
आशीष मिश्रा, नईदुनिया, छिंदवाड़ा। मप्र के टूरिज्म मैप पर तामिया का यह छोटा सा गांव अब पर्यटकों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है।
जिला मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह पर्यटन ग्राम चारों ओर से हरी-भरी पहाड़ियों और प्राकृतिक वादियों से घिरा हुआ है।
मानसून के दिनों में यहां की खूबसूरती चरम पर होती है। झरनों की कल-कल बहती आवाज, बादलों से घिरे पहाड़ और चारों तरफ फैली हरियाली पर्यटकों का मन मोह लेती है।
काजरा गांव की सबसे खास बात यह है कि यह मंधान डैम के शांत बैकवाटर के समीप स्थित है। यहां का शांत जल और उस पर तैरती नावें पर्यटकों को नौकाविहार (बोटिंग) का एक यादगार अनुभव देती हैं।
इस शांत वातावरण में सुबह का मनमोहक सूर्योदय और शाम को ढलता सूरज (सूर्यास्त) यहाँ की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से सैलानी खिंचे चले आते हैं।
पर्यटकों को आधुनिक सुख-सुविधाओं के साथ-साथ पारंपरिक जीवन का अहसास कराने के लिए गांव में बेहतरीन होमस्टे विकसित किए गए हैं। इन होमस्टे की बालकनी से पहाड़ों, लहलहाते खेतों और प्रकृति के अद्भुत नजारे सीधे दिखाई देते हैं।
काजरा सिर्फ प्राकृतिक पर्यटन ही नहीं, बल्कि समृद्ध ग्रामीण संस्कृति की भी मिसाल है। यहां आज भी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद पारंपरिक मोटे अनाजों जैसे कुटकी, समा, जगनी, मक्का, ज्वार और धान की जैविक खेती की जाती है। यहां आने वाले सैलानी इन गतिविधियों का हिस्सा बन सकते हैं
पारंपरिक लोकनृत्य और सांस्कृतिक संध्या का आनंद, हाथ से चलने वाली चक्की से अनाज पीसने का ग्रामीण अनुभव और धूल-मिट्टी और प्रदूषण से दूर बैलगाड़ी की सवारी आकर्षण का केंद्र है।
काजरा की भौगोलिक स्थिति इसे और भी खास बनाती है। यह प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पातालकोट, तामिया हिल स्टेशन और छोटा महादेव के बेहद करीब स्थित है। ऐसे में पर्यटक एक ही ट्रिप में इन सभी प्रमुख और रमणीय स्थलों का आसानी से आनंद ले सकते हैं।
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