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सीमित व्यंजनों से सजी थाली से रिश्तों में घुल रही मिठास, सामाजिक संगठन भोजन की बर्बादी रोकने पर दे रहे जोर

महंगाई के दौर में शादी-विवाह का बढ़ता खर्च परिवारों के बजट पर असर डाल रहा है। मेहमानों की संख्या, सजावट और खान-पान पर होने वाले खर्च को नियंत्रित करने...और पढ़ें

By ramkrashna MuleEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Fri, 14 Aug 2026 11:42:26 AM (IST)Updated Date: Fri, 14 Aug 2026 11:42:26 AM (IST)
सीमित व्यंजनों से सजी थाली से रिश्तों में घुल रही मिठास, सामाजिक संगठन भोजन की बर्बादी रोकने पर दे रहे जोर
भोजन की थाली। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

HighLights

  1. मध्यमवर्ग को मिल रही राहत तो सामाजिक-धार्मिक आयोजन जूठन छोड़ने की प्रवृत्ति पर लगी लगाम
  2. महंगाई के दौर में शादी-विवाह का बढ़ता खर्च परिवारों के बजट पर असर डाल रहा है
  3. मेहमानों की संख्या, सजावट और खान-पान पर होने वाले खर्च को नियंत्रित करने के लिए इंदौर के कुछ सामाजिक संगठन पिछले कुछ वर्ष से प्रेरक पहल कर रहे है

रामकृष्ण मुले, नईदुनिया, इंदौर : महंगाई के दौर में शादी-विवाह का बढ़ता खर्च परिवारों के बजट पर असर डाल रहा है। मेहमानों की संख्या, सजावट और खान-पान पर होने वाले खर्च को नियंत्रित करने के लिए इंदौर के कुछ सामाजिक संगठन पिछले कुछ वर्ष से प्रेरक पहल कर रहे है। इनकी इस पहल से सीमित व्यंजनों से सजी थाल से रिश्तों में बड़ी मिठास घुल रही है।

पहल का उद्देश्य केवल खर्च घटाना नहीं, बल्कि जरूरत से ज्यादा भोजन परोसने और उसकी बर्बादी रोकना भी है। यानी शादी की भव्यता अब व्यंजनों की लंबी सूची के बजाय सादगी, बचत और सामाजिक जिम्मेदारी से तय करने की कोशिश हो रही है।


हालांकि अभी इस जागरुकता अभियान को लंबा सफर तय करना बाकी है। अग्रवाल, माहेश्वरी और जैन समाज के विभिन्न संगठनों ने वैवाहिक आयोजनों में व्यंजनों की संख्या सीमित रखने का निर्णय लिया है। अलग-अलग संगठनों ने इसके लिए 7 से लेकर 21 तक की सीमा तय की है।

श्वेतांबर जैन समाज ने सात वर्ष पहले सात से 11 व्यंजन का निर्णय लिया। इसके चलते सभी संगठन ने अपने सामुहिक वात्सल्य के आयोजन में इसका पालन कर रहे है जो आज भी जारी है। श्वेतांबर जैन महासंघ के पूर्वाध्यक्ष कैलाश नाहर बताते है कि समाजिक व धार्मिक आयोजन में जूठन की प्रवृत्ति समाप्त हुई है। पांच फीसद से भी कम भोजन भी अब झूठा नहीं जाता है।

100 व्यंजन पर 70 एवं 21 पर जूठन का प्रतिशत 10 फीसद से कम

अग्रवाल समाज के मिशन 21 के प्रमुख संजय गोयल कहते है कि विवाह दो परिवारों के रिश्ते और सामाजिक जुड़ाव का अवसर है, इसे अनावश्यक खर्च और दिखावे का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। अधिकतम एक व्यक्त 350 से 300 ग्राम से अधिक भोजन नहीं कर सकता है। हमने आकलन किया उसमें पाया कि जहां 100 पर 70, 50 पर 40 और 21 व्यंजन पर 10 फीसद खाना जूठन में जाता है। यह हमारे राष्ट्र का नुकसान जब कई लोग भूखे सोते है, इसलिए अभियान की शुरुआत की।

माहेश्वरी समाज : छह वर्ष से जारी जनजागरुकता अभियान

जिला माहेश्वरी साज इंदौर के उपाध्यक्ष अजय सारड़ा कहते है कि भोजन का अपव्यय रोकने के लिए 6 वर्ष से समाज इसके लिए प्रयास कर रहा है लेकिन अभी भी जागरुकता अभाव है। संपन्न लोगों को देखकर मध्यमवर्ग पर 50-60 व्यंजन रखने का दबाव बनता है।

बढ़ती महंगाई के साथ विशेषकर मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए विवाह समारोह का बढ़ता खर्च लगातार चुनौती बनता जा रहा है। खान-पान के मेन्यू को संतुलित रखा जाए तो परिवार बड़ी राशि बचा सकते हैं। इस बचत का उपयोग बच्चों की शिक्षा, भविष्य की जरूरतों या अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में किया जा सकता है।

व्यंजन की संख्या के साथ बढ़ती प्लैट के दाम

6 व्यंजन की 250 एवं 21 व्यंजन की थाली 500 रुपये की पडती है वहीं व्यंजन की संख्या 51 या 100 से अधिक होने पर 1400-1500 तक पहुंच जाती है। व्यंजन की संख्या के साथ प्लैट की कीमत बढ़ती है और आयोजन का बजट भी। यह बात भी सही की अधिक व्यंजन होने से जूठन भी अधिक थाली में छूटता है। - राजेश गर्ग, श्रीसिद्ध विनायक केटर्स

व्यंजन की संख्या बढ़ी तो बजट भी बढ़ा

  • 6 व्यंजन 500 मेहमानों के लिए तय करने पर 1 लाख 25 हजार खर्च।
  • 21 व्यंजन 500 मेहमान के लिए तय करने पर 3 लाख रुपये खर्च।
  • 51 व्यंजन 500 मेहमान के लिए तय करने पर 4 लाख 50 हजार खर्च।
  • 100 व्यंजन 500 मेहमान के लिए तय करने पर 7 लाख का खर्च ।

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