
लाइफस्टाइल डेस्क। तेज रफ्तार जिंदगी, कामकाज की बढ़ती व्यस्तता और मोबाइल स्क्रीन में सिमटते रिश्तों के दौर में भी शहर के कई परिवार ऐसे हैं, जो अपनों के साथ बिताए हर पल को सबसे अधिक महत्व दे रहे हैं। आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों के बावजूद ये परिवार रिश्तों की मिठास और पारिवारिक मूल्यों को बचाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

इंटरनेशनल फैमिली डे (International Family Day 2026) के अवसर पर शहर के परिवारों ने बताया कि तकनीक और व्यस्त दिनचर्या के बावजूद वे परिवार के साथ समय बिताने की परंपरा को बनाए हुए हैं। परिवारों का मानना है कि साथ बैठकर भोजन करना, छुट्टियों में समय बिताना और हर छोटे-बड़े फैसले में अपनों को शामिल करना रिश्तों को मजबूत बनाए रखता है। उनके अनुसार परिवार केवल साथ रहने का नाम नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव, सहयोग और समझ का सबसे मजबूत आधार है।
परिवारों का कहना है कि मोबाइल और सोशल मीडिया से कुछ समय दूर रहकर अपनों के साथ बिताए गए पल रिश्तों में नई ऊर्जा भरते हैं। उनके मुताबिक जीवन की सबसे बड़ी खुशी और असली संपत्ति परिवार का साथ ही है।
शहर के परिहार परिवार ने रिश्तों को मजबूत बनाए रखने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि उनका चार भाइयों का संयुक्त परिवार एक साथ रहता है और सभी सदस्य प्रेम व आपसी सामंजस्य के साथ जीवन जी रहे हैं।
परिवार की सबसे खास बात यह है कि घर पहुंचने के बाद सभी सदस्य अपने मोबाइल एक डिब्बे में रख देते हैं। यह मोबाइल अगले दिन सुबह छह बजे ही वापस मिलते हैं। इस दौरान परिवार के सभी सदस्य साथ बैठकर बातचीत करते हैं, दिनभर की गतिविधियां साझा करते हैं और एक-दूसरे के साथ समय बिताते हैं।
परिवार ने बताया कि जरूरत पड़ने पर संपर्क बनाए रखने के लिए घर के हर फ्लोर पर लैंडलाइन फोन की व्यवस्था की गई है, ताकि मोबाइल के अत्यधिक उपयोग का असर रिश्तों पर न पड़े। उनका मानना है कि इसी वजह से परिवार के सदस्यों के बीच आज भी गहरा अपनापन और स्नेह बना हुआ है।
परिवार के अनुसार संयुक्त परिवार बच्चों के लिए संस्कारों की पाठशाला होता है। यहां उन्हें बड़ों का सम्मान, सहयोग और रिश्तों की अहमियत समझने का अवसर मिलता है। घर की महिलाएं मिल-जुलकर भोजन तैयार करती हैं और पूरा परिवार एक साथ बैठकर भोजन करता है, जिससे रिश्तों में मिठास और बढ़ती है। परिवार के सदस्य कहते हैं कि उनके घर में हर दिन किसी उत्सव जैसा महसूस होता है।
हनुमानताल निवासी जैन परिवार भी संयुक्त परिवार की परंपरा को आज तक निभा रहा है। परिवार का कहना है कि बड़े परिवार के साथ रहने की खुशी और अपनापन जीवन को खास बना देता है।
परिवार के सदस्य बताते हैं कि दिनभर सभी अपने-अपने कार्यों में व्यस्त रहते हैं, लेकिन शाम का समय केवल परिवार के लिए तय होता है। इसी दौरान सभी सदस्य एक साथ बैठते हैं, दिनभर के अनुभव साझा करते हैं और साथ भोजन कर रिश्तों की गर्माहट को बनाए रखते हैं।
जैन परिवार का मानना है कि संयुक्त परिवार की सबसे बड़ी खूबी यह है कि छोटी-छोटी खुशियां भी उत्सव जैसी लगती हैं। जन्मदिन, त्योहार या परिवार के किसी सदस्य की छोटी उपलब्धि को भी सभी मिलकर यादगार बना देते हैं।
परिवार के बड़े सदस्य बच्चों को संस्कार और एकता का महत्व सिखाते हैं, जबकि युवा पीढ़ी बुजुर्गों का सम्मान और उनकी भावनाओं की कद्र करती है। परिवार के अनुसार एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहना ही रिश्तों की असली मजबूती है। यही प्रेम, विश्वास और सहयोग उनके परिवार को मजबूती से जोड़े हुए है। जैन परिवार में आज भी तीन पीढ़ियां साथ मिलकर रह रही हैं।