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Devbhog Diamond Discovery: हीरा खदान पर जम रही धूल हटाने राज्य सरकार चाह रही हाई कोर्ट में Urgent Hearing

गरियाबंद के देवभोग हीरा खदानों में तीन दशक से लंबित कानूनी विवाद को सुलझाने के लिए राज्य सरकार ने सक्रियता बढ़ाई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्...और पढ़ें

By Sandeep TiwariEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Sat, 27 Jun 2026 08:55:14 AM (IST)Updated Date: Sat, 27 Jun 2026 09:40:19 AM (IST)
Devbhog Diamond Discovery: हीरा खदान पर जम रही धूल हटाने राज्य सरकार चाह रही हाई कोर्ट में Urgent Hearing
छत्तीसगढ़ में मिलते हीरे के भंडार की प्रतीकात्मक तस्वीर। अर्काइव

HighLights

  1. देवभोग हीरा खदान कानूनी विवाद सुलझाने की पहल तेज
  2. राज्य सरकार कोर्ट में दायर करेगी अर्जेंट हियरिंग की याचिका
  3. अवैध खनन रोककर राजस्व बढ़ाने की बड़ी तैयारी में राज्य

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। गरियाबंद स्थित देवभोग हीरा खदानों से बेशकीमती हीरों का व्यावसायिक दोहन करने के लिए राज्य सरकार ने लगभग 23 वर्षों से अदालती पचड़े में फंसी इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए कानूनी पहल शुरू कर दी है। इस मामले में हाईकोर्ट बिलासपुर में अर्जेंट हियरिंग के लिए याचिका दायर करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मैनपुर-देवभोग क्षेत्र में हीरों के विपुल भंडार की पुष्टि हुए करीब 36 साल बीत चुके हैं, लेकिन कानूनी विवादों ने इसे वर्षों से थाम रखा है।

भौमिकी एवं खनिकर्म विभाग के संचालक रजत बंसल ने बताया कि सरकार मामले को सुलझाने के लिए गंभीर है। हाई कोर्ट में लंबित इस प्रकरण की त्वरित सुनवाई (अर्जेंट हियरिंग) के लिए याचिका दायर की जा रही है, ताकि कानूनी बाधाएं दूर कर जल्द से जल्द उत्खनन गतिविधियां शुरू की जा सके।


1999 में दी थी 4600 वर्ग किलोमीटर के सर्वे की अनुमति

वर्ष 1999 में अविभाजित मध्यप्रदेश सरकार ने मुंबई की 'बी विजय कुमार एंड कंपनी को 4,600 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पूर्वेक्षण (सर्वे) की अनुमति दी थी। कंपनी ने हीरा कंपनी ''डिबियर्स'' के साथ मिलकर काम शुरू किया। हालांकि, वर्ष 2001 में अजीत जोगी सरकार ने अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए इसे निरस्त कर दिया। इसके बाद से ही कंपनी और राज्य सरकार के बीच माइंस ट्रिब्यूनल से लेकर हाई कोर्ट तक कानूनी जंग जारी है।

दुनिया भर की कंपनियां आकर्षित, अवैध खनन बना खतरा

पायलीखंड, बेहराडीह, कोदोमाली और जांगड़ा जैसे क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले किम्बरलाइट चट्टानों की मौजूदगी ने दुनिया भर की कंपनियों को आकर्षित किया था। साथ ही, लटापारा और सेंमुड़ा क्षेत्र में बेशकीमती रत्न अलेक्जेंडराइट' मिलने की भी पुष्टि हो चुकी है। लंबे समय से व्यावसायिक खनन शुरू न होने के कारण यह इलाका अवैध खननकर्ताओं और तस्करों के निशाने पर है। कभी माओवादी हिंसा प्रभावित रहा यह क्षेत्र अब शांत है, ऐसे में सरकार का मुख्य उद्देश्य वैध खनन शुरू कर न केवल राज्य को राजस्व दिलाना है, बल्कि अवैध गतिविधियों पर भी अंकुश लगाना है।

महासमुंद में जेम्स श्रेणी के हीरे मिले

हालिया भू-वैज्ञानिक सर्वे और महासमुंद में 200 टन बल्क सैंपल परीक्षण के दौरान जेम्स श्रेणी के पांच हीरों की प्राप्ति ने गरियाबंद-मैनपुर बेल्ट की महत्ता को और बढ़ा दिया है। ये निष्कर्ष पुष्टि करते हैं कि किम्बरलाइट पाइप्स में हीरों की उच्च संभावना है। गरियाबंद का पायलीखंड और बेहराडीह क्षेत्र भी विश्वस्तरीय संसाधनों से समृद्ध है। यदि व्यावसायिक खनन शुरू होता है, तो न केवल राज्य के खजाने में राजस्व की भारी वृद्धि होगी, बल्कि आधुनिक तकनीक और पारदर्शी नीलामी प्रक्रियाओं के माध्यम से यह परियोजना छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय हीरा मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान दिला सकती है।