
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का महापर्व रक्षा बंधन इस वर्ष 28 अगस्त शुक्रवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। इस बार का रक्षा बंधन ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास है क्योंकि सात दशकों बाद ऐसा शुभ संयोग बन रहा है।
ज्योतिषाचार्य डा.दत्तात्रेय होस्केरे के अनुसार, 28 अगस्त को पूर्णिमा तिथि सुबह 9:47 बजे तक है, इसलिए सुबह के समय राखी बांधना शुभकारी रहेगा। इस बार रक्षा बंधन पर शतभिषा नक्षत्र और सौम्य योग का महासंयोग बन रहा है। साथ ही, गोचर में बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में और सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में विराजमान होकर बुधादित्य योग का निर्माण कर रहे हैं। ग्रहों की यह स्थिति आत्मबल, प्रतिष्ठा, ज्ञान और समृद्धि के लिए अत्यंत श्रेष्ठ मानी जा रही है।
राखी बांधने के लिए तीन मुख्य शुभ मुहूर्त बताए गए हैं:
प्रातः काल: सिंह लग्न में सुबह 7:13 बजे तक
मध्यान्ह काल: वृश्चिक लग्न में सुबह 11:35 बजे से दोपहर 1:50 बजे तक
सायंकाल: कुंभ लग्न में शाम 5:43 बजे से 7:18 बजे तक
बहनें अपने भाई को पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठाएं और खुद पश्चिम दिशा की ओर मुख कर बैठें। भाई को रोली और अक्षत का तिलक लगाकर राखी बांधें। इस दिन सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक राहुकाल रहेगा, जिसमें राखी बांधना अशुभ माना जाता है। भद्रा का साया इस बार नहीं है क्योंकि भद्रा 27 अगस्त को ही समाप्त हो जाएगी।
शास्त्रों के अनुसार, अपनी राशि के अनुसार विशेष रंग के धागे और तिलक का प्रयोग करने से भाई-बहन के बीच प्रेम और प्रगाढ़ होता है:
मेष: नारंगी धागा, सिंदूर का तिलक।
वृषभ: सफेद चमकीला धागा, चमकीला तिलक।
मिथुन: हरा नारंगी धागा, चमेली की सुगंध का तिलक।
कर्क: सफेद चांदी युक्त धागा, चन्द्राकार लाल तिलक।
सिंह: लाल गुलाबी धागा, गुलाब जल युक्त लाल तिलक।
कन्या: हरा नीला धागा, चावल हल्दी का मिश्रित टीका।
तुला: चमकीला हरा पीला धागा, चांदी के अर्क का लाल टीका।
वृश्चिक: लाल पीला धागा, शहद युक्त लाल तिलक।
धनु: केसर युक्त पीला तिलक, हल्दी चावल का तिलक।
मकर: नीला चमकीला धागा, रोली का तिलक।
कुम्भ: नीला हरा मोर पंख युक्त धागा, घी चावल का टीका।
मीन: पीला धागा, चन्दन कुमकुम का टीका।
राहु काल में राखी बांधना अशुभ माना जाता है। रक्षा बंधन के दिन सुबह 10 बजकर 46 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12:22 मिनट तक राहु काल है। इस समय किए गए कार्यों का विपरीत या नकारात्मक फल प्राप्त होते हैं। भद्राकाल में राखी बांधना अशुभ माना जाता है। इस वर्ष भद्रा नहीं है।
इस बार पूर्णिमा दो दिन पड़ रही है। भद्रा 27 अगस्त को लगेगा, उसी दिन समाप्त भी हो जाएगा। सूर्योदय के समय भद्रा नहीं रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सात दशक बाद ऐसा संयोग बन रहा है कि रक्षाबंधन के दिन ग्रहों की स्थिति भी विशेष रहेगी।
सूर्य सिंह राशि में रहेंगे, जिसे उनकी स्वराशि माना जाता है। वहीं गुरु कर्क राशि में स्थित होंगे, जो उनकी उच्च राशि है। ज्योतिषीय मान्यताओं में सूर्य को आत्मबल, प्रतिष्ठा और ऊर्जा का कारक तथा गुरु को ज्ञान, शिक्षा, बुद्धि और समृद्धि से जुड़ा ग्रह माना जाता है। चंद्रमा कुंभ राशि में रहेंगे। ग्रहों की इस स्थिति को रक्षाबंधन के लिए शुभ माना जा रहा है।