
दिप्ति मुले नईदुनिया, जबलपुर । बदलते दौर में अब कालेज केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि छात्र-छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी तेजी से काम किया जा रहा है।
यही वजह है कि शहर के कालेजों में इन दिनों छात्राएं डिजाइनर हैंडबैग बनाने से लेकर वेब डिजाइनिंग, फूड प्रोसेसिंग, साइबर सिक्योरिटी और डेकोरेटिव आइटम्स तैयार करने जैसी नई-नई स्किल्स सीख रही हैं।
इन कोर्सों का उद्देश्य सिर्फ प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को ऐसा हुनर सिखाना है जिससे वे पढ़ाई पूरी करने के बाद खुद का स्वरोजगार शुरू कर सकें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें।
स्किल डेवलपमेंट कोर्स विद्यार्थियों को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि रोजगार और आत्मनिर्भरता का मार्ग भी दिखा रहे हैं। नई शिक्षा नीति के तहत छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान और हुनर से जोड़ने की यह पहल आने वाले समय में युवाओं को रोजगार तलाशने के बजाय रोजगार देने वाला बनाने में मददगार साबित हो सकती है।
मानकुंवरबाई कॉलेज में इंक्यूबेशन सेंटर के माध्यम से छात्राओं को वेस्ट मटेरियल से डेकोरेटिव सामान बनाना सिखाया जा रहा है। यहां छात्राओं ने बेकार वस्तुओं से बेहद आकर्षक सीनरी और सजावटी आइटम्स तैयार किए हैं।
राधा-कृष्ण, नृत्य करता मोर और ग्रामीण परिवेश जैसी थीम्स पर आधारित डिजाइन विशेष आकर्षण का केंद्र बनीं। इन सीनरी को इस तरह तैयार किया गया है कि इन्हें घरों के लिविंग रूम या ड्राइंग रूम में सजावट के रूप में उपयोग किया जा सके। इस तरह की कला के जरिए छात्राएं घर बैठे अपना छोटा व्यवसाय शुरू कर सकती हैं।
छात्राओं को बेसिक सिलाई, कंप्यूटर और साइबर सिक्योरिटी की भी जानकारी दी जा रही है। मोबाइल और इंटरनेट का उपयोग करते समय किन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए। इससे पहले छात्राओं को पुरानी साड़ियों से सूट, गाउन और पर्दे तैयार करना भी सिखाया गया था।
साइंस कालेज में विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के साथ कई रोजगारपरक कोर्स कराए जा रहे हैं। यहां वेब डिजाइनिंग, टूरिज्म, फूड प्रोसेसिंग और औषधीय पौधों से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कालेज की प्रो. डा. सुनीता शर्मा ने बताया कि छात्रों को वर्मीकंपोस्ट यानी केंचुआ खाद बनाना भी सिखाया जा रहा है। वर्तमान समय में आर्गेनिक खेती और प्राकृतिक खाद की मांग तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में यह क्षेत्र रोजगार की दृष्टि से काफी उपयोगी साबित हो सकता है। इसके अलावा विद्यार्थियों को औषधीय पौधों की पहचान और उनके उपयोग की जानकारी भी दी जा रही है, ताकि भविष्य में वे इस क्षेत्र में बेहतर संभावनाएं तलाश सकें।
शासकीय महिला पालिटेक्निक महाविद्यालय की छात्राएं इन दिनों विभिन्न अवसरों के अनुसार डिजाइनर बैग्स तैयार कर रही हैं। छात्राओं ने अपने हाथों से पोटली बैग, हल्दी और संगीत जैसे आयोजनों के लिए डिजाइनर बैग्स और ट्रेडिशनल एसेसरीज तैयार की हैं।
प्राचार्य डा. नीलम अग्रवाल ने बताया कि छात्राओं ने ब्रोकेट, मिरर वर्क और कसीदाकारी वाले आकर्षक बैग्स बनाए हैं। वर्तमान समय में मैचिंग बैग्स का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है और युवतियां अपनी ड्रेस के अनुसार बैग्स का चयन कर रही हैं। उन्होंने बताया कि फैशन और डिजाइनिंग से जुड़े ये कोर्स छात्राओं के लिए रोजगार का बेहतर माध्यम बन सकते हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद वे घर से ही डिजाइनर बैग्स तैयार कर अपना व्यवसाय शुरू कर सकती हैं।
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