
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। आज हर कोई जल्दी सफलता चाहता है, जबकि आर्किटेक्चर और इंटीरियर डिजाइन ऐसा क्षेत्र है, जहां धैर्य सबसे बड़ा निवेश है। समय के साथ ही आपकी सोच और शैली विकसित होती है। सबसे जरूरी है अपनी अलग डिजाइन लैंग्वेज तैयार करना। किसी का काम देखकर प्रेरणा लेना गलत नहीं है, लेकिन पहचान अपनी होनी चाहिए।
यह बातें इंटीरियर और आर्किटेक्ट विशेषज्ञ और म्यूजलैब के को-फाउंडर हुजेफा रंगवाला ने कही। वे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीरियर डिजाइनर्स (आईआईआईडी) इंदौर चैप्टर द्वारा आयोजित ज्ञानार्जन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
हुजेफा रंगवाला ने कहा कि पहले डिजाइनर्स के पास सीमित संदर्भ होते थे, इसलिए उनकी अपनी शैली बनती थी। आज इंटरनेट पर हजारों डिजाइन हर समय सामने हैं। ऐसे माहौल में सबसे मुश्किल काम है भीड़ से अलग दिखना। उन्होंने युवाओं से कहा कि ट्रेंड के पीछे भागने के बजाय अपनी सोच को मजबूत करें। उन्होने कहा, क्लाइंट को संभालना किताबों से नहीं सीखा जा सकता। इसके लिए अनुभवी लोगों के साथ काम करना जरूरी है। किसी अच्छी फर्म में काम करने से डिजाइन के साथ-साथ लोगों को समझने और निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित होती है।
हुजेफा रंगवाला ने अपने सफर के बारे में बताया कि उन्होंने पहले यह तय किया कि उन्हें क्या नहीं करना है। इसी स्पष्ट सोच ने उनकी डिजाइन फिलासाफी को दिशा दी। उन्होंने अपने कार्य करने के तरीके की भी जानकारी दी। बताया कि एक ही आफिस से उनकी दो फर्म संचालित होती हैं। पूरी टीम जेन-जी प्रोफेशनल्स की है। वे युवाओं से यह भी पूछते हैं कि वे अपने करियर से क्या उम्मीद रखते हैं।
इस दौरान आईआईआईडी इंदौर चैप्टर के चेयरपर्सन विकास ठक्कर ने बताया हुजेफा रंगवाला ने न सिर्फ अपने काम से नई पीढ़ी को प्रेरित किया बल्कि उन्होंने अपने प्रेजेंटेशन में हर काम को शार्ट फिल्म के जरिए डॉक्यूमेंट भी किया था। इससे नई पीढ़ी के आर्किटेक्ट्स को भी अपने काम को सही तरीके से डाक्युमेंटेड करने की प्रेरणा मिली। इसका लाभ उन्हें भविष्य में होगा। इस दौरान वार्तालाप सेशन का संचालन नेहा साहनी ने किया। आभार सेकेटरी पुनीत पांडे ने माना।