
लाइफस्टाइल डेस्क। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित दिनचर्या और फास्ट फूड के अत्यधिक सेवन के कारण पेट से जुड़ी समस्याएं बेहद आम हो गई हैं। इनमें से सबसे प्रमुख और परेशान करने वाली समस्या है - कब्ज (Constipation)। यदि सुबह पेट खुलकर साफ न हो, तो पूरा दिन भारीपन, सुस्ती और चिड़चिड़ेपन में बीतता है।
आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में 'वात दोष' के असंतुलन और मंदाग्नि (धीमी पाचन क्रिया) के कारण कब्ज की समस्या पैदा होती है। अगर आप भी लंबे समय से पुरानी कब्ज से परेशान हैं और अंग्रेजी दवाओं के साइड इफेक्ट्स से बचना चाहते हैं, तो आयुर्वेद में इसका बेहद सरल और स्थाई इलाज मौजूद है।
आयुर्वेद में त्रिफला (आंवला, हरड़ और बहेड़ा का मिश्रण) को पेट के लिए अमृत माना गया है। क्रोनिक या पुरानी कब्ज से पीड़ित लोगों को रोज रात को सोने से पहले एक चम्मच त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लेना चाहिए। यह आंतों की सक्रियता को बढ़ाता है और सुबह पेट आसानी से साफ करता है।
यदि कब्ज बहुत गंभीर है, तो रात को सोते समय एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच शुद्ध अरंडी का तेल मिलाकर पिएं। यह आंतों में जमा सख्त मल को ढीला करने का सबसे त्वरित और सुरक्षित आयुर्वेदिक माध्यम है।
4 से 5 मुनक्के और 2 सूखे अंजीर को रातभर पानी में भिगोकर रख दें। सुबह उठकर मुनक्के के बीज निकाल लें और दोनों को चबाकर खाएं, साथ ही वह पानी भी पी लें। इनमें प्रचुर मात्रा में फाइबर होता है जो पाचन तंत्र को सुचारू बनाता है।
रात के भोजन के आधे घंटे बाद एक से दो चम्मच ईसबगोल की भूसी को गुनगुने पानी या दूध के साथ लेने से आंतों की सफाई अच्छी तरह होती है।
आयुर्वेदाचार्यों के मुताबिक, सिर्फ औषधियों के सेवन से कब्ज पूरी तरह ठीक नहीं हो सकती, इसके लिए खानपान में सुधार भी जरूरी है। अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, दलिया, ओट्स और ताजे फलों को शामिल करें जिनमें फाइबर की मात्रा अधिक हो।
इसके साथ ही, दिनभर में कम से कम 8 से 10 गिलास गुनगुना या सामान्य पानी जरूर पिएं। सुबह उठकर खाली पेट दो गिलास हल्का गर्म पानी पीने की आदत (उषापान) डालें, इससे आंतों में जमा टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं।
नोट - यह लेख सामान्य आयुर्वेदिक जानकारियों पर आधारित है। यदि आपको कोई गंभीर चिकित्सीय स्थिति या अन्य बीमारी है, तो किसी योग्य आयुर्वेदाचार्य या डॉक्टर की सलाह के बाद ही इन उपायों को अपनाएं।