गजब खराब व्यवस्था है! छत्तीसगढ़ में EWS प्रमाणपत्र के लिए लंबा इंतजार, शराब परमिट सिर्फ 5 दिन में तैयार, नई समय-सीमा पर सवाल
छत्तीसगढ़ सरकार ने लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत कई सेवाओं की नई समय-सीमा तय की है।
Publish Date: Sun, 31 May 2026 08:23:34 AM (IST)Updated Date: Sun, 31 May 2026 08:23:34 AM (IST)
लोक सेवा गारंटी अधिनियम में नई समय-सीमा पर जनता ने उठाए सवाल (AI Generated Image)HighLights
- शराब परिवहन परमिट पांच दिन में जारी
- कई सेवाएं गारंटी अधिनियम में शामिल
- देरी होने पर शिकायत का अधिकार
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत विभिन्न विभागीय सेवाओं के लिए नई समय-सीमा निर्धारित की है। इस फैसले का उद्देश्य नागरिकों को समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराना और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना बताया गया है। नई व्यवस्था में शराब परिवहन से जुड़े परमिट पांच कार्य दिवस में जारी करने और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) प्रमाणपत्र के लिए 15 कार्य दिवस निर्धारित किए जाने को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।
आबकारी विभाग की सेवाओं के लिए तय समय
सरकार ने वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग की कई सेवाओं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के दायरे में शामिल किया है। इसके तहत शराब के थोक परिवहन तथा वेयरहाउस से दुकानों तक आपूर्ति के लिए आवश्यक एफएल-16 (क) और सीएस-6 (ख) परिवहन अनुज्ञा पत्र पांच कार्य दिवस के भीतर जारी किए जाएंगे।
इन सेवाओं के लिए संबंधित जिले के प्रभारी आबकारी अधिकारी को सक्षम और उत्तरदायी अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो निर्धारित समय-सीमा में प्रक्रिया पूरी करेंगे।
राजस्व विभाग की सेवाओं के लिए अलग समय-सीमा
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की कई महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए भी समय-सीमा तय की गई है। ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र जारी करने, प्राकृतिक आपदा से हुई क्षति पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने तथा सड़क दुर्घटना में मृत्यु या गंभीर रूप से घायल होने की स्थिति में सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया के लिए 15 कार्य दिवस निर्धारित किए गए हैं।
इसके अलावा नया साहूकारी लाइसेंस जारी करने और उसके नवीनीकरण के लिए सात कार्य दिवस तय किए गए हैं। केंद्रीय जाति प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया भी सात कार्य दिवस में पूरी की जाएगी।
देरी होने पर शिकायत की सुविधा
सरकार ने प्रत्येक सेवा के लिए लोक प्राधिकारी, सक्षम प्राधिकारी और अपीलीय प्राधिकारी का निर्धारण भी कर दिया है। यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर सेवा उपलब्ध नहीं कराई जाती है तो संबंधित नागरिक अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
आबकारी विभाग से जुड़े मामलों में संबंधित जिले के कलेक्टर को अपीलीय प्राधिकारी बनाया गया है, जो शिकायतों की सुनवाई करेंगे। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी।