डिजिटल युग में भी रेडियो के दीवाने, झाबुआ में आज भी बरकरार है दशकों पुरानी परंपरा
जहां एक ओर दुनिया सोशल मीडिया, मोबाइल एप और व्हॉट्सएप में व्यस्त है, वहीं गांव के दो लोग आज भी रेडियो की पुरानी परंपरा को जीवित रखे हुए हैं।
Publish Date: Fri, 29 May 2026 01:27:55 PM (IST)Updated Date: Fri, 29 May 2026 01:27:55 PM (IST)
झाबुआ में आज भी रेडियो की दीवानगी कायम है। (नईदुनिया प्रतिनिधि)HighLights
- झाबुआ जिले के रायपुरिया गांव में आज भी रेडियो का जादू कायम है
- गांव के दो लोग आज भी रेडियो की परंपरा को पूरी आत्मीयता के साथ जीवित रखे हुए हैं
- लगभग 40 वर्षों से रेडियो की मधुर आवाज यहां की दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनी हुई है
नईदुनिया न्यूज, पेटलावद - रायपुरिया। जिले के रायपुरिया गांव में आज के हाई-टेक दौर और मनोरंजन के अनगिनत साधनों के बीच भी रेडियो का जादू आज तक कायम है। जहां एक ओर दुनिया सोशल मीडिया, मोबाइल एप और व्हॉट्सएप की तेज रफ्तार खबरों में व्यस्त है, वहीं गांव के दो लोग आज भी रेडियो की पुरानी परंपरा को पूरी आत्मीयता के साथ जीवित रखे हुए हैं। बीते लगभग 40 वर्षों से रेडियो की मधुर आवाज यहां की दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनी हुई है।
सुबह के ठीक छह बजते ही रायपुरिया की फिजाओं में रेडियो की तरंगें गूंजने लगती हैं। गांव में गैराज की दुकान संचालित करने वाले दयाल भाई सांखला प्रतिदिन सुबह अपने रेडियो को ऑन कर दिन की शुरुआत करते हैं। उनका कहना है कि समय भले बदल गया हो, लेकिन रेडियो पर समाचार, गीत और विभिन्न कार्यक्रम सुनने का जो आनंद मिलता है, वह आधुनिक डिजिटल माध्यमों में महसूस नहीं होता। वर्षों से चली आ रही इस आदत ने रेडियो को उनके जीवन का अहम हिस्सा बना दिया है। वे बताते हैं कि रेडियो के बिना अब उनका दिन अधूरा सा लगता है।
रेडियो प्रेम आज भी वैसा ही बना हुआ है
इसी गांव में पान की दुकान संचालित करने वाले श्रेणिक जैन भी रेडियो के उतने ही बड़े शौकीन हैं। तकनीक की चकाचौंध और स्मार्टफोन के बढ़ते प्रभाव के बावजूद उनका रेडियो प्रेम आज भी वैसा ही बना हुआ है। दोनों का यह लगाव इस बात का उदाहरण है कि कुछ परंपराएं समय के बदलाव के बावजूद लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाए रखती हैं।
रायपुरिया गांव में आज ये दोनों लोग उस दौर की यादों को संजोए हुए हैं, जब रेडियो ही मनोरंजन, जानकारी और समाचार का सबसे बड़ा माध्यम हुआ करता था। रेडियो पर प्रसारित होने वाले समाचार, भजन, गीत-संगीत और विविध कार्यक्रमों की सादगी आज भी इन्हें सुकून देती है। तकनीक की भीड़भाड़ और डिजिटल दुनिया की भागदौड़ के बीच रेडियो इनके लिए आज भी आत्मीयता, शांति और अपनत्व का एहसास कराने वाला सबसे प्रिय साथी बना हुआ है।