गंभीर संक्रमण में समय पर इलाज मिलने से बच सकती है मरीज की जान
सेप्सिस एक ऐसी गंभीर स्थिति है, जिसमें शरीर संक्रमण के खिलाफ अत्यधिक प्रतिक्रिया देने लगता है। इससे लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं। यदि...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 09 Jun 2026 09:16:42 AM (IST)Updated Date: Tue, 09 Jun 2026 09:16:42 AM (IST)
समय पर विशेषज्ञ की निगरानी में उपचार जरूरी। (एआई इमेज)HighLights
- ऐसे मरीजों को सामान्य चिकित्सा से अधिक उन्नत और विशेषज्ञ निगरानी की आवश्यकता होती है
- समय पर उचित उपचार मिलने से मरीज के बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है
- सेप्सिस एक ऐसी गंभीर स्थिति है, जिसमें शरीर संक्रमण के खिलाफ अत्यधिक प्रतिक्रिया देने लगता है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। गंभीर संक्रमण, सेप्सिस, गंभीर निमोनिया, एआरडीसी (एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम) और जटिल सर्जरी के बाद कई मरीजों की स्थिति बेहद नाजुक हो सकती है। ऐसे मरीजों को सामान्य चिकित्सा से अधिक उन्नत और विशेषज्ञ निगरानी की आवश्यकता होती है, जिसे क्रिटिकल केयर कहा जाता है।
यह बात क्रिटिकल केयर मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. युक्तांश पांडेय ने कही। उन्होंने कहा कि समय पर उचित उपचार मिलने से मरीज के बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
समय रहते इलाज न मिले, तो यह मल्टी-आर्गन फेल्योर का कारण बन सकता है
सेप्सिस एक ऐसी गंभीर स्थिति है, जिसमें शरीर संक्रमण के खिलाफ अत्यधिक प्रतिक्रिया देने लगता है। इससे लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं। यदि मरीज को समय रहते इलाज न मिले, तो यह मल्टी-आर्गन फेल्योर का कारण बन सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
मरीज को सांस लेने में कठिनाई होती है
गंभीर निमोनिया और एआरडीसी जैसी स्थितियों में मरीज को सांस लेने में कठिनाई होती है। ऐसे मामलों में वेंटिलेटर सपोर्ट और लगातार निगरानी की आवश्यकता पड़ सकती है। वहीं, लिवर फेल्योर से पीड़ित मरीजों में शरीर की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं प्रभावित हो जाती हैं, जिससे संक्रमण और अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है।
कुछ अत्यंत गंभीर मामलों में ईसीएमओ तकनीक का उपयोग किया जाता है
कुछ अत्यंत गंभीर मामलों में ईसीएमओ (एक्स्ट्राकार्पोरियल मेम्ब्रेन आक्सीजनेशन) तकनीक का उपयोग किया जाता है। यह एक उन्नत लाइफ सपोर्ट सिस्टम है, जो अस्थायी रूप से फेफड़ों और हृदय का काम संभालकर शरीर को पर्याप्त आक्सीजन पहुंचाने में मदद करता है। जब पारंपरिक उपचार पर्याप्त नहीं होते, तब ईसीएमओ मरीज के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकता है।