
लाइफस्टाइल डेस्क: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी युद्ध और तनाव का प्रभाव अब स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। नईदुनिया के विमर्श कार्यक्रम में जबलपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स के उपाध्यक्ष हिमांशु खरे ने कहा कि मौजूदा हालात का असर आने वाले एक से दो वर्षों तक बना रहेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही युद्ध जल्द समाप्त हो जाए, लेकिन इसके आर्थिक प्रभाव लंबे समय तक महसूस किए जाएंगे। इसका सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर महंगाई के रूप में पड़ेगा, जबकि व्यापारी और उद्योगपति बढ़ती लागत और अनिश्चित बाजार से जूझेंगे।
जबलपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स के उपाध्यक्ष हिमांशु खरे ने बताया कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव का असर भारत के बाजार पर सीधे तौर पर पड़ रहा है। LPG, पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel) समेत आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। कच्चे और तैयार माल दोनों की कीमतों में तेजी आई है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है और उद्योगों पर दबाव बढ़ रहा है।
जिले में कई उद्योग अब सप्ताह में सात दिन की बजाय केवल दो से तीन दिन ही संचालित हो पा रहे हैं। इसका सीधा असर उत्पादन और रोजगार पर पड़ रहा है।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो आने वाले समय में उद्योग और व्यापार के सामने और बड़ी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
इस संकट के बीच डिफेंस सेक्टर को लाभ मिल रहा है। जबलपुर, जो रक्षा उत्पादन के लिए पहले से जाना जाता है, वहां की इकाइयों की मांग बढ़ी है।
शहर में करीब 24 इकाइयां रक्षा कारखानों को कच्चा माल उपलब्ध कराती हैं। इनसे जुड़े उद्यमियों को बेहतर कीमत मिल रही है और उनका कामकाज अपेक्षाकृत सुचारू रूप से चल रहा है।
युद्ध के कारण डॉलर की कीमत में बढ़ोतरी हुई है, जिससे निर्यात प्रभावित हुआ है। वहीं आयात महंगा होने से व्यापार संतुलन पर भी दबाव बढ़ गया है।
हिमांशु खरे ने आम लोगों को सलाह दी कि यह समय खर्च करने का नहीं, बल्कि बचत करने का है। उन्होंने चेतावनी दी कि आगामी चुनावों के बाद पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कीमतों में वृद्धि संभव है।
जबलपुर में होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर भी इस स्थिति का असर साफ नजर आ रहा है। पिछले एक वर्ष में शहर में एक दर्जन से अधिक बड़े होटल खुले हैं, लेकिन मौजूदा हालात के कारण उनके संचालन में कठिनाइयां आ रही हैं।
LPG की कमी के कारण कई होटलों के रेस्टोरेंट बंद पड़े हैं। पर्यटकों की संख्या में गिरावट आई है और आयोजनों में भी कमी देखी जा रही है। जो आयोजन हो रहे हैं, उनकी लागत पहले की तुलना में काफी बढ़ गई है। कई होटलों ने स्थिति को देखते हुए अपने मेन्यू में भी बदलाव किया है।