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छत्तीसगढ़ में 85 हजार शिक्षकों पर मंडराया संकट, सेवारत शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य, DPI बना रहा नया प्रस्ताव

प्रदेश में सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता का मामला एक बार फिर गरमा गया है। लोक शिक्षण संचालनालय ने टीईटी को लेकर नया प्रस...और पढ़ें

By Vakesh SahuEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 09 Aug 2026 07:59:05 PM (IST)Updated Date: Sun, 09 Aug 2026 07:59:05 PM (IST)
छत्तीसगढ़ में 85 हजार शिक्षकों पर मंडराया संकट, सेवारत शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य, DPI बना रहा नया प्रस्ताव
अलग से विभागीय टीईटी की मांग तेज।

HighLights

  1. 1.90 लाख शिक्षकों से जुड़ा मामला
  2. डीपीआई ने शिक्षक संघों से मांगे सुझाव
  3. अलग से विभागीय टीईटी की मांग तेज

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। प्रदेश में सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता का मामला एक बार फिर गरमा गया है। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने टीईटी को लेकर नया प्रस्ताव पर काम करना शुरू कर दिया है। क्योंकि विभाग ने शिक्षक संघों से सुझाव पहले से ही मांगे है, ताकि सेवारत शिक्षकों के लिए परीक्षा से जुड़े नियमों को व्यावहारिक बनाया जा सके। सुप्रीम कोर्ट द्वारा टीईटी उत्तीर्ण करने की समय सीमा 31 अगस्त 2028 तक बढ़ाए जाने के बाद विभाग फिर से तैयारी की जा रही है।

35 हजार शिक्षक ही अब तक टीईटी उत्तीर्ण

प्रदेश में करीब 1.90 लाख शासकीय शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें से लगभग 35 हजार शिक्षक ही अब तक टीईटी उत्तीर्ण कर पाए हैं। करीब 85 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिनके सामने टीईटी उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता बनी हुई है। वहीं लगभग 70 हजार शिक्षकों की सेवा अवधि पांच वर्ष से कम शेष बताई जा रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में शिक्षकों के सामने निर्धारित अवधि में परीक्षा उत्तीर्ण करने की चुनौती है। इसका असर उनकी सेवा के साथ-साथ पदोन्नति की संभावनाओं पर भी पड़ सकता है।


पुराने शिक्षकों के लिए बदली परिस्थितियां

टीईटी की अनिवार्यता का सबसे अधिक असर उन शिक्षकों पर पड़ रहा है, जिनकी नियुक्ति 23 अगस्त 2010 से पहले हुई थी। उस समय भर्ती नियमों में टीईटी अनिवार्य नहीं था। इसी वजह से लंबे समय से सेवा दे रहे कई शिक्षकों ने उस समय टीईटी नहीं दी। अब बदले नियमों के कारण उन्हें सेवारत रहते हुए परीक्षा उत्तीर्ण करने की तैयारी करनी पड़ रही है।

शिक्षक संगठनों का तर्क है कि 25 से 30 वर्ष तक सेवा दे चुके शिक्षकों को अचानक परीक्षा की अनिवार्यता के दायरे में लाना व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा कर रहा है। उम्र, लंबे समय से परीक्षा से दूर रहने और पाठ्यक्रम में बदलाव जैसे कारणों से ऐसे शिक्षकों के लिए टीईटी की तैयारी चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।

विभागीय टीईटी की मांग तेज

शालेय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे के अनुसार, 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी भर्ती नियमों का हिस्सा नहीं था। ऐसे में लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को वर्तमान व्यवस्था के अनुरूप परीक्षा पास करने का अवसर देने के लिए सरकार को विशेष व्यवस्था करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षक संगठनों ने अब सेवारत शिक्षकों के लिए अलग से विभागीय टीईटी आयोजित करने की मांग तेज कर दी है। संगठनों का कहना है कि यदि परीक्षा की अनिवार्यता लागू है तो सरकार को शिक्षकों को तैयारी के लिए पर्याप्त अवसर और संसाधन भी उपलब्ध कराने चाहिए।

मध्य प्रदेश की तर्ज पर आयोजित करने की मांग

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए सेवारत शिक्षकों के लिए विभागीय टीईटी आयोजित करने की मांग की है। उनका कहना है कि जब अन्य राज्यों में सेवारत शिक्षकों के लिए ऐसी परीक्षा आयोजित की जा सकती है तो छत्तीसगढ़ में भी इसका रास्ता निकाला जा सकता है।

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प्रशिक्षण और अध्ययन सामग्री की मांग

शिक्षक संगठनों ने विभाग से केवल परीक्षा आयोजित करने के बजाय तैयारी के लिए विशेष व्यवस्था करने की मांग की है। इसके तहत प्रभावित शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने, पाठ्यक्रम आधारित अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने और परीक्षा की तैयारी के लिए पर्याप्त समय देने की मांग की गई है।