
नईदुनिया न्यूज, अमरकंटक। भगवान परशुराम जयंती के पावन एवं आध्यात्मिक वातावरण में एक विशेष धार्मिक अनुष्ठार का आयोजन किया गया, जिसमें वैदिक रीति-रिवाजों एवं मंत्रोच्चार के साथ अमजद खान ने सनातन धर्म में पुनः प्रवेश कर रामदास नाम धारण किया। यह आयोजन श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक समरसता का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा। इस अवसर पर नर्मदा मंदिर के पुजारी पंडित उमेश द्विवेदी एवं नंदन द्विवेदी के सान्निध्य में विधिवत पूजा-अर्चना, शुद्धिकरण एवं वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ धर्म वापसी की प्रक्रिया संपन्न कराई गई। संपूर्ण अनुष्ठान वैदिक परंपराओं के अनुरूप संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में शांति कुटी आश्रम के महंत रामभूषण दास महाराज की उपस्थिति रही, जिन्होंने रामदास को गुरु दीक्षा प्रदान की। महंत द्वारा उन्हें गुरु मंत्र भी दिया गया, जिससे उनके आध्यात्मिक जीवन की नई शुरुआत का मार्ग प्रशस्त हुआ। महंत जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि सनातन धर्म सर्वसमावेशी, उदार एवं मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने वाला है। धर्म वापसी के उपरांत अमजद खान का नया नाम रामदास रखा गया। उनकी व्यक्तिगत जानकारी के अनुसार, वे 51 वर्ष के हैं, उनके पिता का नाम मलिक अहमद है तथा माता का नाम लक्ष्मीबाई है। वे इंदौर के वार्ड क्रमांक दो, रानीपुरा क्षेत्र के निवासी हैं।
रामदास ने बताया कि वह बाबा महाकाल के अनन्य भक्त हैं, वहीं से मुझे सनातन धर्म में आने की प्रेरणा प्राप्त हुई यहां निकलने वाली शोभा यात्रा का वह कार्यकर्ता भी है। सनातन धर्म से पहले से प्यार रहा है वह सभी देवी देवताओं की पूजा अर्चना करते हैं और इस धर्म में अपना भविष्य देखते हैं। सनातन धर्म जैसा दूसरा धर्म नहीं है यहां विचारधारा में कोमलता होती। हमें भारत सहित विश्व में सम्मानित रूप से देखा जाता है। सनातन धर्म की रक्षा के लिए मेरा पूरा जीवन समर्पित रहेगा।
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कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी के साथ पंगत में बैठकर भोजन प्रसाद ग्रहण किया उन्होंने सनातन धर्म का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातनी कोमल हृदय होते हैं उनका पूरा परिवार मुंबई में रहता है। इस अवसर पर उपस्थित संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं ने इसे सनातन संस्कृति की पुनर्स्थापना एवं आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक बताया।