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नौवीं के बाद छूटी पढ़ाई, 40 हजार रुपये से शुरू किया कारोबार; आज दे रहे हैं रोजगार

स्वास्थ्य में कुछ सुधार आने के बाद आशीष ने यह तय किया कि वह अपने पैरों पर खड़े होकर परिवार का सहारा बनेंगे। इसी सोच के साथ उन्होंने शुरुआत में कुछ समय...और पढ़ें

By Ramkrishan paramhans pandeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Mon, 13 Jul 2026 10:15:11 AM (IST)Updated Date: Mon, 13 Jul 2026 10:15:11 AM (IST)
नौवीं के बाद छूटी पढ़ाई, 40 हजार रुपये से शुरू किया कारोबार; आज दे रहे हैं रोजगार
शुरुआत में कुछ समय तक छोटे स्तर पर व्यापारिक गतिविधियों से जुड़कर कामकाज की बारीकियां सीखीं।

HighLights

  1. आर्थिक रूप से कमजोर था परिवार
  2. आशीष के लिए दौर बेहद चुनौतीपूर्ण था
  3. दुर्घटना ने रोकी पढ़ाई, हौसले ने बदली जिंदगी

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। स्कूल के दिनों में हुई एक गंभीर दुर्घटना ने आशीष यादव की जिंदगी की दिशा बदल दी। अमखेरा रोड निवासी आशीष पढ़ाई में रुचि रखते थे और बेहतर भविष्य का सपना देखते थे, लेकिन एक हादसे में उनके पैर में गंभीर चोट लग गई।

कक्षा नौवीं तक ही शिक्षा प्राप्त कर सके

लंबे समय तक उपचार चलने और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण उनकी पढ़ाई बीच में ही रुक गई। वह केवल कक्षा नौवीं तक ही शिक्षा प्राप्त कर सके।

हार मानने के बजाय आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया

आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले आशीष के लिए यह दौर बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया।

पिता गांव में कृषि भूमि पर खेती-बाड़ी करते हैं

आशीष के पिता गांव में रहकर छोटी-सी कृषि भूमि पर खेती-बाड़ी करते हैं। परिवार की सीमित आय के बीच आगे की पढ़ाई और रोजगार दोनों ही कठिन नजर आ रहे थे।

व्यवसाय संचालन के अनुभव हासिल किए

स्वास्थ्य में कुछ सुधार आने के बाद आशीष ने यह तय किया कि वह अपने पैरों पर खड़े होकर परिवार का सहारा बनेंगे। शुरुआत में कुछ समय तक छोटे स्तर पर व्यापारिक गतिविधियों से जुड़कर कामकाज की बारीकियां सीखीं। ग्राहकों की जरूरत, बाजार की मांग और व्यवसाय संचालन के अनुभव हासिल किए।


एक छोटी-सी चाय की दुकान शुरू की

कुछ समय बाद उन्होंने स्वयं का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। अपनी वर्षों की बचत और घर से मिली थोड़ी आर्थिक सहायता को जोड़कर करीब 40 हजार रुपये की पूंजी से एक छोटी-सी चाय की दुकान शुरू की।

दुकान पर ग्राहकों की संख्या बहुत कम थी

शुरुआत में दुकान पर ग्राहकों की संख्या बहुत कम थी। दुकान का पूरा संचालन, चाय बनाना, ग्राहकों की सेवा और हिसाब-किताब तक का काम आशीष स्वयं ही संभालते थे।

कम आमदनी के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी

सीमित संसाधनों और कम आमदनी के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। उनका विश्वास था कि ईमानदारी, गुणवत्ता और मेहनत से एक दिन सफलता जरूर मिलेगी।

धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाने लगी

ग्राहकों ने उनकी चाय की गुणवत्ता और व्यवहार को पसंद करना शुरू किया। नियमित ग्राहकों की संख्या बढ़ती गई और दुकान की पहचान बनने लगी। व्यवसाय धीरे-धीरे स्थिर होने लगा और आय में भी सुधार आने लगा। लेकिन सफलता की राह अभी भी आसान नहीं थी।

शारीरिक परेशानी के कारण व्यापार प्रभावित

व्यवसाय शुरू होने के लगभग तीन वर्ष बाद आशीष को एक बार फिर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा। शारीरिक परेशानी के कारण कुछ समय तक व्यापार प्रभावित हुआ और आर्थिक चुनौतियां भी सामने आईं।

व्यवसाय संभाले रखा और लगातार मेहनत करते रहे

अपने हौसले कमजोर नहीं पड़ने दिए। इलाज के साथ-साथ उन्होंने अपने व्यवसाय को भी संभाले रखा और लगातार मेहनत करते रहे। उनका मानना था कि कठिन परिस्थितियां इंसान की परीक्षा लेती हैं और जो उनका सामना करता है, वही आगे बढ़ता है।

पांच वर्षों के भीतर व्यवसाय में बदल गई

लगातार संघर्ष और मेहनत का परिणाम यह हुआ कि पांच वर्षों के भीतर उनकी छोटी-सी चाय की दुकान एक स्थापित व्यवसाय में बदल गई। आज उनकी दुकान पर पहले की तुलना में कई गुना अधिक ग्राहक पहुंचते हैं।

किसी अन्य परिवार की आजीविका भी जुड़ गई

बढ़ते काम को देखते हुए उन्होंने एक अन्य व्यक्ति को भी रोजगार उपलब्ध कराया है, जिससे किसी अन्य परिवार की आजीविका भी जुड़ गई है। यह उनके लिए केवल आर्थिक सफलता नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का भी माध्यम बन गया है।

और आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं

आशीष यादव अब अपने व्यवसाय को और आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। उनका लक्ष्य चाय की दुकान के साथ एक व्यवस्थित डेली नीड्स प्रतिष्ठान स्थापित करना है, जहां रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध हों।

आय बढ़ने के साथ रोजगार के अवसर मिलेंगे

उनका मानना है कि व्यवसाय का विस्तार होने से न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि और लोगों को भी रोजगार के अवसर मिलेंगे।

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