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जहां कभी गूंजती थी गोलियों की तड़तड़ाहट, वहां अब सुनाई देता राष्ट्रगान; माओवादी खौफ से निकलकर बस्तर के 600 से अधिक स्कूलों में लौटी रौनक

बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर में लंबे समय से बंद 600 से अधिक स्कूल फिर संचालित हुए हैं।

By Digital DeskEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Sat, 05 Sep 2026 08:23:01 AM (IST)Updated Date: Sat, 05 Sep 2026 08:31:10 AM (IST)
जहां कभी गूंजती थी गोलियों की तड़तड़ाहट, वहां अब सुनाई देता राष्ट्रगान; माओवादी खौफ से निकलकर बस्तर के 600 से अधिक स्कूलों में लौटी रौनक
माओवादी हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में 600 से अधिक स्कूल फिर खुले (AI Generated Image)

HighLights

  1. स्थानीय शिक्षक गोंडी, हल्बी और डोरली में संवाद करते हैं
  2. ग्रामीणों ने बांस-तिरपाल से अस्थायी कक्षाएं तैयार कीं
  3. स्मार्ट क्लास, टैबलेट और डिजिटल सामग्री पर जोर दिया

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। प्रदेश के माओवादी हिंसा से मुक्त क्षेत्रों में करीब दो दशक बाद शिक्षा की गतिविधियां फिर जोर पकड़ रही हैं। जिन इलाकों में कभी बंदूक और बारूद का भय लोगों के जीवन पर हावी था, वहां अब स्कूलों में बच्चों की आवाज, राष्ट्रगान और पढ़ाई का माहौल दिखाई दे रहा है। यह बदलाव बस्तर और दूरस्थ अंचलों में नई उम्मीद लेकर आया है।

600 से अधिक स्कूलों में फिर शुरू हुई पढ़ाई

राज्य सरकार की सुरक्षा, पुनर्वास और जनकल्याणकारी नीतियों के प्रभाव से बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जिलों में लंबे समय से बंद 600 से अधिक प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों का दोबारा संचालन शुरू किया गया है। माओवादी हिंसा के दौरान कई स्कूल भवन क्षतिग्रस्त हो गए थे। प्रशासन और सुरक्षा बलों के सहयोग से इन्हें फिर तैयार किया गया है।


स्थानीय भाषाओं से बच्चों का भरोसा जीता

इन क्षेत्रों में शिक्षा को दोबारा मजबूत करने में स्थानीय शिक्षकों और शिक्षादूतों की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है। वे गोंडी, हल्बी और डोरली जैसी स्थानीय भाषाओं में संवाद कर बच्चों और उनके स्वजन का विश्वास हासिल कर रहे हैं। जहां स्कूल भवन उपलब्ध नहीं हैं, वहां ग्रामीणों ने बांस और तिरपाल की मदद से अस्थायी कक्षाएं बनाई हैं, जिससे पढ़ाई जारी रह सके।

डिजिटल सुविधाओं पर भी जोर

पुनः संचालित स्कूलों में स्मार्ट क्लास, टैबलेट, डिजिटल सामग्री और खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के तहत सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने से शिक्षक अब निर्भय होकर स्कूलों तक पहुंच रहे हैं। शिक्षा की वापसी इन इलाकों में सामान्य जीवन की बहाली का महत्वपूर्ण संकेत बन रही है।