
दीप्ति मुले, नईदुनिया जबलपुर। इंसान के सपने यदि मजबूत हों और उन्हें पूरा करने का जुनून हो तो परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, सफलता की राह जरूर बनती है। सफलता केवल जीतने का नाम नहीं है, बल्कि असफलता के बाद दोबारा खड़े होकर प्रयास करने का नाम भी है।
उनका सफर बताता है कि अगर जुनून सच्चा हो, मेहनत लगातार हो और खुद पर विश्वास कायम रहे तो मंजिल देर से सही, हासिल जरूर होती है उक्त बातें इंडियन आइडल-16 के फस्र्ट रनर अप तनिष्क शुक्ला ने कहीं। तनिष्क ने अपनी आवाज और मेहनत के दम पर देश के लोकप्रिय रियलिटी शो इंडियन आइडल-16 में फर्स्ट रनर अप का मुकाम हासिल किया। तनिष्क की संगीत यात्रा जितनी खूबसूरत है, उतनी ही संघर्ष और आत्मविश्वास से भरी हुई भी है।
तनिष्क का जन्म गाडरवारा में हुआ। उनके पिता न्यायिक सेवा में होने के कारण अलग-अलग शहरों में पदस्थ होते रहे, जिसके चलते परिवार को भी अलग-अलग स्थानों पर रहना पड़ा। वर्ष 2004 से तनिष्क की स्कूली शिक्षा और कालेज की पढ़ाई ग्वालियर में हुई। संगीत से तो उन्हें बचपन से ही लगाव था, लेकिन शास्त्रीय संगीत से उनका गहरा जुड़ाव 2014 के बाद हुआ।
उस समय वे 11वीं कक्षा में पढ़ रहे थे। संगीत से पहले तनिष्क की दुनिया चेस की बिसात से जुड़ी थी। वे कई चेस टूर्नामेंट में हिस्सा लेकर विजेता भी रह चुके हैं। इसके बाद अचानक उनका रुझान संगीत की ओर हुआ और उन्होंने इसे ही अपनी जिंदगी का लक्ष्य बना लिया। वर्ष 2015 से 2020 तक वे एंग्जायटी की समस्या से भी जूझे, लेकिन परिवार और स्वजनों ने उनका मनोबल बढ़ाया।
वे अपने परिजनों के साथ जबलपुर आए और यहां संगीत गुरु प्रकाश वेरुलकर से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त की। इंडियन आइडल में तनिष्क दूसरी बार पहुंचे थे। इससे पहले वर्ष 2021 में भी उन्होंने शो में हिस्सा लिया था और आठवें राउंड तक पहुंचे थे। उन्होंने दोबारा मेहनत की और इस बार फर्स्ट रनर अप बनकर अपनी प्रतिभा साबित कर दी।
बचपन से ही मुझे म्यूजिक सुनने का बहुत शौक था। खासतौर पर इंग्लिश म्यूजिक मुझे काफी पसंद था। लेकिन 2014 के आसपास, जब मैं 11वीं कक्षा में था, तब मेरा रुझान क्लासिकल म्यूजिक की ओर बढ़ा। इससे पहले मेरा ज्यादा ध्यान चेस पर था। मैंने चेस के कई टूर्नामेंट खेले और उनमें जीत भी हासिल की।
एक समय ऐसा आया जब मुझे लगा कि संगीत ही वह क्षेत्र है, जिसमें मैं खुद को पूरी तरह व्यक्त कर सकता हूं। इसके बाद मैंने संगीत को गंभीरता से लेना शुरू किया। जबलपुर आने के बाद मुझे संगीत गुरु प्रकाश वेरुलकर से शास्त्रीय संगीत सीखने का अवसर मिला। मेरे लिए यह बहुत महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। शास्त्रीय संगीत ने मेरी गायकी की नींव मजबूत की और मुझे संगीत को समझने का नजरिया दिया।
वह समय मेरे लिए आसान नहीं था। वर्ष 2015 से 2020 तक मैं एंग्जायटी की समस्या से जूझता रहा। कई बार ऐसा लगता था कि चीजें मेरे पक्ष में नहीं हैं। लेकिन मेरे स्वजनों ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया। उन्होंने मुझे कमजोर महसूस नहीं होने दिया और लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद जबलपुर आना भी मेरे जीवन में एक महत्वपूर्ण बदलाव रहा। यहां मुझे परिवार का साथ मिला और संगीत सीखने का बेहतर अवसर भी। मेरा मानना है कि जीवन में मुश्किल दौर जरूर आते हैं, लेकिन हमें उनसे हारना नहीं चाहिए। अपने लोगों का साथ और खुद पर विश्वास बहुत जरूरी है।
मैं इंडियन आइडल में दूसरी बार गया था। इससे पहले वर्ष 2021 में भी मैंने आडिशन दिया था। उस समय मैं आठवें राउंड तक पहुंचा था, लेकिन शो में आगे नहीं जा सका। उस समय निश्चित रूप से निराशा हुई थी, लेकिन मेरे अंदर कुछ कर दिखाने का जुनून था।
मैंने सोचा कि एक कोशिश में मंजिल नहीं मिली तो क्या हुआ, दोबारा कोशिश करनी चाहिए। मैंने अपनी कमियों पर काम किया, गायकी को बेहतर किया और फिर इंडियन आइडल में पहुंचा। इस बार फर्स्ट रनर अप बनना मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। मेरे लिए यह केवल एक रियलिटी शो का परिणाम नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और लगातार प्रयास का परिणाम है।
मैं बचपन से ही बहुत फिल्मी हूं। मुझे एक्टिंग का भी शौक है। जब भी कोई काम करने का ठानता हूं तो उसे पूरा करके ही छोड़ता हूं। मुझे आध्यात्म में भी बहुत रुचि है। मेरे लिए संगीत केवल मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह भावनाओं को व्यक्त करने का माध्यम भी है।
मेरा सपना है कि मैं शाहरुख खान और रणवीर सिंह के लिए गाना गाऊं। जब किसी कलाकार की आवाज किसी बड़े अभिनेता के किरदार के साथ जुड़ती है तो वह अलग ही अनुभव होता है। मैं भविष्य में प्लेबैक सिंगिंग के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना चाहता हूं। मेरी पसंदीदा अभिनेत्री मधुबाला जी रही हैं। मुझे लगता है कि पूरी दुनिया में उनसे खूबसूरत कोई नहीं है। उनकी खूबसूरती, अभिनय और स्क्रीन प्रेजेंस आज भी लोगों को आकर्षित करती है।
जवाब- युवाओं से मैं यही कहना चाहता हूं कि वे किसी भी काम को पूरी ईमानदारी से करें। जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते हैं, लेकिन हमें अपनी मंजिल से नजर नहीं हटानी चाहिए। मेहनत का कोई विकल्प नहीं है और सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। मैं अपनी जिंदगी से भी यही सीखता हूं। चेस से संगीत तक का सफर आसान नहीं था। 2021 में इंडियन आइडल में आठवें राउंड तक पहुंचा, लेकिन वहां से वापस आने के बाद भी मैंने कोशिश नहीं छोड़ी। दोबारा गया और इस बार फर्स्ट रनर अप बना। इसलिए युवाओं को हमेशा प्रयासरत रहना चाहिए।
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