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सुनने व देखने की अद्भुत क्षमता, जबलपुर में अलग-अलग नस्लों की अपनी खासियत है बिल्लियों की

पालतू बिल्लियां अपने मालिक, घर के वातावरण और रोजमर्रा की गतिविधियों को लंबे समय तक याद रख सकती हैं। यही वजह है कि समय के साथ उनका अपने मालिकों के साथ ...और पढ़ें

By Deepti MuleyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Sat, 08 Aug 2026 08:41:01 AM (IST)Updated Date: Sat, 08 Aug 2026 08:41:01 AM (IST)
सुनने व देखने की अद्भुत क्षमता, जबलपुर में अलग-अलग नस्लों की अपनी खासियत है बिल्लियों की
ठाकुरताल की पहाड़ियों में 20 साल बाद दिखी थी कैराकल।नईदुनिया

HighLights

  1. विशेषज्ञों ने कहा नटखट घरेलू बिल्लियों से लेकर जंगल की रहस्मयी कैट तक मौजूद
  2. जबलपुर में भी अलग-अलग नस्लों की पालतू बिल्लियां देखने को मिलती हैं
  3. सुंदरता के लिए ही नहीं जानी जातीं, बल्कि उनकी याददाश्त भी अच्छी होती है

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। बिल्लियां अपनी चंचलता, खूबसूरत आंखों और इंसानों के प्रति सहज व्यवहार के कारण लंबे समय से लोगों की पसंद बनी हुई हैं। घरों में पाली जाने वाली घरेलू बिल्लियों से लेकर जंगलों में विचरण करने वाली जंगली प्रजातियों तक, इनका संसार काफी विविध है।

शहर के आसपास के वन क्षेत्रों में जंगली कैट की कुछ प्रजातियों की मौजूदगी भी

जबलपुर में भी अलग-अलग नस्लों की पालतू बिल्लियां देखने को मिलती हैं। वहीं शहर के आसपास के वन क्षेत्रों में जंगली कैट की कुछ प्रजातियों की मौजूदगी भी दर्ज की गई है।

बिल्लियां की याददाश्त भी अच्छी होती है

विशेषज्ञों ने कहा कि बिल्लियां केवल अपनी फुर्ती और सुंदरता के लिए ही नहीं जानी जातीं, बल्कि उनकी याददाश्त भी अच्छी होती है। इंटरनेशनल कैट डे के अवसर पर विशेषज्ञों और वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर्स ने बिल्लियों की विशेषताओं और उनके संरक्षण से जुड़े पहलुओं पर जानकारी साझा की।


अंधेरे में भी बेहतर देख सकती हैं बिल्लियां

कैट की सबसे खास विशेषताओं में उनकी तेज सुनने और देखने की क्षमता शामिल है। कम रोशनी में भी ये आसपास की गतिविधियों को आसानी से महसूस कर लेती हैं। शिकार के दौरान उनकी सुनने की क्षमता और तेजी काफी मददगार साबित होती है। यही कारण है कि जंगल में रहने वाली जंगली बिल्लियां अपने शिकार की हल्की-सी आहट को भी पहचान लेती हैं।

रैगडाल से मेन कून तक, हर नस्ल की अलग पहचान

रैगडाल कैट अपने मुलायम बालों और नीली आंखों के कारण आकर्षक लगती है। इसका स्वभाव अपेक्षाकृत शांत और मिलनसार माना जाता है। यह डाग सहित अन्य पालतू जानवरों के साथ भी घर में सामंजस्य बैठा सकती है। इसकी औसत उम्र करीब 12 से 17 वर्ष तक बताई जाती है। मेन कून अपने बड़े आकार, घने बाल और लंबी पूंछ के लिए जानी जाती है।

परिवार के साथ घुल-मिलकर रहने वाली नस्ल

बुद्धिमान और परिवार के साथ घुल-मिलकर रहने वाली नस्ल माना जाता है। यह अन्य पालतू जानवरों के साथ भी सहजता से रह सकती है। रस्टी कैट भारत और श्रीलंका में पाई जाने वाली छोटी जंगली बिल्लियों में शामिल है। छोटे कद और भूरे रंग के कारण इसका अलग आकर्षण है। यह बेहद सक्रिय और फुर्तीली होती है तथा अपनी तेज गति से शिकार करने के लिए जानी जाती है।

ठाकुरताल की पहाड़ियों में 20 साल बाद दिखी थी कैराकल

जबलपुर की वन्यजीव विविधता में कैराकल कैट का उल्लेख भी खास है। प्राप्त जानकारी के अनुसार 13 फरवरी 2020 को ठाकुरताल की पहाड़ियों पर कैराकल को देखा गया था। यह करीब दो दशक बाद इस क्षेत्र में इसकी मौजूदगी दर्ज होने का महत्वपूर्ण अवसर था। मध्यम आकार और भूरे रंग वाली कैराकल एक जंगली बिल्ली की प्रजाति है और इसकी उपस्थिति क्षेत्र की जैव विविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

पालतू बिल्लियों में बढ़ा लोगों का रुझान

वेटरनरी के प्रोफेसर एवं हेड मेडिसिन डा. देवेंद्र कुमार गुप्ता के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में लोगों के बीच कैट पालने का चलन बढ़ा है। वेटरनरी अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 10 से 15 कैट से जुड़े मामले उपचार के लिए आते हैं। इनमें पर्शियन कैट की संख्या अधिक रहती है। इसके अलावा देसी कैट, बाम्बे कैट और शार्ट हेयर जैसी नस्लों के मामले भी सामने आते हैं।

बिल्लियों में कार्डियक डिजीज की समस्या देखने को मिलती है

इसके अलावा बुखार, बाल झड़ना और फंगल इंफेक्शन जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं। कैट के आहार में टारिन का होना बेहद महत्वपूर्ण है। संतुलित एवं पौष्टिक भोजन के साथ समय-समय पर डीवार्मिंग और वैक्सीनेशन कराया जाना चाहिए। फंगल इंफेक्शन से बचाव के लिए स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।

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