
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना के तहत नए पंजीयन की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है। इसके चलते प्रदेश की करीब 10 लाख पात्र महिलाएं योजना का लाभ मिलने का इंतजार कर रही हैं। इनमें बड़ी संख्या नवविवाहित महिलाओं की है, जबकि सबसे अधिक लगभग दो लाख महिलाएं बस्तर संभाग की बताई जा रही हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से इसके लिए प्रस्ताव बनाकर वित्त विभाग के पास भेजा गया है, जो अटका हुआ है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के बीच पोर्टल दोबारा शुरू करने को लेकर चर्चा हो चुकी है। मुख्यमंत्री की सहमति मिलने के बावजूद तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति के अभाव में पंजीयन पोर्टल अब तक नहीं खुल पाया है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सभी जिलों में योजना से वंचित महिलाओं का संभावित आंकड़ा तैयार कर लिया गया है और विभाग अपनी ओर से पूरी तरह तैयार है। अब अंतिम निर्णय वित्त विभाग की मंजूरी पर निर्भर है।
राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के संकल्प बजट में महतारी वंदन योजना के लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रविधान किया है। वर्तमान में योजना के तहत 68 लाख से अधिक महिलाओं को हर माह एक-एक हजार रुपये की सहायता राशि दी जा रही है।
अब तक 28 किश्तों के माध्यम से 18,165.19 करोड़ रुपये सीधे हितग्राही महिलाओं के बैंक खातों में जारी किया जा चुका है। अब नई पात्र महिलाओं को पंजीयन पोर्टल खुलने का इंतजार है। महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए भी प्रेरित कर रही है। परिवार और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने में सहायक सिद्ध हो रही है।
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राज्य सरकार की ओर से एक मई से दस जून तक पूरे प्रदेश में सुशासन तिहार चलाया गया था। मुख्यमंत्री ने इस दौरान कई जिलों में जाकर लोगों से संवाद किया था। बागबाहरा विकासखंड के ग्राम कमरौद में मुख्यमंत्री से एक महिला ने कहा कि उसे महतारी वंदन का लाभ नहीं मिल रहा है।
उस दौरान मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि जल्द ही लाभ मिलेगा। विगत वर्ष भी सुशासन तिहार में विभाग को दो लाख से ज्यादा आवेदन मिले थे, जो धूल खा रहे हैं।