
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। बोर्ड परीक्षाओं की तारीखें नजदीक आते ही छात्रों के बीच पूरी रात जागकर पढ़ने की एक अघोषित प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। छात्र इसे सफलता का शार्टकट मान रहे हैं, लेकिन शहर के मनोवैज्ञानिक और चिकित्सक इस ट्रेंड को लेकर चेतावनी दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा में बेहतर परिणाम के लिए जितना जरूरी किताबों को पढ़ना है, उतना ही जरूरी दिमाग को विश्राम देना और सही खान-पान रखना है। छात्रों को यह समझना होगा कि एक थका हुआ दिमाग और भूखा शरीर कभी भी उत्कृष्ट प्रदर्शन नहीं कर सकता।
नींद नहीं, यह मेमोरी बूस्टर है मनोचिकित्सक डॉ. अभिजीत श्रीवास्तव के मुताबिक अक्सर छात्र सोचते हैं कि सोने में बिताया गया समय बर्बाद हो रहा है, जबकि वैज्ञानिक तथ्य इसके उलट हैं। जब हम सोते हैं, तब हमारा मस्तिष्क सक्रिय रूप से काम करता है।
यह दिन भर पढ़ी गई जटिल जानकारियों को व्यवस्थित करता है और उन्हें शार्ट टर्म मेमोरी से लान्ग टर्म मेमोरी में स्टोर करता है। यदि छात्र सात से आठ घंटे की भरपूर नींद नहीं लेते हैं, तो दिमाग डेटा प्रोसेस नहीं कर पाता और परीक्षा हाल में ब्लैकआउट या पढ़ा हुआ भूलने की समस्या पैदा होती है।
परीक्षा के दौरान केवल नींद ही नहीं, बल्कि क्या खा रहे हैं, इसका सीधा असर दिमाग की कार्यक्षमता पर पड़ता है। अक्सर छात्र पढ़ाई के दबाव में या तो खाना छोड़ देते हैं या फिर जंक फूड का सहारा लेते हैं, जो आलस और भारीपन बढ़ाता है।
हल्का और सुपाच्य भोजन
डायटीशियनों के मुताबिक परीक्षा के दिनों में भारी, तला-भुना और मसालेदार भोजन जैसे समोसा-कचौड़ी से बचें। यह पाचन तंत्र पर दबाव डालता है और सुस्ती लाता है।
याददाश्त बढ़ाने के लिए भीगे हुए बादाम, अखरोट और अलसी के बीजों को डाइट में शामिल करें।
पानी की कमी से थकान और सिरदर्द हो सकता है। दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं। ताजे फलों का रस और नारियल पानी भी एकाग्रता बढ़ाता है।
रात को जागने के लिए बार-बार चाय या काफी का सेवन न करें। इससे नींद का चक्र बिगड़ता है और शरीर में बेचैनी बढ़ती है।