रामकृष्ण डोंगरे, नईदुनिया, रायपुर। अगर आप प्रकृति, विरासत और आस्था का अद्भुत संगम देखना चाहते हैं, तो दक्षिण भारत की यात्रा अवश्य करनी चाहिए। कोयंबटूर की सादगी से आरंभ होकर ऊटी की शीतल वादियों, मैसूर की शाही विरासत, बेंगलुरु की आधुनिक ऊर्जा और तिरुपति बालाजी की गहन आस्था तक हर पड़ाव अपने भीतर अलग रंग समेटे हुए है।
कहीं, प्रकृति मन को सुकून देती है, कहीं इतिहास गौरव का एहसास कराता है, तो कहीं भक्ति आत्मा को स्पर्श कर जाती है। आइए तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की रोमांचक यात्रा पर निकलें।
कोयंबटूर सादगी और सुव्यवस्थित जीवनशैली के लिए जाना जाता है
तमिलनाडु का औद्योगिक शहर कोयंबटूर अपनी सादगी और सुव्यवस्थित जीवनशैली के लिए जाना जाता है। सुबह की हलचल, मंदिरों की घंटियां और सड़क किनारे काफी की खुशबू यात्रा के पहले ही पड़ाव पर दक्षिण भारत का आत्मीय स्वागत महसूस होता है।
कोयंबटूर से ऊटी के रास्ते में 30 किमी की दूरी सद्गुरु जग्गी वासुदेव द्वारा स्थापित ईशा फाउंडेशन एक ध्यान व योग केंद्र है। यह वेल्लियांगिरी पर्वत की तलहटी में स्थित है। यहां 112 फुट की 'आदियोगी' शिव की प्रतिमा और ध्यानलिंग है।
कोयंबटूर से ऊटी का लगभग 100 किमी का सफर मनमोहक नीलगिरि पहाड़ियों, घुमावदार रास्तों और चाय के बागानों के बीच से होकर गुजरता है। नीलगिरी में एक और दो लीटर वाली प्लास्टिक बोतल प्रबंधित इसलिए साथ में रखना मना है।
ऊटी: गार्डन, झील और टाय ट्रेन की यात्रा
सुहावना मौसम, हरियाली और चाय बागानों के कारण ऊटी हिल स्टेशन पर्यटकों व फिल्म निर्माताओं की पसंदीदा जगह रही है। यहां कई मशहूर हिंदी व दक्षिण भारतीय फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। शहर के प्रमुख आकर्षणों में टाय ट्रेन, टी व चाकलेट फैक्ट्री म्यूजियम, बाटनिकल गार्डन, रोज गार्डन, बोटिंग के लिए प्रसिद्ध ऊटी झील है।
वहीं, मैसूर के रास्ते में पाइन फॉरेस्ट व झील, शूटिंग प्वाइंट, पायकारा झील-जलप्रपात, मुदुमलाई व बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान शामिल हैं। सड़क से गुजरते समय उद्यानों में वन्य जीव जैसे हाथी, हिरण, बंदर और और कभी-कभी बाघ देखे जा सकते हैं। ऊटी जाने के लिए फरवरी से जून का समय सबसे अच्छा माना जाता है।
उस समय तापमान 15 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। टाय ट्रेन की 46 किमी की यात्रा के दौरान हरे-भरे चाय के बागान और प्राकृतिक दृश्य आंखों को सुकून देते हैं। इसकी आनलाइन बुकिंग होती है। टिकट 200 से 800 रुपये तक होती है।
देश के भव्य राजमहलों का स्थल है मैसूर
ऊटी से मैसूर शहर की दूरी लगभग 125 किमी है। रास्ते के पर्यटन स्थल की सैर करते हुए आप कनार्टक में प्रवेश करते हो। यहां का मुख्य आकर्षण मैसूर पैलेस देश के सबसे भव्य राजमहलों में गिना जाता है। 1912 में निर्मित यह महल इंडो-सारासेनिक वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है, जिसमें हिंदू, मुस्लिम, राजपूत और गोथिक शैलियों का समावेश है। इसके गुंबद, नक्काशीदार दरवाजे, रंगीन कांच और भव्य दरबार हाल आकर्षण का केंद्र हैं।
दशहरा पर महल लाखों बल्बों से जगमगाता है। वहीं, 13 किमी दूर चामुंडी पहाड़ियों पर स्थित चामुंडेश्वरी मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित है। सात-स्तरीय गोपुरम, विशाल नंदी प्रतिमा और पहाड़ी से दिखता मैसूर का दृश्य श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
तिरुमला पहाड़ियों पर विराजमान भगवान वेंकटेश्वर
इस यात्रा के दौरान अगर आप बेंगलुरु से ट्रेन या फ्लाइट से वापसी की योजना बना रहे हैं, तो बेंगलुरु से लगभग 250 किलोमीटर दूर आंध्र प्रदेश स्थित तिरुपति बालाजी धाम की यात्रा अवश्य करें। शहर से करीब 22 किमी दूर तिरुमला पहाड़ियों पर विराजमान भगवान वेंकटेश्वर का यह विश्वप्रसिद्ध मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।
यहां प्रतिदिन लाखों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं और प्रसिद्ध ‘श्रीवारी लड्डू’ प्रसाद प्राप्त करते हैं। विशेष दर्शन के लिए 300 रुपये का शुल्क तय है, जिसकी बुकिंग लगभग 90 दिन पहले करानी होती है। हालांकि सामान्य दिनों में श्रद्धालु पांच से छह घंटे के भीतर भी दर्शन कर सकते हैं।
ऐसे पहुंचे, यहां रुके
इन सभी शहरों के लिए हवाई, रेल और सड़क तीनों मार्ग उपलब्ध हैं। बेंगलुरु और कोयंबटूर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों से देश के प्रमुख शहरों की नियमित उड़ानें मिलती हैं। तिरुपति का भी अपना एयरपोर्ट है। बड़े शहरों से सीधी ट्रेनें बेंगलुरु, मैसूर और कोयंबटूर तक चलती हैं। राज्यों के बीच वोल्वो व निजी बस सेवाएं भी सुगम विकल्प हैं। सभी शहरों में अलग-अलग बजट में होटल उपलब्ध है।