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क्या आपका बच्चा भी ओवरवेट है? हो सकती है न्यूट्रिएंट्स की कमी… माता-पिता को इसे समझना जरूरी

बच्चे का वजन ज्यादा होने का अर्थ यह नहीं है कि उसे पूरा न्यूट्रिएंट्स मिल रहा है। इसका मतलब यह भी हो सकता है कि बच्चें 'कुन्यूट्रिएंट्स के दोहरे बोझ' ...और पढ़ें

By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Sat, 05 Sep 2026 09:37:57 AM (IST)Updated Date: Sat, 05 Sep 2026 10:17:28 AM (IST)
क्या आपका बच्चा भी ओवरवेट है? हो सकती है न्यूट्रिएंट्स की कमी… माता-पिता को इसे समझना जरूरी
ओवरवेट बच्चों में खान-पान के कारण होने वाले 'कुन्यूट्रिएंट्स' को समझना जरूरी। (AI जनरेटेड)

HighLights

  1. ओवरवेट बच्चों में भी विटामिन्स-मिनरल्स की कमी हो सकती है
  2. जंक फूड, स्नैक्स और मीठे ड्रिंक्स बच्चों में वजन तेजी से बढ़ाते हैं
  3. केवल BMI या वजन देखने के बजाय बच्चे को संतुलित आहार दें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बच्चे का वजन ज्यादा होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उसे सही न्यूट्रिएंट्स मिल रहे हैं। आजकल बच्चों में बढ़ता मोटापा (Childhood Obesity) अक्सर अस्वास्थ्यकर और अत्यधिक कैलोरी वाले खान-पान से जुड़ा होता है। इसका सीधा अर्थ है कि बच्चे जरूरत से ज्यादा कैलोरी तो ले रहे हैं, लेकिन उनके शरीर को विकास के लिए जरूरी विटामिन और मिनरल्स नहीं मिल पा रहे हैं।

हेल्थ एक्सपर्ट्स इसे 'कुन्यूट्रिएंट्स का दोहरा बोझ' (Double Burden of Malnutrition) कहते हैं, जहां शरीर में वजन ज्यादा होता है और न्यूट्रिएंट्स की कमी भी होती है। तेजी से बढ़ते बच्चों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।

ज्यादा कैलोरी का मतलब बेहतर न्यूट्रिएंट्स नहीं

बच्चों के सही शारीरिक और मानसिक विकास के लिए प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और हेल्दी फैट्स (मैक्रोन्यूट्रिएंट्स) के साथ-साथ आयरन, कैल्शियम, विटामिन D, जिंक, विटामिन B12 और फोलेट जैसे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स बेहद जरूरी हैं।

केवल भोजन की मात्रा ज्यादा होना न्यूट्रिएंट्स की गारंटी नहीं है। उदाहरण के लिए-

  • जंक फूड व प्रोसेस्ड डाइट: मीठे ड्रिंक्स, पैकेज्ड स्नैक्स, कैंडी, तली-भुनी चीजें और रिफाइंड कार्ब्स में कैलोरी तो बहुत अधिक होती है, लेकिन फाइबर और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स न के बराबर होते हैं।
  • नुकसान: इससे बच्चों का वजन तो तेजी से बढ़ता है, लेकिन उनकी इम्युनिटी, हड्डियों की मजबूती, खून के निर्माण और दिमाग के विकास के लिए जरूरी तत्व नहीं मिल पाते। इसलिए केवल वजन या BMI देखकर बच्चे के स्वास्थ्य का अंदाजा लगाना सही नहीं है।

खान-पान की गलत आदतें कैसे बढ़ाती हैं न्यूट्रिशनल गैप?

बचपन में मोटापे की मुख्य वजह खाने की मात्रा से ज्यादा 'भोजन का चुनाव' होती है-

  • अनहेल्दी विकल्प: बच्चे अक्सर आसानी से मिलने वाले और स्वादिष्ट लगने वाले भोजन को चुनते हैं, जिनमें चीनी, सोडियम (नमक) और अनहेल्दी फैट ज्यादा होता है।
  • ब्रेकफास्ट स्किप करना व कोल्ड ड्रिंक्स: संतुलित नाश्ता न करने से दिनभर में ज्यादा कैलोरी खाने की संभावना बढ़ती है। दूध या पानी की जगह सोडा और पौष्टिक खाने की जगह रेडी-टू-ईट फूड लेने से शरीर में पोषक तत्वों की भारी कमी हो जाती है।
  • विविधता की कमी: यदि बच्चा हरी सब्जियां, फल, दालें, साबुत अनाज और दूध उत्पाद नहीं खाता, तो उसमें आवश्यक विटामिन्स की कमी होना तय है।

बचपन में सबसे जरूरी पोषक तत्व

  • प्रोटीन: शरीर की वृद्धि, मांसपेशियों के निर्माण और ऊतकों (tissues) की मरम्मत के लिए।
  • कैल्शियम व विटामिन D: मजबूत हड्डियों के सही विकास के लिए।
  • आयरन: हीमोग्लोबिन बनाने, शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने और दिमाग के सही संचालन के लिए।
  • जिंक, विटामिन A, फोलेट व B12: रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity), मेटाबॉलिज्म, रक्त निर्माण और सामान्य विकास के लिए।

मोटापा और पोषक तत्वों की कमी का संबंध

अत्यधिक वजन शरीर की मेटाबॉलिज्म प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है, जिससे कुछ खास पोषक तत्वों का अवशोषण धीमा हो जाता है। उदाहरण के लिए, मोटापे से ग्रसित बच्चों में अक्सर विटामिन D का स्तर कम पाया जाता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि हर ओवरवेट बच्चा कुपोषित ही हो, लेकिन यह हर बच्चे के लिए व्यक्तिगत न्यूट्रिशनल असेसमेंट की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

तराजू के कांटे से आगे देखने की जरूरत

अभिभावकों को केवल वजन नापने के बजाय बच्चे के समग्र स्वास्थ्य और विकास पर ध्यान देना चाहिए-

  • संतुलित थाली: बच्चे के दैनिक आहार में दालें, बीन्स, अंडे, डेयरी प्रोडक्ट्स, हरी सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज और मेवे/बीज (हेल्दी फैट्स) शामिल होने चाहिए।
  • क्रैश डाइटिंग से बचें: ओवरवेट बच्चे को देखकर अचानक उसका खाना बेहद कम न करें या किसी खास खाद्य पदार्थ को पूरी तरह बंद न करें। इससे न्यूट्रिएंट्स की कमी और बढ़ सकती है। भोजन की गुणवत्ता, सही पोर्शन साइज और अच्छी आदतों पर ध्यान दें।

माता-पिता डॉक्टर से सलाह कब लें?

यदि बच्चा ओवरवेट है और उसमें निम्नलिखित लक्षण दिखते हैं, तो बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) से परामर्श लें-

  • लगातार थकान या सुस्ती महसूस होना
  • पढ़ाई में ध्यान केंद्रित न कर पाना
  • बार-बार बीमार पड़ना या कम ऊर्जा होना

डॉक्टर बच्चे की उम्र, लंबाई, जेंडर और ग्रोथ रेट के आधार पर उसकी सही जांच करेंगे और आवश्यकता अनुसार डाइट प्लान या टेस्ट की सलाह देंगे।

बिना किसी हिचकिचाहट के बनाएं स्वस्थ आदतें

बच्चों के वजन को लेकर उन्हें ताने देना या दोषी ठहराना उनके मानसिक स्वास्थ्य और बॉडी इमेज को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बजाय पूरे परिवार को मिलकर एक स्वस्थ माहौल बनाना चाहिए-

  • घर में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराएं।
  • मीठे ड्रिंक्स और जंक फूड को सीमित करें।
  • शारीरिक गतिविधियों (Physical Activity) को बढ़ावा दें।
  • सोने और खाने का एक नियमित समय तय करें।

ध्यान देने वाली बात

एक बच्चा एक ही समय में ओवरवेट और कुपोषित (Malnourished) दोनों हो सकता है। केवल वजन घटाने को अपना लक्ष्य न बनाएं, बल्कि बच्चे का सही विकास और बेहतर न्यूट्रिएंट्स मुख्य उद्देश्य होना चाहिए। सही आहार, नियमित खेलकूद और स्पेशलिस्ट के मार्गदर्शन से बच्चों को एक स्वस्थ और मजबूत भविष्य दिया जा सकता है।