

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ में खेल के टैलेंट को तराशने के लिए कई खेल एकेडमी बनाई गई है। हालांकि, अब इन्हें कई परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। कहीं एकेडमी खाली पड़ी है तो कहीं स्टाफ की कमी है। इस वजह से न केवल खिलाड़ियों की नियमित प्रभावित हो रही है, बल्कि खेल सुविधाओं के रखरखाव पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
राजधानी रायपुर में आवासीय और गैर-आवासीय तीरंदाजी, हॉकी, एथलेटिक्स और फुटबॉल की एकेडमी संचालित की जा रही हैं। लेकिन 54 एक्सेप्टेड पदों में से 47 पद खाली पड़े हैं। विशेष रूप से रायपुर की तीरंदाजी अकादमी में सभी 3 एक्सेप्टेड पद रिक्त हैं। वहीं, दूसरी तरफ बहतराई एक्सीलेंस सेंटर, बिलासपुर में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) द्वारा 'खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' की मान्यता मिली है। वहीं भी 24 में से 17 पद खाली हैं।
खेल अकादमी संचालन नियम 2014 के तहत आवासीय अकादमियों में खिलाड़ियों को आवास, भोजन, शिक्षा, चिकित्सा, खेल परिधान, बीमा और शैक्षणिक व्यय जैसी सुविधाएं निशुल्क मिलनी चाहिए। इसके साथ ही राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण मिलना तय है। लेकिन अमले की भारी कमी के कारण खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए सही मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है।
इसके अलावा, खेल मैदानों और उपकरणों की नियमित निगरानी और रखरखाव के लिए कर्मचारी न होने से संसाधनों का बेहतर उपयोग नहीं हो पा रहा है। जिलों में खेल अधिकारियों के पद लंबे समय से रिक्त होने से विभागीय गतिविधियां भी ठप पड़ी हैं।
विभाग के प्रशासनिक प्रतिवेदन (2025-26) के अनुसार एक्सेप्टेड और रिक्त पदों का आंकड़ा इस प्रकार है-
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