• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
  • user
मेरी खबरेंuser
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • त्विषा शर्मा केस
  • भोजशाला पर फैसला
  • एलपीजी संकट
  • गर्मी का मौसम
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • राजनांदगांव

राजनांदगांव में डॉक्टरों ने नाबालिग का प्रसव कराकर बेचा बच्चा, अस्पताल संचालक समेत 10 गिरफ्तार, मास्टरमाइंड पर 5000 का इनाम

नाबालिग से बलात्कार के बाद अवैध प्रसव कराकर नवजात को बेचने वाले संगठित अपराध का पुलिस ने 75 दिन बाद राजफाश किया है।

By MIthlesh DewanganEdited By: Himadri Singh Hada
Publish Date: Wed, 25 Mar 2026 07:59:40 PM (IST)Updated Date: Wed, 25 Mar 2026 07:59:40 PM (IST)
राजनांदगांव में डॉक्टरों ने नाबालिग का प्रसव कराकर बेचा बच्चा, अस्पताल संचालक समेत 10 गिरफ्तार, मास्टरमाइंड पर 5000 का इनाम
डॉक्टरों ने नाबालिग का प्रसव कराकर बेचा बच्चा।

HighLights

  1. डॉक्टरों ने नाबालिग का प्रसव कराकर बेचा बच्चा।
  2. 10 गिरफ्तार, मास्टरमाइंड पर 5000 का इनाम।
  3. संगठित नेटवर्क और धाराओं के तहत कार्रवाई।

नईदुनिया प्रतिनिधि, राजनांदगांव। नाबालिग से बलात्कार के बाद अवैध प्रसव कराकर नवजात को बेचने वाले संगठित अपराध का पुलिस ने 75 दिन बाद राजफाश किया है। मामले में कृष्णा अस्पताल के संचालक डॉ. दीपक पंसारी (31) और राजनांदगांव डायग्नोस्टिक सेंटर की डॉ. आरती उइके (45) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

पुलिस की प्रारंभिक पड़ताल में इस नेटवर्क में कुल 11 आरोपित शामिल हैं, जिनमें से 10 को गिरफ्तार किया जा चुका है। पूरे घटनाक्रम का अहम किरदार डॉ. विजयराज नागवंशी अब भी फरार है, जिस पर पांच हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है।


लाइसेंस निलंबन की सिफारिश और FIR

मामले में दोनों चिकित्सकों की भूमिका गंभीर पाई गई है। कृष्णा अस्पताल और संबंधित चिकित्सकों की गतिविधियों को देखते हुए नेशनल मेडिकल कमिशन को लाइसेंस निलंबन के लिए पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा की ओर से पत्र भी भेजा गया है।

बोरतलाब थाना क्षेत्र की किशोरी से नाबालिग द्वारा बलात्कार के बाद सितंबर-अक्टूबर 2025 के बीच अवैध प्रसव कराया गया। इसके बाद नवजात को बेचने की साजिश रची गई।

जनवरी में एफआइआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने अस्पताल में दबिश देकर दस्तावेजों की जांच की थी। शुरुआती जांच में अस्पताल, डायग्नोस्टिक सेंटर और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मिली थी, लेकिन नाम सार्वजनिक नहीं किए गए थे।

संगठित नेटवर्क और धाराओं के तहत कार्रवाई

थाना बोरतलाव में इस प्रकरण में धारा 61(2), 318(4), 337, 338, 339 के अलावा पाक्सो एक्ट और बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम व किशोर न्याय अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच में सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था, जिसमें चिकित्सकों के साथ अस्पताल कर्मचारी और अन्य लोग भी शामिल थे।

पुलिस ने इस मामले में एक किशोर सहित डा दीपक पंसारी, डॉ आरती उइके, नवजात लेने वाले रवि बर्वे (31) व मोना बर्वे (30), अस्पताल कर्मचारी सैमुएल ढोके (23), रायशीला उर्फ दीपिका यादव (30), गेशू देवांगन (25), गोवर्धन यादव (36) और विनिता बाई यादव (31) को गिरफ्तार किया है।

अस्पताल-डायग्नोस्टिक सेंटर की केंद्रीय भूमिका

जांच में स्पष्ट हुआ है कि अवैध प्रसव और नवजात की बिक्री जैसे गंभीर अपराध में कृष्णा अस्पताल और राजनांदगांव डायग्नोस्टिक सेंटर की भूमिका मुख्य रही। डायग्नोस्टिक सेंटर में नाबालिग के गर्भ की जांच की गई, लेकिन इसकी सूचना पुलिस को देने के बजाय मामला दबा दिया गया।

बाद में कृष्णा अस्पताल में अवैध प्रसव कराया गया। आरोप है कि डॉ विजयराज ने कुमुद मोहबे अस्पताल के कर्मचारियों से मिलीभगत कर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार करवाए। पूरे प्रकरण में दस्तावेजों में हेरफेर और गोपनीयता बनाए रखने के लिए विशेष सतर्कता बरती गई।

जांच और स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल

एफआइआर दर्ज होने के बाद करीब 75 दिन तक आरोपितों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। अक्टूबर 2025 में राजनांदगांव डायग्नोस्टिक सेंटर में नाबालिग के गर्भ की जांच हुई, लेकिन सूचना दबा दी गई।

आरोप है कि डॉ विजयराज ने पीड़िता के स्वजनों को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर रकम वसूली और नवजात को बेचने का सौदा किया। इस पूरे प्रकरण में स्वास्थ्य विभाग ने भी जांच बिठाई थी।

जांच अधिकारी डॉ अल्पना लूनिया के मुताबिक प्रकरण में जांच की रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को सौंप दी गई है। दूसरी ओर सीएमएचओ इस रिपोर्ट को लेकर अनभिज्ञता जता रहे हैं। संवेदनशील मामले में स्वास्थ्य विभाग की यह कार्यशैली कई तरह के सवाल खड़े कर रही है।