्यता से प्रभावित प्रदेश के हजारों सेवारत शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। शिक्षक संगठनों के साथ बैठक में शिक्षा मंत्री ने विभागीय स्तर पर अलग टेट आयोजित करने पर सहमति जताई है। सेवारत शिक्षकों के लिए वर्ष में तीन बार विभागीय टेट कराने की दिशा में सरकार आगे बढ़ेगी। परीक्षा सामान्य टेट से अलग होगी और इसका आयोजन शिक्षा विभाग करेगा। इससे लंबे समय से टेट को लेकर आंदोलन कर रहे शिक्षकों को राहत की उम्मीद है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से शिक्षकों की योग्यता को लेकर निर्धारित प्रावधानों के बाद प्रदेश में सेवारत शिक्षक टेट को लेकर चिंतित हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के सामने अब सेवा सुरक्षा का सवाल खड़ा हो गया है। इसी मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री के साथ बैठक कर अपनी मांगें रखीं। बैठक में टेट के साथ शिक्षकों की पदोन्नति, सेवा गणना, पुरानी पेंशन और वेतन विसंगति सहित अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
बैठक में शिक्षक संगठनों ने सेवारत शिक्षकों के लिए परीक्षा के लिए शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को केंद्र बनाने का सुझाव दिया गया है। वहीं न्यूनतम उत्तीर्णांक 33 अंक रखने का प्रस्ताव भी रखा गया है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित योग्यता के दायरे में शिक्षकों को लाने के लिए विभागीय परीक्षा का विकल्प अपनाया जा सकता है। सरकार इस दिशा में आगे बढ़ेगी।
बैठक में पदोन्नति से जुड़े मामलों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। पूर्व में डीपीसी से रिक्त हुए पदों पर पुराने नियमों के आधार पर वेटिंग सूची से प्राचार्य पद पर पदोन्नति देने, ई-संवर्ग के व्याख्याताओं की पदोन्नति तथा प्रधान पाठक एमएस/पीएस के पदों पर वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति का रास्ता निकालने पर सहमति व्यक्त की गई। शिक्षकों की प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा की गणना कर पुरानी पेंशन का लाभ देने और शिक्षक एलबी संवर्ग को सभी देय लाभ दिलाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। शिक्षक संवर्ग में व्याप्त वेतन विसंगतियों को दूर कर केंद्रीय वेतनमान लागू करने की मांग भी रखी गई। इन मांगों पर शिक्षा मंत्री ने वित्त विभाग को प्रस्ताव भेजने का आश्वासन दिया।
बैठक के बाद शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रांतीय संयोजक संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे और केदार जैन ने सरकार के रुख को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि विभागीय टेट को लेकर सरकार ने स्पष्ट आश्वासन दिया है। अब संगठन को इसके जल्द क्रियान्वयन की उम्मीद है। शिक्षक नेताओं ने कहा कि सेवा सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाना चाहिए। मोर्चा ने बताया कि बैठक में उसकी पांच प्रमुख मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई। सकारात्मक बातचीत के बाद आंदोलन के आक्रामक रुख में फिलहाल शिथिलता बरतते हुए सांसदों, विधायकों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक प्रमुखों से मांगों के समर्थन में चर्चा जारी रखने का निर्णय लिया गया है।
छत्तीसगढ़ विद्यालय शिक्षक कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष संजय तिवारी ने बताया कि टेट परीक्षा को लेकर शिक्षा मंत्री को उत्तराखंड, मध्य प्रदेश समेत अन्य प्रदेशों की गतिविधियों अवगत कराया। वहीं शिक्षा मंत्री ने भी मध्य प्रदेश की तर्ज पर परीक्षा लेने का आश्वासन दिया।
किसे राहत: टेट की अनिवार्यता से प्रभावित सेवारत शिक्षकों को।
क्या फैसला: सेवारत शिक्षकों के लिए सामान्य टेट से अलग विभागीय टेट आयोजित करने पर सहमति।
परीक्षा कितनी बार: वर्ष में तीन बार विभागीय टेट कराने की दिशा में सरकार आगे बढ़ेगी।
आयोजक: परीक्षा का आयोजन शिक्षा विभाग करेगा।
परीक्षा केंद्र: शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाने का सुझाव।
न्यूनतम उत्तीर्णांक: 33 अंक रखने का प्रस्ताव।
मुख्य उद्देश्य: सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित योग्यता के दायरे में सेवारत शिक्षकों को लाना और उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करना।
पदोन्नति: डीपीसी से रिक्त पदों पर पुराने नियमों के आधार पर वेटिंग सूची से प्राचार्य पदोन्नति, ई-संवर्ग के व्याख्याताओं की पदोन्नति और प्रधान पाठक एमएस/पीएस के पदों पर वरिष्ठता आधारित पदोन्नति का रास्ता निकालने पर चर्चा।