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नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। जमीन का सीमांकन कराना है तो इंतजार, जाति-निवास प्रमाणपत्र बनवाना है तो इंतजार और खेत में फसल को हुए नुकसान का आकलन कराना है तो भी इंतजार। प्रदेशभर में पटवारियों की हड़ताल से आम लोगों के ऐसे जरूरी काम अटक गए हैं, जिनके लिए राजस्व अमले की रिपोर्ट जरूरी होती है।
13 अक्टूबर से पटवारियों के काम बंद करने के कारण जमीन की नाप-जोख, प्रमाणपत्रों के लिए प्रतिवेदन, राजस्व प्रकरणों की सुनवाई और फसलों के सर्वे पर असर पड़ा है। सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है, जिन्हें समय पर दस्तावेज नहीं मिलने से आगे की प्रक्रिया पूरी करने में दिक्कत आ रही है।
सीमांकन और जमीन संबंधी मामलों में इंतजार
जमीन की नाप-जोख और सीमांकन के पुराने मामले लंबित हैं। जमीन की सीमा को लेकर विवाद हो या राजस्व रिकॉर्ड से जुड़ा कोई काम, पटवारी की रिपोर्ट और स्थल निरीक्षण कई मामलों में जरूरी होते हैं। हड़ताल के कारण ऐसे प्रकरण आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
तहसील कार्यालयों और राजस्व न्यायालयों में भी उन मामलों के निराकरण पर असर पड़ा है, जिनमें पटवारी प्रतिवेदन के आधार पर सुनवाई या आदेश जारी होना है। इससे पहले से लंबित मामलों के निपटारे में और देरी की आशंका है।
प्रमाणपत्रों के लिए भटक रहे आवेदक
जाति, निवास और आय प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया में भी पटवारी प्रतिवेदन की जरूरत पड़ती है। काम रुकने से छात्रों, नौकरी के लिए दस्तावेज तैयार करने वालों और अन्य आवेदकों की परेशानी बढ़ गई है।
जिन लोगों को निर्धारित समय में प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना है, उनके सामने अतिरिक्त मुश्किल खड़ी हो सकती है। आवेदन जमा होने के बाद भी संबंधित प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने से लोगों को यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि उनका काम कब पूरा होगा।
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धान खरीदी से पहले गिरदावरी का शेष काम अटका
धान खरीदी की तैयारियों के बीच खेतों में बोई गई फसल और रकबे का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रदेश में गिरदावरी का लगभग 90 से 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, लेकिन शेष काम हड़ताल के कारण प्रभावित है।
इसी तरह नए पीवी ऐप के माध्यम से डिजिटल फसल सर्वे और सत्यापन का 40 से 50 प्रतिशत काम पूरा होने की जानकारी है। बाकी काम पूरा करने की समयसीमा स्पष्ट नहीं है। यदि हड़ताल जारी रहती है, तो संबंधित विभागों के सामने अधूरे सर्वे और सत्यापन को समय पर पूरा कराने की चुनौती बढ़ सकती है।
बारिश-बाढ़ से फसल नुकसान का आकलन भी प्रभावित
भारी बारिश और बाढ़ से प्रभावित किसानों के नुकसान का सर्वे भी पूरी तरह नहीं हो पाया है। कुछ स्थानों पर नुकसान का आकलन लंबित होने की जानकारी है। सर्वे और संबंधित प्रतिवेदन में देरी होने पर प्रभावित किसानों के मामलों को आगे बढ़ाने में परेशानी हो सकती है। ऐसे किसानों के लिए नुकसान का आकलन समय पर होना जरूरी है, ताकि सहायता संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
ऐप की तकनीकी दिक्कतों पर पटवारी अड़े
राजस्व पटवारी संघ छत्तीसगढ़ के आह्वान पर प्रदेशभर के पटवारी 13 अक्टूबर से हड़ताल पर हैं। नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर उनका प्रदर्शन जारी है। संघ के प्रांताध्यक्ष भागवत कश्यप के अनुसार, नए पीवी ऐप से डिजिटल फसल सर्वे और सत्यापन में व्यावहारिक तथा तकनीकी समस्याएं आ रही हैं।
पटवारी अपनी मांगें पूरी होने तक हड़ताल समाप्त करने को तैयार नहीं हैं। दूसरी ओर, शासन स्तर पर अब तक ऐसा ठोस समाधान सामने नहीं आया है, जिससे काम दोबारा शुरू होने का रास्ता साफ हो सके।