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राज्य में अभी एक रामसर साइट, तीन और पाइपलाइन में, 2030 तक 20 करने की तैयारी

छत्तीसगढ़ की पहली रामसर साइट कोपरा जलाशय के बाद अब छिंदारी, पैलीमेटा और नीमगांव जलाशयों को रामसर साइट के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी ग...और पढ़ें

By Vakesh SahuEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Sat, 22 Aug 2026 03:08:29 PM (IST)Updated Date: Sat, 22 Aug 2026 03:12:38 PM (IST)
राज्य में अभी एक रामसर साइट, तीन और पाइपलाइन में, 2030 तक 20 करने की तैयारी
कोपरा जलाशय के किनारे बैठे पक्षी प्रेमी। अर्काइव

HighLights

  1. कोपरा जलाशय के बाद तीन अन्य स्थल तैयार
  2. वन विभाग ने पांच सौ वेटलैंड मित्र बनाए
  3. वर्ष 2030 तक 20 वैटलेंड का लक्ष्य निर्धारित

वाकेश साहू, नईदुनिया, रायपुर। छत्तीसगढ़ में पर्यावरण और जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। प्रदेश की पहली रामसर साइट के रूप में कोपरा जलाशय, बिलासपुर को शामिल किए जाने के बाद, अब तीन अन्य महत्वपूर्ण जलाशयों को भी रामसर साइट के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया तेजी से शुरू कर दी गई है।

इनमें खैरागढ़ जिले के छिंदारी और पैलीमेटा जलाशय तथा जशपुर जिले का नीमगांव जलाशय शामिल हैं। निर्धारित मानकों को पूरा करने के बाद ये जलाशय जल्द ही इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सूची में स्थान पा सकते हैं।

छिंदारी और पैलीमेटा जलाशयों की प्राकृतिक खूबसूरती

खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में पिपरिया नदी पर स्थित छिंदारी जलाशय को 'रानी रश्मि देवी जलाशय' के नाम से भी जाना जाता है। यह प्रकृति प्रेमियों के लिए एक बेहद आकर्षक पर्यटन स्थल है, जो हरियाली, पहाड़ियों और जंगलों से घिरा हुआ है। बारिश के मौसम में इस बांध का ओवरफ्लो पानी एक सुंदर झरने का रूप ले लेता है।


इको टुरिज्म केंद्र भी विकसित किया

वन विभाग ने यहां 'छिंदारी के परिंदे' नाम से इको-टूरिज्म केंद्र भी विकसित किया है। वहीं, इसी जिले के छुईखदान ब्लॉक में स्थित पैलीमेटा जलाशय (जिसे सुरही जलाशय भी कहते हैं) एक प्रमुख मध्यम सिंचाई बांध है, जिसे सरकार ने पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की है। यह समृद्ध जैव विविधता और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है।

नीमगांव जलाशय और प्रवासी पक्षियों का डेरा

जशपुर जिले में स्थित नीमगांव जलाशय अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सर्दियों के मौसम में आने वाले विदेशी व साइबेरियन प्रवासी पक्षियों (जैसे बार-हेडेड गूस और रुडी शेडकाक) के कारण बर्ड वाचिंग का प्रमुख केंद्र है। ठंड के मौसम में यहां हिमालय, साइबेरिया और यूरोप से हजारों की संख्या में मेहमान पक्षी पहुंचते हैं। जिला मुख्यालय से लगभग दस किलोमीटर दूर स्थित यह शांत स्थल जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए लगातार चर्चा में रहता है।

संरक्षण की दिशा में तैयार किए गए लक्ष्य

आर्द्रभूमियों के संरक्षण और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग ने प्रदेशभर में 500 से अधिक 'वेटलैंड मित्र' तैयार किए हैं। इसके अलावा, 2.25 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाली 11,098 आर्द्रभूमियों का ग्राउंड-ट्रुथिंग और बाउंड्री डिमार्केशन भी कराया गया है।

चार सालों में 20 करने की योजना

छत्तीसगढ़ राज्य वेटलैंड प्राधिकरण ने वर्ष 2030 तक प्रदेश की 20 आर्द्रभूमियों को रामसर स्थल के रूप में नामित कराने का एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है।

जारी है प्रक्रिया

प्रदेश की पहली रामसर साइट कोपरा जलाशय के बाद अब छिंदारी, पैलीमेटा और नीमगांव जलाशयों को रामसर सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वन विभाग ने 500 से अधिक वेटलैंड मित्र तैयार किए हैं। 11,098 आर्द्रभूमियों का सीमांकन हुआ है। वर्ष 2030 तक 20 आर्द्रभूमियों को रामसर स्थल बनाने का लक्ष्य है।

- अरूण कुमार पांडेय, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख

क्या है रामसर साइट

रामसर साइट अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि (वेटलैंड) हैं, जिन्हें जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के लिए मान्यता मिलती है। इनका मुख्य उद्देश्य झीलों, दलदली और जलीय क्षेत्रों का संरक्षण करना है। रामसर कन्वेंशन 2 फरवरी 1971 को ईरान के रामसर में हुआ था। इनसे प्राकृतिक जलीय पारिस्थितिकी तंत्र, पर्यावरण और जैव विविधता को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।