
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मेरे जीवन में दो महिलाओं का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। पहले क्रम पर मां और दूसरे स्थान पर पत्नी है। इन दोनों ही ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। मेरी मां बहुत सहनशील और धैर्यवान हैं और उनके यह गुण मुझे भी मिले। मुझे यह कहते हुए बहुत गर्व होता है कि मैं मेरी मां की तरह हूं। मेरे दिल में मेरी मां का दिल बसता है। मेरा मानना तो यह है कि यदि हर व्यक्ति में, हर पुरुष में यदि एक मां का दिल हो तो दुनिया में जंग, हिंसा, निर्ममता कभी होगी ही नहीं।
यह बात ख्यात अभिनेता आयुष्मान खुराना ने शहर आगमन पर मीडिया से हुई चर्चा में कही। आयुष्मान और अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह मंगलवार को शहर में थे। वे शहर आए तो अपनी फिल्म ‘पति पत्नी और वो दो’ के प्रमोशन के लिए थे लेकिन इस अवसर को उन्होंने न केवल इंदौरियों से मुलाकात की बल्कि यहां के जायके और संस्कृति को करीब से जानने का प्रयास भी किया। दिन में मीडिया से मुलाकात और शाम को 56 दुकान जाकर वहां जायके का आनंद भी इन्होंने भरपूर लिया।
शहर के खानपान और इंदौरियों के स्वभाव का जिक्र करते हुए रकुल प्रीत और आयुष्मान ने कहा कि लोग तो हर जगह के अच्छे होते हैं। उन्हें अलग बनाता है तो उस शहर के संस्कार, संस्कृति और वहां का परिवेश। जहां तक सफलता की बात है तो आप अपनी प्रोफेशनल लाइफ में भी तभी संतुष्ट और खुश रह सकते हैं जब आप निजी जीवन में भी खुश और संतुष्ट हैं।
रकुल प्रीत ने व्यक्तिगत जीवन से लेकर फिल्मी जगत और सोशल मीडिया पर खूब चर्चा की। उन्होंने कहा कि मैं जब फिल्मी जगत में आई थी तो सोशल मीडिया का इतना चलन नहीं था। मैं अपनी फिल्में करती और दोस्तों के साथ बाजार, पार्टी, होटल में आराम से जाती थी। तब लाइफ बहुत सिंपल थी और ध्यान केवल काम पर ही होता था। अब ऐसा नहीं है।
आज मैं सोशल मीडिया का उपयोग करती हूं, पर यह उपयोग अपने शौक से नहीं बल्कि जरूरत के लिए करती हूं। मेरा मानना है कि सोशल मीडिया हमारे जीवन पर प्रभाव डालता है। जिन कलाकारों को ट्रोलिंग से बहुत फर्क पड़ता है, उनके तो शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य पर भी सोशल मीडिया नकारात्मक प्रभाव डालता है।
रकुल ने कहा कि मैंने कई तरह के किरदार निभाए पर अब बायोपिक करने की इच्छा है। जहां तक बात कामेडी की है तो मैं इसे बहुत जटिल मानती हूं। दूसरे इमोशन देना तो मेरे लिए तब भी आसान है, पर हंसाना बहुत मुश्किल है। मेरा मानना है कि कामेडी फिल्म लोगों को जोड़ती है। आप कामेडी फिल्म अकेले नहीं औरों के साथ देखना पसंद करोगे।
जहां तक बात फिल्मों के चयन की है तो मैं कहानी, निर्माता, निर्देशक, सहकलाकार, संदेश आदि बातों को ध्यान में रखकर फिल्म साइन करती हूं। मुझे ग्रे शेड वाला किरदार निभाने की भी इच्छा है। वास्तव में वर्तमान दौर प्रयोगधर्मिता वाला है।
प्रयोग करने का यह बेहतरीन वक्त है। हमने कभी नहीं सोचा था कि माइक्रो ड्रामा भी होगा और आज यह हो रहा है। 30 सेकंड का एपिसोड भी पसंद किया जा रहा है। जेन अल्फा और जेन जी बेशक इसे पसंद कर रहा है पर मैं माइक्रोड्रामा करना पसंद नहीं करती।
आयुष्मान ने कहा कि पत्नी का भी मेरे जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान है। ताहिरा पत्नी बनने से पहले मेरी मित्र थी और उसने मुझे यह सिखाया कि महिलाओं के साथ किस तरह का व्यवहार किया जाता है क्योंकि इससे पहले मेरे पुरुष दोस्त ही थे और घर में भी छोटे भाई का साथ रहता था।
ताहिरा की दोस्ती ने मुझे नारी की संवेदना को समझने के बारे में बताया। जहां तक बात सोशल मीडिया की है तो यह हम कलाकारों के लिए ब्रेड बटर नहीं है। 90 के दशक तक कलाकार अपनी बात बेबाकी से रखते थे क्योंकि तब सोशल मीडिया नहीं था आज मन की बात भी नहीं कह सकते।
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