
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर।कहते हैं कि आंखें आत्मा की खिड़की होती हैं, लेकिन अगर आप किसी के व्यक्तित्व को सचमुच जानना चाहते हैं, तो उनकी मुस्कान देखिए। चमकदार दांतों की एक प्यारी सी मुस्कान पहली मुलाकात में ही अच्छा प्रभाव डालती है, जबकि होंठों को दबाकर मुस्कुराना या मुंह से दुर्गंध आना इसका ठीक उल्टा असर करता है।
अत: सामान्य रूप से दिन में दो बार, दो मिनट तक अपने दांतों को ब्रश करें। रात में सोने से पहले जरूर दांतों को ब्रश करना चाहिए। इससे आपके दांत स्वस्थ रहेंगे। मुलायम ब्रिसल वाले टूथब्रश और अच्छे टूथपेस्ट से दांतों को ब्रश करने से मुंह में मौजूद भोजन के कण और बैक्टीरिया साफ हो जाते हैं।
ब्रश करने से वे कण भी धुल जाते हैं जो दांतों को नुकसान पहुंचाते हैं और कैविटी का कारण बनते हैं। यह भी महत्वपूर्ण है कि यदि अधिक समय तक ब्रश करते हैं, तो दांतों की रक्षा करने वाली इनेमल परत घिस सकती है। इसलिए जरूरी है दांतों की सेहत का ख्याल रखें। प्रयास करें कि हर छह माह में एक बार विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श जरूर लें। यह दांत से जुड़े विभिन्न रोगों से बचाव में सहायक है।
इससे फर्क नहीं पड़ता कि पेस्ट कौन सा उपयोग कर रहे हैं। सबसे जरूरी है दांतों की सफाई, नियमित रूप से दांतों की सफाई उसे सेहतमंद बनाने में मददगार हैं। दांतों की गंदगी समस्या का कारण बनती है। ठंडा-गर्म लगने पर सेंसिविटी वाला पेस्ट उपयोग किया जा सकता है। लेकिन ठीक होने पर उपयोग बंद कर देना चाहिए। वैसे उपयोग से पहले एक बार चिकित्सकीय परामर्श बेहतर है।
दांतों का असमय पीला पड़ना अनेक कारणों से संभव है। यह पूरी तरह अनेक बार ठीक नहीं होते, हां यह जरूर है कि दांतों को सफेद करने के लिए, नियमित रूप से मौखिक स्वच्छता की दिनचर्या बनाए रखें।
दांत में दर्द कई कारणों से हो सकता है। मसूड़ों में खाना फंस जाना, दांत टूट जाना या जीवाणु संक्रमण। मसूड़ों में अस्थायी जलन भी कभी-कभी दांत दर्द का कारण बन सकती है। लेकिन गंभीर दांत दर्द के लिए डॉक्टर से इलाज करवाना जरूरी है।
वैसे कैविटी की समस्या बच्चों में आम होती जा रही है। कुरकुरे, चिप्स दांतों में चिपके रह जाते हैं जो सड़न का कारण बनते हैं। आगे समस्या न हो इसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सक से आपको परामर्श लेना चाहिए।
यह भी पढ़ें- जोर से खर्राटे लेना हो सकता है स्लिप एपनिया के लक्षण, एक्पर्ट से जानें इलाज और बचाव