
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर । नेशनल काउंसिल फॉर टीचर्स एजुकेशन (एनसीटीई) से मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए तीन चरण की काउंसिलिंग पूरी होने के बाद भी कई कोर्सों की सीटें खाली हैं। सबसे ज्यादा चिंता बीपीएड, एमपीएड, बीएससी-बीएड और बीए-बीएड पाठ्यक्रमों को लेकर है। जहां 50 फीसदी सीटें भी नहीं भर पाई हैं। वहीं बीएड और एमएड में अब तक केवल 55 फीसदी सीटों पर ही प्रवेश हो सका है।
सीटें खाली रहने की स्थिति को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने अब प्रवेश प्रक्रिया का एक अतिरिक्त चरण रखा है। विद्यार्थी 24 से 27 जुलाई तक आनलाइन पंजीयन करा सकेंगे। 28 जुलाई तक दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाएगा। इसके बाद 30 जुलाई को मेरिट सूची जारी होगी और 31 जुलाई को सीटों का आवंटन किया जाएगा।
सीट आवंटित होने के बाद विद्यार्थियों को 31 जुलाई से 3 अगस्त तक निर्धारित फीस जमा करनी होगी। जबकि महाविद्यालयों को 4 अगस्त तक रिक्त सीटों की जानकारी पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।
अशासकीय शिक्षा महाविद्यालय संघ के पदाधिकारी अभय पांडे और सुनील पंड्या का कहना है कि कम प्रवेश का मुख्य कारण विद्यार्थियों को उनके जिले से बाहर के कॉलेज आवंटित होना है। ऐसे में कई छात्र-छात्राएं दूसरे शहर जाकर पढ़ाई करने से बच रहे हैं और प्रवेश नहीं ले रहे हैं।
शिक्षाविद् अवधेश दवे ने कहा कि बड़ी संख्या में सीटें खाली होने के कारण कॉलेजों ने रिक्त सीटों के लिए कॉलेज स्तर पर काउंसिलिंग कराने की मांग की है। उनका मानना है कि यदि विद्यार्थियों को अपनी पसंद के कॉलेज में प्रवेश का अवसर मिले तो सीटें भरने की संभावना बढ़ सकती है।