• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • रक्षाबंधन
  • सावन माह
  • मानसून
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • रायपुर

खेल-खेल में गणित सिखाया, गांव की पाठशाला से राष्ट्रपति भवन तक पहुंची सुनीता यादव की नवाचार यात्रा

छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला ब्लॉक स्थित शासकीय प्राथमिक शाला खिचरी की शिक्षिका सुनीता यादव को उनके उत्कृष्ट और नवाचारी शिक्षण कार्यो...और पढ़ें

By Vakesh SahuEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Sat, 22 Aug 2026 12:04:20 PM (IST)Updated Date: Sat, 22 Aug 2026 12:22:56 PM (IST)
खेल-खेल में गणित सिखाया, गांव की पाठशाला से राष्ट्रपति भवन तक पहुंची सुनीता यादव की नवाचार यात्रा
गांव की पाठशाला से राष्ट्रपति भवन तक पहुंची नवाचार की यात्रा।

HighLights

  1. शासकीय प्राथमिक शाला खिचरी की शिक्षिका सुनीता यादव
  2. बाजार और लघु फिल्मों से बच्चों को दी प्रायोगिक शिक्षा
  3. राष्ट्रपति भवन तक पहुंची अनोखी शिक्षण नवाचार यात्रा

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला ब्लॉक स्थित शासकीय प्राथमिक शाला खिचरी की शिक्षिका सुनीता यादव ने कड़ी मेहनत और अनोखे शिक्षण प्रयोगों से देश में राज्य का मान बढ़ाया है। उनकी यह असाधारण नवाचार यात्रा गांव की एक साधारण पाठशाला से शुरू होकर देश के सर्वोच्च राष्ट्रपति भवन तक जा पहुंची है।

उन्हें उनके विशिष्ट शैक्षणिक और सामाजिक योगदान के लिए देश के प्रतिष्ठित 'राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार' से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने साबित कर दिया है कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो सीमित संसाधनों के बीच भी शिक्षा के क्षेत्र में चमत्कारिक बदलाव लाए जा सकते हैं।


खेल-खेल में गणित और व्यावहारिक ज्ञान

सुनीता यादव ने पारंपरिक और रट्टा मार शिक्षण पद्धतियों को दरकिनार करते हुए बच्चों के अनुभव आधारित और प्रायोगिक शिक्षा पर जोर दिया। उनकी कक्षा में बच्चे सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि विद्यालय परिसर में ही दुकानदार और ग्राहक बनकर मुद्रा, लाभ-हानि, जोड़-घटाव और गणितीय संक्रियाओं को व्यावहारिक रूप से सीखते हैं।

डिजिटल तकनीक का समन्वय

आर्थिक रूप से कमजोर और मजदूर परिवारों के बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उन्होंने साहित्य, कला और डिजिटल तकनीकों का अद्भुत समन्वय किया है। वे बच्चों को पढ़ाने के लिए लघु फिल्में तैयार करती हैं, जिनमें छात्र और शिक्षिका खुद अभिनय करते हैं। इसके अलावा पॉडकास्ट, ऑडियो बुक और स्मार्ट क्लास जैसी तकनीकों ने ग्रामीण बच्चों की दुनिया ही बदल दी है।

सुविधाओं का अभाव दिखा तो जुटाया सामुदायिक सहयोग

जब उन्होंने इस स्कूल की कमान संभाली थी, तब वहां बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव था। शौचालय, रैंप और चारदीवारी जैसी मूलभूत आवश्यकताएं भी पूरी नहीं थीं। सुनीता ने हार मानने के बजाय स्थानीय जनसमुदाय को साथ लिया और जनसहयोग से स्कूल की सूरत ही बदल डाली। पौधारोपण, सुंदरीकरण, बच्चों के लिए जूते-कपड़े, स्टेशनरी और लैपटॉप की व्यवस्था कर उन्होंने सीखने का एक बेहतरीन प्रिंट-रिच वातावरण तैयार किया।

कोरोना संकट में भी नहीं बाधित होने दी शिक्षा

कोरोना संकट के दौरान भी बच्चों की शिक्षा बाधित नहीं होने दी। उनके इन अनूठे प्रयासों के कारण स्कूल को 'प्लेटिनम ग्रेड' मिला और उनके मार्गदर्शन में छात्रों ने राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर कई उपलब्धियां हासिल की हैं। उनका यह सफर हर शिक्षक के लिए एक प्रेरणास्रोत है।

शोध से भी जुड़ा शिक्षण

सुनीता यादव का काम केवल कक्षा तक सीमित नहीं है। वे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में सारंगढ़-बिलाईगढ़ के प्राथमिक विद्यालयों में आए बदलाव पर शोध पत्र तैयार कर चुकी हैं। जिले की पहली महिला शिक्षिका के रूप में इस विषय पर शोध कार्य करना उनके शैक्षणिक सरोकार को दर्शाता है।

सम्मान भी मिले, सफर जारी

सुनीता यादव को मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण और शिक्षादूत सम्मान मिल चुका है। वर्ष 2023 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए उनका नामांकन हुआ था। वर्ष 2025 में शिक्षक दिवस के अवसर पर राजभवन रायपुर में राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के हाथों उन्हें डा. मुकुटधर पांडेय स्मृति पुरस्कार से प्रशस्ति पत्र, शाल और चेक देकर सम्मानित किया गया।