
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ के शिक्षा जगत में हलचल मची हुई है। छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर प्रदेशभर के हजारों शिक्षकों ने मंगलवार को एक दिन का अवकाश ले लिया है, जिसके चलते कई ग्रामीण और शहरी स्कूलों में पठन-पाठन पूरी तरह से ठप हो गया है। शिक्षक अपनी मांगों को लेकर मुखर हैं और सरकार के खिलाफ आर-पार के मूड में नजर आ रहे हैं।
इस पूरे विवाद की जड़ पदोन्नति के नियमों में 'टेट' (टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) की अनिवार्यता है। शिक्षक नेताओं का स्पष्ट तर्क है कि शिक्षकों की भर्ती और पदोन्नति नियमों में टेट की बाध्यता नहीं है। इसके अलावा, नियमानुसार शिक्षकों को टेट पास करने के लिए वर्ष 2028 तक का समय दिया गया है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग द्वारा पदोन्नति के लिए इसे अनिवार्य बनाकर शिक्षकों का लगातार मानसिक भयादोहन किया जा रहा है, जिसे शिक्षक किसी भी कीमत पर सहन करने को तैयार नहीं हैं।
अपनी मांगों के समर्थन में मंगलवार शिक्षक तिरंगे के सम्मान के साथ सड़कों पर उतरकर भव्य रैलियां निकाल रहे हैं। मोर्चा के प्रमुख संयोजकों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि शिक्षकों की सुरक्षित सेवा और उनके अधिकारों की गारंटी उनके लिए सर्वोपरि है। प्रदेश के सभी जिलों में विशाल रैलियां निकालने के बाद मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपा जाएगा, ताकि शासन प्रशासन तक शिक्षकों का आक्रोश पहुंच सके।
शिक्षक नेताओं ने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार शिक्षकों के हित में सकारात्मक और व्यावहारिक फैसला नहीं लेती, तब तक यह संघर्ष अलग-अलग रणनीतियों के तहत जारी रहेगा। तर्क और तथ्यों के आधार पर शिक्षकों को उनका हक दिलाया जाएगा। प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के सभी संवर्गों के शिक्षकों से अपील की गई है कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आएं और आंदोलन का हिस्सा बनें।