
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर: अब शहरों की तरह गांवों में भी स्वच्छता की नई तस्वीर देखने को मिलेगी। जिला पंचायत द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन और शासकीय भवनों की नियमित सफाई के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान की शुरुआत ग्राम पंचायत सालीवाड़ा गौर से की गई, जहां इसकी सफलता के बाद इसे अब कुंडम क्षेत्र की अन्य ग्राम पंचायतों में भी लागू किया जा रहा है।
इस अभियान के तहत गांवों में घर-घर से कचरा एकत्र करने की व्यवस्थित प्रणाली विकसित की गई है। पंचायत स्तर पर कर्मचारियों की नियुक्ति कर नियमित कचरा संग्रहण सुनिश्चित किया जा रहा है। इससे गांवों में फैली गंदगी को नियंत्रित करने और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि एकत्रित कचरे का केवल निस्तारण ही नहीं किया जाएगा, बल्कि उसका वैज्ञानिक तरीके से पुनः उपयोग (रिसाइक्लिंग) भी किया जाएगा। योजना के तहत कचरे से सीएनजी गैस और ऑर्गेनिक खाद तैयार की जाएगी। इससे जहां एक ओर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायतों के लिए आय के नए स्रोत भी विकसित होंगे।
जिला पंचायत जबलपुर ने इस अभियान के पहले चरण में पांच गांवों को शामिल किया है। इनमें सालीवाड़ा, कुंडम और नटवारा में स्वच्छता अभियान की शुरुआत हो चुकी है। वहीं शहपुरा के ग्राम बेलखेड़ा और मझौली क्षेत्र के एक गांव में आगामी दो महीनों के भीतर इस योजना को लागू किया जाएगा। इस अभियान में ग्राम पंचायतों के साथ सामाजिक संगठनों का भी सहयोग लिया जा रहा है।
जबलपुर मध्यप्रदेश का पहला जिला बन गया है, जहां ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन की शुरुआत की गई है। यह पहल स्वच्छता मिशन के तहत सृष्टि वेस्ट मैनेजमेंट सर्विस, इंदौर के सहयोग से की जा रही है। हालांकि यह मॉडल उज्जैन और जबलपुर दोनों के लिए स्वीकृत था, लेकिन फिलहाल इसकी शुरुआत जबलपुर से की गई है।
पहले गांवों में कचरे को पारंपरिक तरीके से कुंडों में डाला जाता था, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता था। अब नीमखेड़ा में सेग्रिगेशन शेड बनाकर कचरे की छंटाई की जा रही है। गीले और सूखे कचरे को अलग कर वैज्ञानिक तरीके से उसका प्रबंधन किया जा रहा है।
नीमखेड़ा में कचरे से सीएनजी गैस बनाने के लिए प्लांट लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस पहल से न केवल स्वच्छता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आय के अवसर भी बढ़ेंगे।
इस अभियान से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और इसे जनआंदोलन का रूप देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। जिला पंचायत का लक्ष्य है कि इस मॉडल को जल्द ही जिले की अन्य पंचायतों में भी लागू किया जाए।
जिले में पांच गांवों में कचरा कलेक्शन और प्रबंधन का काम शुरू किया जाना है, अभी हमने तीन गांवों में शुरू कर दिया है। आगे चलकर इसमें और गांवों को जोड़ा जाएगा। गांवों से निकलने वाले कचरे के प्रबंधन के लिए सीएनजी प्लांट भी शुरू करने की योजना है। अभी हम गांव स्तर पर ही कचरे का प्रबंधन कर रहे हैं।
-अभिषेक गहलोत, सीईओ, जिला पंचायत