

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया.रायपुर। प्रदेश में कामकाजी महिलाओं के छोटे बच्चों को सुरक्षित वातावरण में देखभाल, पोषण और संरक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष-2024 से संचालित पालना योजना की प्रगति अपेक्षित गति से नहीं हो पा रही है।
राज्य में छह माह से छह वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए 250 पालना केंद्र शुरू करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक केवल 186 केंद्र ही संचालित हो सके हैं। 64 केंद्रों का लक्ष्य अब भी पूरा नहीं हुआ है।
बेमेतरा और सक्ती जिले में स्थिति सबसे चिंताजनक हैं, क्याेंकि यहां पर अब तक एक भी पालना केंद्र स्थापित नहीं हो सका है। इससे इन जिलों में कामकाजी महिलाओं को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। योजना के तहत पालना केंद्रों के संचालन के लिए केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार पालना कार्यकर्ता और सहायिका की पदस्थापना, उपयुक्त भवन व स्थान का चिन्हांकन और आवश्यक सामग्री की व्यवस्था की जानी है। साथ ही सुरक्षित माहौल, सोने के लिए पालने व बिस्तर, पौष्टिक आहार, शुरुआती बाल्यावस्था की शिक्षा, खेलकूद की सामग्री और प्राथमिक चिकित्सा सहित प्रशिक्षित केयरटेकर की सुविधाएं होना अनिवार्य है।
इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से राज्य को आवश्यक राशि भी उपलब्ध कराई जा चुकी है। केंद्र सरकार ने तीन वर्षों में 23.44 करोड़ से अधिक की राशि मिल चुकी है। पालना केंद्र बनाने और सामग्रियों में 4.29 करोड़ खर्च किया गया है।
वर्ष- राशि
2023-24 - 1,97,478,000
2024-25 - शून्य
2025-26 - 2,16,90,000
2026-27 - 1,52,56,200
(15 जून 2026 तक की स्थिति)
बस्तर-चार, बलौदाबाजार-आठ, बालोद-छह, बिलासपुर-19, बलरामपुर- दो, बीजापुर-एक, दंतेवाड़ा- छह, धमतरी- सात, दुर्ग- 16, गरियाबंद- आठ, जशपुर- एक, जांजगीर- पांच, कांकेर- दो, कोरबा- 16, कोंडागांव- दो, कवर्धा- तीन, कोरिया- दो, मुंगेली- दो, महासमुुंद - छह, नारायणपुर- एक, राजनांदगांव- 10, रायपुर- 33, रायगढ़- 11, सरगुजा- दो, सूरजपुर- चार, सुकमा- एक, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर- दो, मोहला मानपुर- अंबागढ़ चौकी- एक, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई- एक, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही- दो, सारंगढ़-बिलाईगढ़- दो।
प्रदेश के सभी जिलों में पालना केंद्र खेाला जाना प्रस्तावित है। चरणबद्ध तरीके से सभी जिलों में पालना केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
- रेणुका श्रीवास्तव, संचालक, महिला एवं बाल विकास विभाग