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छत्तीसगढ़ में बदलाव की खूबसूरत तस्वीर, फैशन शो में ट्राइबल ब्यूटी, बस्तर की आत्मसमर्पित माओवादी युवतियों का रैंप वॉक चर्चा में

सुकमा के माओवादी पुनर्वास केंद्र से आईं आठ युवतियों ने जब प्रोफेशनल माडलों के साथ राजधानी के डीडीयू आडिटोरियम में रैंप पर कदम रखा तो यह सिर्फ फैशन शो ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 16 Aug 2026 10:37:56 PM (IST)Updated Date: Sun, 16 Aug 2026 10:37:56 PM (IST)
छत्तीसगढ़ में बदलाव की खूबसूरत तस्वीर, फैशन शो में ट्राइबल ब्यूटी, बस्तर की आत्मसमर्पित माओवादी युवतियों का रैंप वॉक चर्चा में
आत्मसमर्पित महिला माओवादियों ने रायपुर में किया रैंप वॉक।

HighLights

  1. लाल आतंक का साया छोड़ मुख्यधारा में आईं सुकमा की बेटियां
  2. आत्मसमर्पित महिला माओवादियों ने रायपुर में किया रैंप वॉक
  3. बस्तर के पुनर्वास केंद्र से आईं युवतियों ने बदला अपना अतीत

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। जंगल की पगडंडियों से रैंप की रोशनी तक का सफर आसान नहीं होता। सुकमा के माओवादी पुनर्वास केंद्र से आईं आठ युवतियों ने जब प्रोफेशनल माडलों के साथ राजधानी के डीडीयू आडिटोरियम में रैंप पर कदम रखा तो यह सिर्फ फैशन शो नहीं, बल्कि बदलाव की कहानी बन गई। नेशनल हैंडलूम डे पर आयोजित इस फैशन शो की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी चर्चा में हैं। इन युवतियों में कई कभी माओवादी संगठन से जुड़ी रही हैं और हिंसक घटनाओं का हिस्सा भी बनीं।

फैशन शो में ट्राइबल ब्यूटी

जंगल और कठिन परिस्थितियों के बीच बीता उनका जीवन रैंप की चमक-दमक से बिल्कुल अलग था। करीब एक सप्ताह की ट्रेनिंग में उन्हें रैंप वाक, बाडी लैंग्वेज, प्रस्तुति और दर्शकों के सामने आत्मविश्वास से खड़े होने का अभ्यास कराया गया। शुरुआत में झिझक थी, लेकिन मंच पर पहुंचते ही उनके कदमों में आत्मविश्वास नजर आया।


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तालियों की गूंज के बीच आगे बढ़ती युवतियों की प्रस्तुति महज फैशन नहीं, बल्कि अतीत से बाहर निकलकर नई पहचान बनाने की कोशिश भी थी। मीड़ियम गंगी, माड़वी नंदिनी, पोडियम राजे, माड़वी देवे, माड़वी मल्ले, डोडी रामे, पूनम देवे और पूनम ज्योति ने रैंप वाक में हिस्सा लिया।

मीड़ियम गंगी...पहली बार लगा, जिंदगी में नई राह भी है

रैंप वाक का अनुभव मीड़ियम गंगी के लिए पूरी तरह नया था। शुरुआत में उन्हें मंच और दर्शकों के सामने चलने को लेकर डर लगा। अभ्यास के दौरान धीरे-धीरे झिझक कम हुई और आत्मविश्वास बढ़ा। अंतिम प्रस्तुति में प्रोफेशनल माडलों के साथ कदम मिलाते हुए उन्हें अलग तरह का अनुभव हुआ। उनका कहना है कि पहले कभी नहीं सोचा था कि इतने लोगों के सामने इस तरह रैंप पर चलने का मौका मिलेगा। दर्शकों की तालियों ने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया। उनके लिए यह अनुभव इसलिए भी खास रहा क्योंकि इससे उन्हें महसूस हुआ कि जिंदगी में पुराने रास्तों के अलावा नई राहें भी हो सकती हैं।

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पूनम ज्योति ... तालियों ने बदला डर का एहसास

पूनम ज्योति के लिए रैंप पर उतरना कल्पना से अलग अनुभव था। इतने लोगों के सामने प्रस्तुति देना उनके लिए पहली बार था। शुरुआती झिझक प्रशिक्षण के साथ कम होती गई। रैंप वॉक के साथ उन्हें शरीर की मुद्रा और चेहरे के भावों पर भी अभ्यास कराया गया। जब कार्यक्रम के दौरान वह दर्शकों के सामने पहुंचीं तो तालियों ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। उन्हें महसूस हुआ कि वह भी नए माहौल में खुद को सहजता से प्रस्तुत कर सकती हैं। पूनम के लिए यह कार्यक्रम केवल मंच पर कुछ मिनट बिताने का अवसर नहीं था, बल्कि लोगों से मिले सम्मान ने उन्हें आगे की जिंदगी के लिए एक नया उत्साह दिया।

पूनम देवे ... घबराहट से आत्मविश्वास तक

पूनम देवे को शुरुआत में रैंप देखकर ही घबराहट होती थी। मंच पर लोगों के सामने चलना और अपनी प्रस्तुति पर ध्यान देना उनके लिए आसान नहीं था। लगातार अभ्यास से उन्होंने अपने कदमों और बॉडी लैंग्वेज पर नियंत्रण बनाना सीखा। धीरे-धीरे डर कम हुआ और आत्मविश्वास बढ़ा। अंतिम दिन जब वह रैंप पर उतरीं तो शुरुआती झिझक नजर नहीं आई। पूनम का कहना है कि इस अभ्यास से उन्हें समझ आया कि आत्मविश्वास के साथ कई ऐसी चीजें भी की जा सकती हैं, जिनके बारे में पहले कल्पना नहीं की थी। कार्यक्रम ने उन्हें खुद को नए नजरिए से देखने का मौका दिया।

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माड़वी नंदिनी ... पुराने जीवन से आगे निकलने का एहसास

माड़वी नंदिनी के लिए रैंप वाक का अनुभव यादगार रहा। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने प्रस्तुति देने और लोगों के सामने सहज रहने का अभ्यास किया। शुरुआत में संकोच था, लेकिन अभ्यास के साथ वह कम होता गया। रैंप पर कदम रखते समय उन्हें एक अलग तरह का एहसास हुआ। उन्हें लगा कि वह अपने पुराने जीवन से आगे बढ़ रही हैं। मंच पर मिली प्रतिक्रिया ने इस भावना को और मजबूत किया। नंदिनी के लिए यह अवसर इस बात का संकेत था कि परिस्थितियां बदलने के साथ जीवन की दिशा भी बदली जा सकती है। उनके मुताबिक प्रशिक्षण ने उन्हें अपनी क्षमताओं को पहचानने का अवसर दिया।

डोडी रामे ... रैंप से ज्यादा खुद को पहचानना अहम

डोडी रामे के लिए यह कार्यक्रम केवल फैशन से जुड़ा आयोजन नहीं था। उन्होंने इसे खुद को नए रूप में देखने का मौका माना। रैंप पर उतरने से पहले उनके मन में भी झिझक थी, लेकिन अभ्यास के बाद आत्मविश्वास बढ़ा। दर्शकों की प्रतिक्रिया ने उन्हें सहज होने में मदद की। उनके लिए सबसे खास बात यह रही कि लोगों ने उन्हें प्रोत्साहन दिया। डोडी के अनुसार इस अनुभव ने उन्हें महसूस कराया कि व्यक्ति के भीतर कई ऐसी क्षमताएं हो सकती हैं, जिन्हें सही अवसर मिलने पर सामने लाया जा सकता है। रैंप उनके लिए इसी अवसर का प्रतीक बन गया।

माड़वी मल्ले ... कुछ दिन पहले तक थी झिझक

माड़वी मल्ले प्रशिक्षण के शुरुआती दिनों में काफी नर्वस थीं। रैंप वाक और दर्शकों के सामने प्रस्तुति का अनुभव उनके लिए नया था। उन्होंने लगातार अभ्यास किया और प्रशिक्षकों के बताए तरीके अपनाए। इससे धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ा। अंतिम दिन उन्होंने बिना झिझक रैंप पर प्रस्तुति दी। उनके अनुसार कुछ दिनों के अभ्यास ने उनके भीतर बड़ा बदलाव किया। पहले जहां लोगों के सामने आने में संकोच था, वहीं कार्यक्रम के दौरान वह सहज नजर आईं। उनके लिए दर्शकों की तालियां खास रहीं। इससे उन्हें लगा कि मेहनत और अभ्यास के जरिए वह नए अवसरों के लिए खुद को तैयार कर सकती हैं।

माड़वी देवे ... फैशन से मिली खुद को पहचानने की सीख

माड़वी देवे के लिए फैशन और मॉडलिंग की दुनिया बिल्कुल अनजान थी। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने पहली बार जाना कि रैंप पर चलने के लिए केवल चाल ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और प्रस्तुति भी जरूरी है। अभ्यास के दौरान उन्होंने अपनी झिझक कम की। कार्यक्रम में रैंप पर उतरने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि उनके भीतर भी कई खूबियां हैं। माड़वी के मुताबिक इस अनुभव ने उन्हें अपनी क्षमताओं को नए तरीके से देखने का मौका दिया। लोगों की प्रतिक्रिया ने उनका उत्साह बढ़ाया। उनके लिए यह कार्यक्रम आगे बढ़ने और नए अवसरों को स्वीकार करने की प्रेरणा बन गया।

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पोडियम राजे....सीखा कि बदलाव संभव है

पोडियम राजे के लिए रैंप पर चलना एक खास अनुभव रहा। शुरुआत में मंच और दर्शकों के सामने आने को लेकर झिझक थी, लेकिन प्रशिक्षण के दौरान आत्मविश्वास बढ़ा। रैंप पर प्रस्तुति देते समय उन्हें लगा कि वह कुछ बिल्कुल नया कर रही हैं। दर्शकों की तालियों ने उन्हें उत्साहित किया। उनके अनुसार इस अनुभव से उन्होंने सीखा कि जीवन में बदलाव संभव है और नए अवसर मिलने पर उन्हें स्वीकार करने का साहस भी होना चाहिए। उनके लिए रैंप वॉक बीते अनुभवों से आगे बढ़ने और भविष्य की ओर देखने का एक नया अनुभव रहा।

सात दिन में बदला अंदाज, आत्मविश्वास ने बदली चाल

रायपुर में करीब एक सप्ताह तक इन युवतियों को विशेष प्रशिक्षण और ग्रूमिंग दी गई। मुंबई से आए प्रशिक्षक ओम ने रैंप वॉक के साथ बॉडी लैंग्वेज, प्रस्तुति और आत्मविश्वास पर अभ्यास कराया। शुरुआत में कई युवतियां नर्वस थीं। उनके लिए मंच, कैमरे और दर्शकों के सामने चलना नया था। अभ्यास के दौरान कदमों की गति, शरीर की मुद्रा और चेहरे के भावों पर ध्यान दिया गया। धीरे-धीरे झिझक कम हुई और प्रस्तुति में सहजता आने लगी। अंतिम दिन प्रोफेशनल मॉडलों के साथ रैंप वाक करते समय उनके आत्मविश्वास में साफ बदलाव दिखाई दिया। प्रशिक्षण ने उन्हें सिर्फ रैंप पर चलना नहीं सिखाया, बल्कि सार्वजनिक मंच पर खुद को प्रस्तुत करने का भरोसा भी दिया।

सोशल मीडिया पर क्यों चर्चा में आया यह शो

इस फैशन शो की चर्चा का कारण मंच पर दिखी चमक-दमक से ज्यादा इससे जुड़ी कहानी रही। पुनर्वास केंद्र से आईं युवतियों ने प्रोफेशनल माडलों के साथ रैंप साझा किया। इनमें कई युवतियां पहले नक्सल संगठन से जुड़ी रही थीं। अब वही चेहरे मुख्यधारा की जिंदगी में अपनी जगह बनाने की कोशिश करते दिखाई दिए। रैंप पर उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। कुछ मिनट की प्रस्तुति के पीछे संघर्ष, बदलाव और आत्मविश्वास की लंबी कहानी है।