

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। राजधानी रायपुर में हाल ही में 30 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों की धरपकड़ ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। शहर की जनसांख्यिकी को देखते हुए पुलिस ने अब 'किराएदार सत्यापन' अभियान को युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है। विडंबना यह है कि रायपुर में किराएदारों की संख्या दो लाख के पार है, जबकि पुलिस रिकॉर्ड में बमुश्किल 4,300 नाम दर्ज हैं। इधर, पुलिस ने बीते 24 घंटों में दो बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, सुरक्षा की पहली कड़ी मकान मालिक हैं। कई मकान मालिक महज आय के लालच में बिना किसी पहचान-पत्र या स्थायी पते की जांच किए लोगों को कमरा दे देते हैं। पूर्व में टिकरापारा, संतोषी नगर और संजय नगर जैसे क्षेत्रों में पकड़े गए संदिग्धों ने फर्जी दस्तावेजों के दम पर स्थानीय पहचान बना ली थी, जो मकान मालिकों की लापरवाही का नतीजा थी।
रायपुर में सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता हाथ लगी है, जहां टिकरापारा थाना क्षेत्र से दो संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों—शेख रेहान और उसके साथी जमाल करीम—को गिरफ्तार किया गया है। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, शेख रेहान साल 2000 में अपने माता-पिता के साथ रायपुर पहुंचा था और संजय नगर इलाके में मोटर मैकेनिक का काम कर रहा था। वहीं, उसका साथी जमाल करीम 15 साल पहले रायपुर आया था और आरडीए कॉलोनी में रहकर कबाड़ी का काम कर रहा था।
जांच में यह बात सामने आई है कि दोनों ने भारत में रहकर फर्जी तरीके से दस्तावेज तैयार करवाए थे। रेहान के पास से भारतीय आधार कार्ड और पासपोर्ट बरामद हुआ है, जिसके जरिए वह 4-5 बार बांग्लादेश की यात्रा भी कर चुका है। हालांकि, जमाल के पास से कोई भारतीय पासपोर्ट नहीं मिला है, लेकिन उसने भी फर्जी आधार कार्ड बनवा रखा था। एटीएस, पुलिस और कई केंद्रीय एजेंसियां दोनों से गहन पूछताछ कर रही हैं। पूछताछ के बाद दोनों को डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा और बीएसएफ के जरिए वापस बांग्लादेश डिपोर्ट किया जाएगा।
ऑनलाइन सुविधा: यदि आप मकान मालिक हैं, तो अब आपको थाने के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। स्थानीय पुलिस की वेबसाइट या पोर्टल पर जाकर किराएदार का विवरण (नाम, स्थायी पता, पहचान पत्र) अपलोड करें।
दस्तावेज: किराएदार का आधार, पैन या पासपोर्ट जैसे पहचान पत्र लेना अनिवार्य है।
सतर्कता: औद्योगिक क्षेत्रों, निर्माण स्थलों और मजदूर बस्तियों पर पुलिस की विशेष नजर है। ठेकेदारों को हिदायत दी गई है कि वे अपने श्रमिकों का पूरा विवरण पुलिस को उपलब्ध कराएं।
पुलिस विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई मकान मालिक सत्यापन में सहयोग नहीं करता है या जानकारी छिपाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 100 से अधिक पुलिसकर्मियों की टीम शहर की कॉलोनियों और औद्योगिक इलाकों में सघन चेकिंग कर रही है। एक जागरूक नागरिक होने के नाते, आपकी छोटी सी सावधानी शहर को सुरक्षित रखने में बड़ा योगदान दे सकती है। किराएदार की पहचान सुनिश्चित करना अब केवल नियम नहीं, बल्कि आपकी सुरक्षा की जरूरत है।
बाहरी राज्यों से आने वाले श्रमिकों की संख्या अधिक होने के कारण निर्माण स्थलों और मजदूर बस्तियों को भी सत्यापन अभियान में शामिल किया गया है। निर्माण कंपनियों और ठेकेदारों से उनके यहां काम करने वाले श्रमिकों का पूरा रिकार्ड मांगा जा रहा है। पुलिस नाम, पता और पहचान संबंधी दस्तावेजों की जांच कर रही है। करीब 100 से अधिक पुलिसकर्मी शहर के अलग-अलग हिस्सों में सत्यापन अभियान में लगाए गए हैं।
रायपुर में पहले भी फर्जी दस्तावेजों के सहारे रहने वाले संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों के मामले सामने आ चुके हैं। फरवरी 2025 में तीन बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा गया था। जून 2025 में टिकरापारा क्षेत्र में एक बांग्लादेशी दंपती के खिलाफ कार्रवाई की गई। इसी महीने छत्तीसगढ़ नगर, संतोषी नगर और संजय नगर क्षेत्र से भी 10 संदिग्ध नागरिकों को हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने इनसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट सहित दूसरे दस्तावेज जब्त किए थे।