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नईदुनिया, ग्वालियर। भाई बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व जैसे जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे वैसे शहर के बाजारों में राखी की खरीदारी को लेकर भारी रौनक देखने को मिल रही है। इस बार रक्षाबंधन के बाजार में पारंपरिक रेशमी धागों के साथ साथ नवाचार का जबरदस्त तड़का लगा है। युवा पीढ़ी जहां पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाली ईको फ्रेंडली और सीड राखियों को पहली पसंद बना रही है। वहीं दूसरी ओर प्रीमियम और ट्रेंडी लुक के लिए सिल्वर तथा अमेरिकन डायमंड स्टोन राखियों की मांग में जबरदस्त उछाल आया है।
स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, ग्राहकों की बदलती सोच और प्राथमिकताओं ने इस बार रक्षाबंधन के बाजार को एक नया और आधुनिक रूप दे दिया है।
पर्यावरण के प्रति युवाओं की बढ़ती जागरूकता के कारण इस बार बाजार में सीड राखियों (Seed Rakhis) की मांग है। ये राखियां पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल सामग्री से तैयार की जाती हैं। इन राखियों के भीतर तुलसी, टमाटर, मिर्च और विविध फूलों के बीज लगाए जाते हैं। आप त्योहार बीतने के बाद इन्हें गमले या बगीचे की मिट्टी में रोप सकता हैं। यह न केवल कचरा फैलने से रोकता है, बल्कि पवित्र रिश्ते की याद को पौधे के रूप में तक जीवित भी रखता है।
सोने और चांदी की ऊंची कीमतों के बीच प्रीमियम और टिकाऊ विकल्पों के तौर पर अमेरिकन डायमंड स्टोन और स्टर्लिंग सिल्वर से बनी डिजाइनर राखियां बहुत ट्रेंड कर रही है। ये राखियां दिखने में बेहद खूबसूरत और रॉयल लगती हैं। त्योहार बीत जाने के बाद भी भाई इन्हें ब्रेसलेट की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं।
त्योहार के चलते शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों महाराज बाड़ा, टोपी बाजार और नजरबाग मार्केट में खरीदारी के लिए महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। व्यापारियों के मुताबिक, इस बार पारंपरिक डिजाइनों के मुकाबले ट्रेंडी, ईको फ्रेंडली और मल्टी पर्पज राखियों की बिक्री में 40 प्रतिशत से अधिक का इजाफा देखा जा रहा है।
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