सावधान! कहीं आपका आरओ सेहत सुधारने के बजाय बिगाड़ तो नहीं रहा? जानिये पानी की शुद्धता का गणित
ग्वालियर शहर के विभिन्न क्षेत्रों जैसे लश्कर, मुरार और उपनगर ग्वालियर में पानी की गुणवत्ता अलग-अलग है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आपके घर के लिए कौन ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 11 May 2026 12:02:36 PM (IST)Updated Date: Mon, 11 May 2026 12:18:49 PM (IST)
सोशल मीडियाHighLights
- आरओ और साधारण वाटर प्यूरीफायर में अंतर जानिए
- कम टीडीएस वाला पानी पड़ सकता है भारी
- पानी की बर्बादी और मिनरल्स का नुकसान
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। वर्तमान में गर्मी अधिक पड़ रही है और गर्मी में यदि पानी की कमी से डिहाइड्रेशन का शिकार होते हैं। ऐसे में लोग अधिक से अधिक पानी पीते हैं। लेकिन पानी पीने के दौरान हमें ध्यान देना होगा कि कौन-सा पानी पी रहे हैं, क्योंकि पानी को शुद्ध करने के लिए लोगों ने घर में आरओ और प्यूरीफायर लगवा रखे हैं।
हमें देखना और समझना जरूरी
ऐसे में हमें देखना होगा कि प्यूरीफायर पानी को वैक्टीरिया व वायरस दूर कर रहा है या नहीं। साथ ही यदि आरओ का पानी है तो वो सही टीडीएस का है या नहीं, क्योंकि कम टीडीएस का पानी है तो भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और अधिक है तो भी खतरनाक है। शहर के विभिन्न क्षेत्रों जैसे लश्कर, मुरार और उपनगर ग्वालियर में पानी की गुणवत्ता अलग-अलग है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आपके घर के लिए कौन-सा फिल्टर सही है और यदि है तो वह सही काम कर रहा है या नहीं।
आरओ बनाम वाटर प्यूरीफायर में फर्क समझना जरूरी
अक्सर लोग आरओ और साधारण वाटर प्यूरीफायर को एक ही मान लेते हैं, जबकि दोनों के काम करने का तरीका अलग है। वाटर प्यूरीफायर एक व्यापक श्रेणी है, जिसमें साधारण फिल्टर से लेकर एडवांस सिस्टम तक आते हैं। आरओ वह तकनीक है जो पानी में घुले हानिकारक रसायनों, आर्सेनिक, लेड जैसे हेवी मेटल्स और हाई टीडीएस को दूर करती है। यह खारे पानी को मीठा बनाने के लिए सबसे कारगर है। अल्ट्रावायलेट तकनीक पानी के बैक्टीरिया और वायरस को तो खत्म करती है, लेकिन यह घुली हुई अशुद्धियों को साफ नहीं कर पाती।
शहर के किस इलाके में क्या है सही
विशेषज्ञों के अनुसार, आरओ का इस्तेमाल केवल उन्हीं क्षेत्रों में करना चाहिए जहां पानी का टीडीएस बहुत ज्यादा हो यानी पानी खारा हो। शहर के वे इलाके जहां बोरवेल का पानी इस्तेमाल होता है, वहां आरओ सही विकल्प है। लेकिन यदि आप ऐसे क्षेत्र में रहते हैं जहां पानी पहले से मीठा है या प्रदूषण कम है, तो वहां केवल प्यूरीफायर फिल्टर ही काफी है।
आरओ तकनीक का सबसे बड़ा नकारात्मक पहलू यह है कि पानी शुद्ध करने की प्रक्रिया में 30 से 40 फीसदी पानी बर्बाद हो जाता है। इसके अलावा, लंबे समय तक आरओ का पानी पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है, क्योंकि यह प्रक्रिया पानी से कुछ जरूरी मिनरल्स भी बाहर निकाल देती है। इसलिए पूरा अध्ययन के बाद आरओ लगवाएं।