
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर में अब कैफे कल्चर तेजी से बदल रहा है। पहले जहां कैफे केवल काफी या स्नैक्स का आनंद लेने की जगह समझे जाते थे, लेकिन बीते कुछ वर्षों में कैफे के मायने बदल चुके हैं। अब यहां पॉडकास्ट रिकॉर्ड हो रहे हैं, स्टार्टअप की मीटिंग हो रही हैं, ओपन माइक नाइट्स में नए कलाकार अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं और बुक रीडिंग से लेकर बर्थडे पार्टी तक सब कुछ एक ही जगह आयोजित किया जा रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में इंदौर के कैफे का माहौल पूरी तरह बदल चुका है। अब लोग यहां अपने आइडिया शेयर करने, नेटवर्किंग करने, कंटेंट बनाने और छोटे-छोटे इवेंट आयोजित करने भी पहुंच रहे हैं। यही वजह है कि कैफे संचालकों के लिए भी कमाई के नए रास्ते खुल गए हैं।
इन नई गतिविधियों के पीछे सबसे बड़ा बदलाव कैफे के इंटीरियर में देखने को मिल रहा है। दीवारों पर आर्टवर्क, इंस्टाग्राम-फ्रेंडली सेल्फी कार्नर, थीम बेस्ड डिजाइन, लाइव आर्ट वाल और ओपन माइक के लिए छोटा स्टेज तैयार किए जा रहे हैं। कई कैफे में अलग-अलग तरह की बैठने की व्यवस्था भी बनाई गई है, ताकि मीटिंग, इवेंट और कंटेंट शूट आसानी से हो सकें।
इंटीरियर डिजाइनर मोहित तलरेजा के अनुसार कैफे के आकर्षक और आधुनिक इंटीरियर पर पांच लाख से 10 लाख रुपये तक खर्च किया जा रहा है। इस बजट में सुंदर बैठने की व्यवस्था, आकर्षक लाइटिंग, दीवारों की सजावट, फर्नीचर, रंग संयोजन और इंस्टाग्राम-फ्रेंडली कार्नर जैसी सुविधाएं शामिल होती हैं।
यदि कैफे को पूरी तरह किसी विशेष थीम पर विकसित किया जाए या उसमें पॉडकास्ट स्टूडियो, फोटो स्टूडियो, लाइव म्यूजिक एरिया अथवा कंटेंट क्रिएशन जैसी आधुनिक सुविधाएं जोड़ी जाए तो इसकी लागत 20 लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंच सकती है।
कैफे संचालक भास्कर सोनी बताते हैं कि आज यूट्यूब, इंस्टाग्राम और पॉडकास्ट का दौर है। ऐसे में कई कंटेंट क्रिएटर्स अपने वीडियो और पॉडकास्ट रिकॉर्ड करने के लिए कैफे का रुख कर रहे हैं। कुछ कैफे ने इसके लिए विशेष पैकेज भी शुरू किए हैं, जिससे क्रिएटर्स को अलग से स्टूडियो किराये पर लेने की जरूरत नहीं पड़ती।
पॉडकास्ट और वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए सेमी-स्टूडियो स्पेस तैयार किए गए हैं। इससे कंटेंट क्रिएटर्स कम खर्च में बेहतर लोकेशन और माहौल का इस्तेमाल कर पा रहे हैं।
इंदौर तेजी से स्टार्टअप हब के रूप में भी पहचान बना रहा है। ऐसे में कई युवा उद्यमी अब पारंपरिक कॉन्फ्रेंस रूम की बजाय कैफे में टीम मीटिंग और क्लाइंट डिस्कशन करना पसंद कर रहे हैं। कैफे संचालक अंशुल ठाकुर का कहना है कि अब कैफे सिर्फ खाने-पीने की जगह के साथ बल्कि मल्टी-यूटिलिटी स्पेस भी बनाए जा रहे हैं, जहां एक ही दिन में मीटिंग, पॉडकास्ट, लाइव म्यूजिक और पार्टी जैसे अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।
इसके साथ ही कैफे क्रिएटिविटी प्लेटफार्म के रूप में भी तैयार किए जा रहे हैं। जहां ओपन माइक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसके साथ ही स्टोरीटेलिंग और बुक डिस्कशन जैसी एक्टिविटी भी आयोजित की जा रही है।
कैफे संचालकों के लिए भी यह बदलाव फायदेमंद साबित हो रहा है। पहले उनकी आमदनी मुख्य रूप से खाने-पीने की बिक्री पर निर्भर थी, लेकिन अब स्पेस रेंटल, इवेंट होस्टिंग, पॉडकास्ट रिकॉर्डिंग, कंटेंट शूट और प्राइवेट पार्टी जैसी सेवाओं से अतिरिक्त आय हो रही है।
कैफे संचालक सौरभ यादव बताते हैं कि वीकेंड पर पार्टी बुकिंग और ओपन माइक जैसे कार्यक्रम उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा बन गए हैं। वहीं, वीकैंड में छोटी मीटिंग और पॉडकास्ट रिकॉर्डिंग से नियमित आय बनी रहती है।