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3 जुलाई से शुरू होगी बाबा अमरनाथ यात्रा... तैयारी पूरी रखें, तभी मिलेगा सुरक्षित और सुखद दर्शन का अनुभव

3 जुलाई से शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य जांच, पंजीकरण, सीमित सामान, मौसम संबंधी सावधानियां और प्रशासनिक निर्देशों का पालन...और पढ़ें

By Jogendra SenEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Wed, 01 Jul 2026 11:08:49 AM (IST)Updated Date: Wed, 01 Jul 2026 11:08:49 AM (IST)
3 जुलाई से शुरू होगी बाबा अमरनाथ यात्रा... तैयारी पूरी रखें, तभी मिलेगा सुरक्षित और सुखद दर्शन का अनुभव
बाबा अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू हो रही है। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. 3 जुलाई से अमरनाथ यात्रा शुरू होगी।
  2. स्वास्थ्य प्रमाणपत्र और पंजीकरण अनिवार्य।
  3. सीमित और जरूरी सामान साथ रखें।

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। देश की सबसे कठिन और आस्था से जुड़ी धार्मिक यात्राओं में शामिल बाबा अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू हो रही है। ग्वालियर से भी श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह है। अब तक 200 से अधिक श्रद्धालु अलग-अलग जत्थों में यात्रा के लिए रवाना हो चुके हैं, जबकि करीब दो हजार श्रद्धालु आने वाले दिनों में बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए निकलने की तैयारी कर रहे हैं।

कई श्रद्धालु व्यक्तिगत रूप से भी यात्रा करेंगे। यात्रा को सुरक्षित और सफल बनाने के लिए श्रद्धालु इन दिनों नियमित पैदल चलने का अभ्यास, योग और स्वास्थ्य संबंधी तैयारियां कर रहे हैं। वहीं सामाजिक संगठन भी बैठकें आयोजित कर यात्रियों को जरूरी सावधानियों, आवश्यक दस्तावेजों और साथ ले जाने वाले सामान की जानकारी दे रहे हैं।


दो मार्गों से पहुंचते हैं श्रद्धालु पवित्र गुफा तक

समुद्र तल से लगभग 3,888 मीटर (12,756 फीट) की ऊंचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं के पास दो प्रमुख मार्ग हैं। पहला पहलगाम मार्ग है, जिसकी कुल दूरी लगभग 46 किलोमीटर है।

यह रास्ता अपेक्षाकृत लंबा जरूर है, लेकिन चढ़ाई कम कठिन होने के कारण अधिकांश श्रद्धालु इसी मार्ग को चुनते हैं। दूसरा बालटाल मार्ग है, जहां से गुफा की दूरी करीब 14 किलोमीटर है। यह मार्ग छोटा है, लेकिन काफी खड़ी चढ़ाई और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के कारण अधिक कठिन माना जाता है।

यात्रा से पहले स्वास्थ्य जांच और पंजीकरण जरूरी

  • अमरनाथ यात्रा पर जाने से पहले वैध पंजीकरण और अधिकृत स्वास्थ्य प्रमाणपत्र अनिवार्य है। विशेषज्ञों का कहना है कि हृदय रोग, अस्थमा, उच्च रक्तचाप या गंभीर श्वास संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों को चिकित्सकीय सलाह के बिना यात्रा नहीं करनी चाहिए।

  • ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन का स्तर कम होता है और मौसम भी अचानक बदल सकता है, इसलिए शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट होना आवश्यक है।
  • साथ रखें केवल जरूरी सामान

    • पिछले ढाई दशक से लगातार अमरनाथ यात्रा कर रहे प्रोफेसर डॉ. संजय पांडे के अनुसार यात्रा में अनावश्यक सामान ले जाना सबसे बड़ी भूल साबित हो सकती है।
    • श्रद्धालुओं को गर्म ऊनी कपड़े, रेनकोट, वाटरप्रूफ जैकेट, मजबूत ट्रैकिंग जूते, ऊनी मोजे, दस्ताने, टोपी, टॉर्च, पानी की बोतल, सूखे मेवे, ऊर्जा देने वाले खाद्य पदार्थ, आवश्यक दवाइयां, प्राथमिक उपचार किट और पहचान पत्र साथ रखना चाहिए। कम सामान होने से कठिन चढ़ाई के दौरान थकान कम होती है और यात्रा आसान बनती है।

    मौसम और प्रशासनिक निर्देशों का रखें विशेष ध्यान

    यात्रा के दौरान मौसम कभी भी बदल सकता है। ऐसे में खराब मौसम होने पर आगे बढ़ने का जोखिम नहीं लेना चाहिए। प्रशासन द्वारा निर्धारित मार्ग का ही उपयोग करें और सुरक्षा बलों के निर्देशों का पालन करें। पर्याप्त पानी पीते रहें, धीरे-धीरे चढ़ाई करें और किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या होने पर तुरंत चिकित्सा शिविर से संपर्क करें।

    पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभाएं

    श्रद्धालुओं से अपील की जा रही है कि यात्रा के दौरान प्लास्टिक का उपयोग न करें और कूड़ा-कचरा निर्धारित स्थानों पर ही डालें। प्राकृतिक वातावरण को स्वच्छ बनाए रखना प्रत्येक यात्री की जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस पवित्र धाम की दिव्यता का अनुभव कर सकें।

    क्या है बाबा अमरनाथ गुफा की धार्मिक मान्यता

    • धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने इसी पवित्र गुफा में माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य यानी अमर कथा सुनाई थी। कथा सुनाने से पहले उन्होंने अपने वाहन नंदी, चंद्रमा, नाग, गणेश और पंचतत्व का मार्ग में त्याग किया था, ताकि यह रहस्य किसी अन्य तक न पहुंचे।

  • गुफा के भीतर प्राकृतिक रूप से बनने वाला हिमलिंग भगवान शिव का साक्षात स्वरूप माना जाता है। हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। श्रद्धा के साथ यदि यात्रा पूरी तैयारी, सावधानी और संयम से की जाए तो यह न केवल सुरक्षित रहती है, बल्कि जीवनभर याद रहने वाला आध्यात्मिक अनुभव भी बन जाती है।
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