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सुकमा में नवरात्रि में माला पहनने पर शिक्षिका को टोका, आहत होकर नौकरी से दिया इस्तीफा, हिन्दू संगठनों ने किया विरोध प्रदर्शन

हिंदू संगठनों और समाज के लोगों ने विद्यालय पहुंचकर विरोध जताया तथा धार्मिक आस्था के सम्मान की मांग उठाई।

By Ramkrishna DongreEdited By: Nitin Kumar
Publish Date: Wed, 14 Oct 2026 10:15:07 PM (IST)Updated Date: Wed, 14 Oct 2026 10:15:07 PM (IST)
सुकमा में नवरात्रि में माला पहनने पर शिक्षिका को टोका, आहत होकर नौकरी से दिया इस्तीफा, हिन्दू संगठनों ने किया विरोध प्रदर्शन
हिन्दू संगठनों का प्रदर्शन, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, नईदुनिया

HighLights

  1. सुकमा के कोंटा स्थित निजी स्कूल का मामला
  2. शिक्षिका ने दुखी होकर नौकरी से दिया इस्तीफा
  3. हिन्दू संगठनों का प्रदर्शन, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

नईदुनिया न्यूज, कोंटा। मदर टेरेसा ज्योति कॉन्वेंट स्कूल में नवरात्र के दौरान दीक्षा माला और लाल वस्त्र पहनकर पहुंची शिक्षिका लक्ष्मी प्रसना को विद्यालय में प्रवेश से रोके जाने का मामला सामने आया है। घटना से आहत होकर शिक्षिका ने इस्तीफा सौंप दिया। मामले की जानकारी मिलते ही हिंदू संगठनों और समाज के लोगों ने विद्यालय पहुंचकर विरोध जताया तथा धार्मिक आस्था के सम्मान की मांग उठाई।

धार्मिक आस्था को लेकर उठाए सवाल

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि विद्यालय में बड़ी संख्या में हिंदू बच्चे अध्ययन करते हैं, इसके बावजूद धार्मिक प्रतीकों और परंपराओं के पालन को लेकर इस तरह की रोक उचित नहीं है। उन्होंने विद्यालय परिसर में देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित करने की मांग भी रखी। साथ ही बसंत पंचमी पर अवकाश और विद्यालय के नियमों के पालन को लेकर भी सवाल उठाए।


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अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर दी समझाइश

विरोध बढ़ने पर खंड शिक्षा अधिकारी एसके दीप और थाना प्रभारी शिवानंद तिवारी विद्यालय पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया। इस दौरान विद्यालय के प्राचार्य ने गलती स्वीकार करते हुए भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं होने का भरोसा दिलाया।

कलेक्टर के नाम सौंपा ज्ञापन

हिंदू समाज के प्रतिनिधियों ने मामले में उचित कार्रवाई की मांग करते हुए कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। साथ ही विद्यालय प्रबंधन के उच्च पदस्थ पादरी के साथ इस विषय पर आगे बैठक किए जाने की बात भी सामने आई है। घटना के बाद विद्यालय में धार्मिक आस्था, शिक्षकों के सम्मान और संस्थागत नियमों के पालन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

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