
हेल्थ डेस्क, नई दिल्ली। सुबह की चाय हो या बच्चों का दूध, ज्यादातर घरों में दूध रोजाना इस्तेमाल होता है। ऐसे में दूध की शुद्धता को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है। बाजार में मिलने वाले दूध में पानी, स्टार्च, डिटर्जेंट और दूसरे पदार्थों की मिलावट से जुड़े मामले सामने आते रहे हैं।
FSSAI ने कुछ ऐसे शुरुआती टेस्ट बताए हैं, जिनसे घर पर दूध में कुछ तरह की मिलावट का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि, ये टेस्ट दूध को पूरी तरह शुद्ध या सुरक्षित साबित नहीं करते। किसी भी संदेह की पुष्टि के लिए लैब टेस्ट सबसे भरोसेमंद तरीका है।
हालांकि, इस तरीके से दूध की पूरी गुणवत्ता या शुद्धता तय नहीं की जा सकती। इसे केवल प्रारंभिक screening test के तौर पर देखें।
FSSAI के बताए घरेलू परीक्षण में करीब 5-10 मिलीलीटर दूध लेकर उसमें लगभग इतनी ही मात्रा में पानी मिलाकर अच्छी तरह हिलाया जाता है।
अगर दूध में बहुत ज्यादा और घना झाग बनने लगे, तो डिटर्जेंट की मिलावट का संदेह हो सकता है। सामान्य दूध को हिलाने पर भी कुछ झाग बन सकता है, लेकिन वह आमतौर पर पतली होती है।
सिर्फ झाग देखकर मिलावट की पुष्टि नहीं की जा सकती। संदेह होने पर नमूने की लैब में जांच कराना बेहतर है।
स्टार्च की जांच के लिए FSSAI के Eat Right Handbook में आयोडीन टेस्ट का उल्लेख किया गया है। दूध के नमूने में आयोडीन डालने पर अगर उसका रंग नीला हो जाता है, तो यह स्टार्च की मौजूदगी का संकेत माना जाता है। लेकिन यहां सावधानी बेहद जरूरी है। आयोडीन एक रसायन है, इसलिए इसे बच्चों से दूर रखें। जिस दूध पर यह टेस्ट किया गया है, उसे पीना नहीं चाहिए।
दूध में यूरिया की जांच के लिए FSSAI की वैज्ञानिक परीक्षण विधियां मौजूद हैं। इनके तहत कुछ रासायनिक संकेतों के आधार पर added urea की संभावना देखी जाती है और संदिग्ध नमूने को आगे quantitative method से confirm किया जाता है।
इसलिए घर पर खुद रसायनों का इस्तेमाल करके यूरिया की जांच करना उचित नहीं है। यूरिया जैसी मिलावट की पुष्टि के लिए लैब टेस्ट कराना सुरक्षित और बेहतर विकल्प है।
FSSAI की testing methods में दूध में पानी, स्टार्च, यूरिया, डिटर्जेंट और दूसरे पदार्थों से जुड़ी मिलावट की जांच के तरीके दिए गए हैं। FSSAI के अनुसार synthetic milk में यूरिया, laundry detergent, pulverized soap, boric acid, hydrogen peroxide, starch और कुछ neutralizers जैसे पदार्थ पाए जाने की जांच की जाती है।
मिलावट से होने वाला नुकसान इस बात पर निर्भर करता है कि दूध में कौन सा पदार्थ और कितनी मात्रा में मौजूद है। डिटर्जेंट और साबुन खाने-पीने के लिए बनाए नहीं जाते। इन्हें शरीर में जाने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी तरह अनुचित रसायनों की मौजूदगी से पाचन संबंधी परेशानी और दूसरे विषाक्त प्रभाव हो सकते हैं।
इसके अलावा दूध अगर बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी या हानिकारक रसायनों से दूषित है, तो वह खाद्य जनित बीमारी का कारण बन सकता है। WHO के मुताबिक असुरक्षित भोजन 200 से ज्यादा तरह की बीमारियों से जुड़ा हो सकता है।
बच्चों, बुजुर्गों और पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं वाले लोगों के मामले में food safety पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
दूध की गुणवत्ता केवल इस बात से तय नहीं होती कि उसमें कोई मिलावट है या नहीं। फैट, SNF, माइक्रोबायोलॉजिकल सेफ्टी और दूसरे गुणवत्ता मानक भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए घर पर किए गए टेस्ट को केवल शुरुआती संकेत समझें। अगर किसी दूध की गुणवत्ता पर लगातार संदेह है, तो उसका नमूना अधिकृत/नोटिफाइड फूड लैब में जांच के लिए दिया जा सकता है।
सोशल मीडिया पर दूध की मिलावट और उससे होने वाली बीमारियों को लेकर कई डरावने दावे वायरल होते रहते हैं। ऐसे दावों को बिना जांचे आगे बढ़ाने से बचें। उदाहरण के लिए, अगस्त 2026 में WHO ने भारत में दूध की मिलावट से 2035 तक 87 प्रतिशत लोगों को कैंसर होने की कथित WHO advisory को फर्जी बताया था।
इसलिए किसी भी वायरल हेल्थ दावे को शेयर करने से पहले WHO, FSSAI या संबंधित आधिकारिक संस्था की वेबसाइट पर उसकी पुष्टि करना जरूरी है।
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