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छत्तीसगढ़ में अल-नीनो संकट, 49 लाख हेक्टेयर मे होनी है बुआई अब तक महज दो प्रतिशत

छत्तीसगढ़ में अल-नीनो के खतरे को देखते हुए कृषि विभाग ने कमर कस ली है। मानसून की बेरुखी और कम बारिश के आंकड़ों के बीच सरकार ने वैकल्पिक फसलों पर ध्यान...और पढ़ें

By Abhishek RaiEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Wed, 24 Jun 2026 08:46:23 AM (IST)Updated Date: Wed, 24 Jun 2026 08:48:00 AM (IST)
छत्तीसगढ़ में अल-नीनो संकट, 49 लाख हेक्टेयर मे होनी है बुआई अब तक महज दो प्रतिशत
बुआई की तैयारियों में लगे कृषक परिवार की प्रतीकात्मक एआई तस्वीर।

HighLights

  1. खरीफ फसल बचाने कम अवधि वाली फसलों और बीमा पर जोर
  2. राज्य सरकार ने तेज किए अल-नीनो के प्रभाव से निपटने के उपाय
  3. सूखा प्रभावित 15 जिलों में सवा लाख क्विंटल से अधिक बीज पहुंचाए

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया.रायपुर। राज्य सरकार अल-नीनो के संभावित प्रभाव से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। मानसून कमजोर रहने पर किसानों के हितों की रक्षा के लिए उपाए किए गए हैं। सूखे की स्थिति से निपटने के लिए कम अवधि वाली फसलों, दलहन-तिलहन पर जोर, बीज सुरक्षा और फसल बीमा को प्राथमिकता देते हुए रणनीति तैयार की गई है। यह जानकारी केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने दी है।

केंद्रीय मंत्री ने सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अल-नीनो के मद्देनजर छत्तीसगढ़ की खेती-किसानी की जानकारी ली। नेताम ने बताया कि प्रदेश में 22 जून तक औसत वर्षा 30.8 मिमी दर्ज की गई है, जो विगत दस वर्षों के औसत से 58.3 मिमी कम है। खरीफ बोनी का लक्ष्य 48.69 लाख हेक्टेयर है, लेकिन अभी तक केवल दो प्रतिशत क्षेत्र में ही बोनी हो पाई है। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में किसानों को संभावित घाटे से बचाने के लिए उपाय शुरू कर दिए गए हैं।


कम अवधि वाली धान की फसलों के बीज किए सुरक्षित

कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने बताया कि कम अवधि वाली धान के किस्मों को बढ़ावा देने के साथ-साथ मक्का, कोदो, कुटकी, रागी, दलहनी और तिलहनी फसलों के गुणवत्तापूर्ण बीजों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। उच्चहन भूमि में अनाज के साथ दलहन-तिलहन फसलों को अंतरवर्तीय फसल के रूप में लगाने की सलाह दी जा रही है। धान की जगह दलहन-तिलहन फसलों की ओर किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। बीमा कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर फसल नुकसान की भरपाई के लिए बीमा प्लान को प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर अनुसंधान विभाग द्वारा अल-नीनो को ध्यान में रखते हुए आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की गई है।

प्रमाणित बीजों का होगा वितरण

सूखे प्रभावित 15 जिलों के लिए 1,22,095 क्विंटल बीज कराया गया उपलब्ध कृषि उत्पादन आयुक्त ने बताया कि बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए राज्य बीज निगम ने 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा है। सूखा प्रभावित 15 जिलों के लिए 1,22,095 क्विंटल बीज उपलब्ध कराया गया है, जिसमें से 48,449 क्विंटल किसानों तक पहुंच चुका है।

क्या है अल -नीनो का राज्य की कृषि पर प्रभाव

अल-नीनो एक वैश्विक मौसमी परिघटना है जो प्रशांत महासागर के गर्म होने से उत्पन्न होती है। इसका सीधा प्रभाव भारतीय मानसून पर पड़ता है, जिससे छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में वर्षा की अनिश्चितता बढ़ जाती है। मानसून में देरी या कम वर्षा होने से खरीफ की मुख्य फसल धान की बोनी प्रभावित होती है। मृदा में नमी की कमी से बीजों के अंकुरण पर असर पड़ता है और फसल चक्र बिगड़ जाता है। अल-नीनो केवल पैदावार ही नहीं घटाता, बल्कि भविष्य के लिए जलस्तर में गिरावट और चारे की कमी जैसी चुनौतियां भी पेश करता है।