

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और आसपास के जिलों में सरकारी स्कूलों के पठन-पाठन के स्तर को और अधिक प्रभावी व छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब कक्षाओं में कोई भी छात्र-छात्रा बैक बेंचर्स नहीं बनेंगे। शिक्षा विभाग ने जिले के सभी सरकारी स्कूलों में 'यू-शेप माडल' से पढ़ाई कराने का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को पारंपरिक रटंत विद्या से दूर करके उन्हें समझकर सीखने की प्रवृत्ति से जोड़ना है।
समग्र शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यू-शेप माडल में कक्षा के अंदर बच्चों के बैठने की व्यवस्था अंग्रेजी के अक्षर 'यू' के आकार जैसी होती है। इस अनूठी व्यवस्था से शिक्षक एक साथ कक्षा के हर एक विद्यार्थी पर सीधी नजर रख सकते हैं। आमने-सामने बैठने के कारण विद्यार्थियों में झिझक खत्म होती है और वे बेझिझक सवाल पूछने के लिए प्रेरित होते हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास भी तेजी से बढ़ता है।
पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों के उलट इस माडल में केवल शिक्षक के व्याख्यान पर ही निर्भरता नहीं रहती, बल्कि छात्र भी पूरी शिक्षण प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। समूह चर्चा और संवाद आधारित शिक्षण से विषयों की समझ बहुत गहरी हो जाती है। इसके साथ ही, शिक्षकों के लिए यह पहचान करना बेहद आसान हो जाता है कि किस कमजोर विद्यार्थी को अतिरिक्त सहायता और मार्गदर्शन की जरूरत है। यह पूरी व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की मूल अवधारणा के बिल्कुल अनुकूल है।
वर्तमान स्थिति पर गौर करें तो जिले कुल 1,428 सरकारी विद्यालय हैं, जिनमें से 930 स्कूलों में यह आधुनिक माडल पहले से ही सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। हालांकि, लगभग 500 विद्यालय अभी भी इस व्यवस्था से अछूते हैं क्योंकि वहां पर्याप्त कक्ष, फर्नीचर या विद्यार्थियों की अधिक संख्या जैसी कुछ दिक्कतें थीं। अब विभाग ने सभी प्राचार्यों से बुनियादी संरचना की रिपोर्ट मांगी है ताकि कमियों को दूर करके इस सत्र में शत-प्रतिशत स्कूलों में यू-शेप माडल लागू किया जा सके।