
नईदुनिया प्रतिनिधि, राजनांदगांव। बदलते सामाजिक परिवेश में साहू समाज के एक परिवार ने मानवीय संवेदनाओं, महिला सम्मान और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। छुरिया तहसील क्षेत्र के ग्राम सलईटोला निवासी उमेराम साहू और उनकी पत्नी अमरबती बाई ने अपनी बहू को बेटी का सम्मान देते हुए बुधवार को उसका पुनर्विवाह कराया। इतना ही नहीं, उन्होंने माता-पिता की तरह सभी वैवाहिक रस्में निभाते हुए कन्यादान भी किया। उनके इस निर्णय की क्षेत्रभर में सराहना हो रही है।
सास-ससुर और मायके पक्ष ने मिलकर पुनर्विवाह का निर्णय लिया
जानकारी के अनुसार, भर्रीटोला (अंबागढ़ चौकी) निवासी लोकेश्वरी साहू का विवाह करीब एक वर्ष पहले सलईटोला निवासी अजय साहू से हुआ था। करीब तीन महीने पहले सड़क दुर्घटना में अजय साहू की मृत्यु हो गई। पति के निधन के बाद लोकेश्वरी अपने भविष्य को लेकर चिंतित थीं। उनकी स्थिति को देखते हुए सास-ससुर और मायके पक्ष ने मिलकर उनके पुनर्विवाह का निर्णय लिया।
सादगीपूर्ण वातावरण में विवाह संपन्न हुआ
दोनों परिवारों ने योग्य वर की तलाश शुरू की और ग्राम आको निवासी ओमप्रकाश, पिता हुमनलाल साहू के साथ रिश्ता तय किया। इसके बाद बुधवार को सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार सलईटोला में सादगीपूर्ण वातावरण में विवाह संपन्न हुआ।
साहू समाज ने बताया सामाजिक बदलाव की मिसाल
समाज के प्रबुद्धजनों ने कहा कि यह पहल केवल एक परिवार का निर्णय नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए सकारात्मक सोच और सामाजिक परिवर्तन का संदेश है। उनका कहना है कि ऐसे उदाहरण जरूरतमंद महिलाओं को सम्मानपूर्वक नया जीवन जीने का अवसर प्रदान करते हैं।
विवाह समारोह में तहसील साहू संघ कुमरदा के अध्यक्ष मिलाप दास साहू, साल्हे परिक्षेत्र अध्यक्ष भुवन साहू, कुमरदा परिक्षेत्र अध्यक्ष फकीर साहू, परिक्षेत्र सचिव मेघनाथ साहू, न्याय प्रकोष्ठ के संयोजक मान दास साहू सहित समाज के अनेक पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने नवविवाहित दंपती को शुभकामनाएं देते हुए इस पहल की सराहना की।
विधवा महिलाओं के सम्मान में पहले भी पहल कर चुका है साहू समाज
साहू समाज इससे पहले भी विधवा महिलाओं को सामाजिक सम्मान दिलाने की दिशा में पहल कर चुका है। वर्षभर पहले समाज ने परंपरा में बदलाव करते हुए विधवा महिलाओं को विवाह समारोह में मौर सौंपने का अधिकार दिया था। इसके अलावा जिला साहू सदन में विभिन्न समुदायों के युवाओं के लिए निशुल्क कोचिंग और हर वर्ष सामूहिक विवाह जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
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