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जांच एजेंसी के मुताबिक, दुबई में अटैच की गई संपत्तियां किसी आम निवेश का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि इनमें दुनिया की सबसे महंगी और लग्जरी रियल एस्टेट शामिल है। दुबई हिल्स एस्टेट में आलीशान विला और अपार्टमेंट, हिल्स व्यू, फेयरवे रेजिडेंसी और सिडरा जैसी प्रीमियम सोसाइटी, बिजनेस बे के हाई-एंड फ्लैट्स, एसएलएस होटल एंड रेजिडेंस के लक्जरी अपार्टमेंट के साथ बुर्ज खलीफा में मौजूद प्रॉपर्टी शामिल हैं। रायपुर स्थित ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत यह अंतरिम आदेश जारी किया है।
प्रमोटरों की जब्त की गई संपत्तियों में न केवल दुबई की गगनचुंबी इमारतें और महंगे विला शामिल हैं, बल्कि भारत के विभिन्न हिस्सों में स्थित संपत्तियां भी इस जब्ती का हिस्सा हैं। जांच में सामने आया है कि सट्टेबाजी के काले कारोबार से कमाए गए पैसों को सफेद करने के लिए इन विदेशी अचल संपत्तियों में निवेश किया गया था। महादेव एप के मुख्य सूत्रधार मूलतः भिलाई निवासी सौरभ चंद्रकर और रवि उप्पल इस समय भारतीय एजेंसियों की रडार पर हैं।
जहाँ चंद्राकर के संयुक्त अरब अमीरात में होने की संभावना है, वहीं रवि उप्पल के वानुअतु भाग जाने की सूचना है। भारत सरकार लगातार इन दोनों आरोपितों के प्रत्यर्पण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास कर रही है ताकि उन्हें भारतीय कानून के समक्ष लाया जा सके। ईडी ने अपनी जांच में यह दावा किया है कि इस अवैध सट्टेबाजी साम्राज्य को चलाने के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में राज्य के कई राजनेताओं और अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त था। महादेव एप के जरिए न केवल आम जनता को ठगा गया, बल्कि करोड़ों रुपये के हवाला लेनदेन और अवैध वित्तीय संचालन को अंजाम भी दिया गया।
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